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नेपाल ने संसद में माना, कालापानी और सुस्ता के अलावा भी भारत सीमा पर अतिक्रमण

नेपाली कांग्रेस के एक सांसद के सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त नक्शांकन अभी जारी है, लेकिन जगहों की कोई सूची नहीं दी। मंत्रालय ने कहा कि काठमांडू यह मसला बातचीत से सुलझाना चाहता है।

संपादकीय डेस्क से · काठमांडूप्रकाशित
कालापानी क्षेत्र का एक पुराना सर्वे नक्शा (फ़ाइल फ़ोटो)
कालापानी क्षेत्र का एक पुराना सर्वे नक्शा (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: E. C. Ryal, Great Trigonometric Survey of India / Wikimedia Commons, Public domain

मुख्य बातें

  1. नेपाल के विदेश मंत्रालय ने चार ज्ञात विवादों के अलावा अन्य जगहों पर भी सीमा-पार अतिक्रमण की बात मानी।
  2. मंत्रालय ने संयुक्त टीमों की पहचानी गई जगहों की न संख्या बताई, न नाम।
  3. भारत-नेपाल सीमा कार्य समूह ने जुलाई 2025 से तीन साल के भीतर तकनीकी काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

नेपाल सरकार ने संसद को बताया है कि भारत से लगी सीमा पर लंबे समय से विवादित चार इलाकों के अलावा भी अतिक्रमण है, लेकिन यह नहीं बताया कि कहां।

यह बात विदेश मंत्रालय ने नेपाली कांग्रेस के सांसद निश्कल राई को दिए लिखित जवाब में मानी। राई ने सुस्ता, कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा के पुराने विवादों का ज़िक्र करते हुए पूछा था कि नेपाल-भारत की संयुक्त टीमों ने ऐसी कितनी और प्रभावित जगहें पहचानी हैं और वे कहां हैं।

मंत्रालय ने कहा कि इन चार इलाकों के अलावा, जहां नक्शांकन “अभी अधूरा है”, सीमा के कुछ हिस्सों में “सीमा-पार कब्ज़े और नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण की समस्याएं मौजूद हैं”। उसने न कोई संख्या दी, न किसी एक जगह का नाम लिया।

मंत्रालय के मुताबिक इन जगहों का नक्शांकन नेपाल-भारत सीमा कार्य समूह और दूसरी व्यवस्थाओं के ज़रिए हो रहा है, और नेपाल ऐतिहासिक संधियों, समझौतों और नक्शों के आधार पर “इस मसले को कूटनीतिक बातचीत से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है”। मौजूदा सीमा ज़्यादातर 1816 की सुगौली संधि पर टिकी है, और दोनों देशों के बीच खुली सीमा है।

सीमा कार्य समूह 2014 में सीमा स्तंभ बनाने और उनकी मरम्मत जैसे तकनीकी कामों के लिए बना था। इसकी पहली बैठक जुलाई 2015 में काठमांडू में हुई और अब तक कुल सात बैठकें हो चुकी हैं। 28-29 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में हुई सबसे ताज़ा बैठक में दोनों पक्षों ने कालापानी और सुस्ता को छोड़कर बाकी तकनीकी काम तीन साल में पूरा करने पर सहमति दी थी।

यह जवाब ऐसे समय आया है जब काठमांडू में भारत से रिश्तों पर बहस चल रही है। वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक सम्मेलन में कहा था कि नेपाली राष्ट्रवाद के भारत-विरोधी भावना से जुड़े होने का दौर “खत्म हो चुका है”। इस पर पूर्व विदेश मंत्री कमल थापा समेत कुछ लोगों ने उनकी आलोचना की। भारत ने मंत्रालय के जवाब पर कोई टिप्पणी नहीं की है।