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बारा में गवर्नर शासन के खिलाफ पीटीआई का प्रदर्शन हिंसक, सरकारी इमारतों में आगजनी

खैबर जिले में पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और हवा में गोलियां चलाईं। इस्लामाबाद में शहबाज शरीफ ने सहयोगियों को साथ लिया, और सोहेल अफरीदी के भाई ने उन्हें ढूंढने के लिए पेशावर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

संपादकीय डेस्क से · पेशावरप्रकाशित
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ (फ़ाइल फ़ोटो)
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Press Service of the President of the Republic of / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. बारा में प्रदर्शनकारियों ने नाद्रा दफ्तर और रेस्क्यू 1122 की इमारत के एक हिस्से में आग लगा दी, पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और हवा में गोलियां चलाईं।
  2. पुलिस ने 50 लोगों की गिरफ्तारी बताई, जबकि प्रांत की नई सूचना सलाहकार ने यह संख्या 42 बताई।
  3. सोहेल अफरीदी के भाई ने हटाए गए मुख्यमंत्री का पता लगाने के लिए पेशावर हाईकोर्ट में याचिका दी है।

खैबर पख्तूनख्वा पर केंद्र के नियंत्रण के खिलाफ मंगलवार को बारा में हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ता पुलिस से भिड़ गए और सरकारी इमारतों में आग लगा दी गई। रविवार को प्रांत में गवर्नर शासन और इसके 12 जिलों में आपातकाल लगाए जाने के बाद यह सबसे गंभीर अशांति है।

प्रदर्शन दोपहर में खैबर जिले के बारा बाजार के खैबर चौक पर दर्जनों पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ शुरू हुआ। पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया और आंसू गैस छोड़ी। जब स्थानीय विधायक अब्दुल गनी अफरीदी और समर्थकों के साथ पहुंचे, तो भीड़ ने पुलिस को पीछे धकेल दिया। कुछ पुलिसकर्मियों ने पास की दुकानों में शरण ली, और खबरों के मुताबिक उन्हें बाहर घसीटा गया। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और हवा में गोलियां चलाईं।

खबरों के मुताबिक राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण नाद्रा के दफ्तर और पास की रेस्क्यू 1122 इमारत के एक हिस्से में आग लगा दी गई। पेशावर के हयाताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स के एक डॉक्टर ने बताया कि एक दर्जन से ज्यादा घायल लाए गए, जिनमें चार पुलिसकर्मी हैं। भीड़ को तितर-बितर करने के बाद बारा बाजार जाने वाली सभी सड़कें बंद कर दी गईं।

गिरफ्तारियों के अलग-अलग आंकड़े

पेशावर पुलिस ने कहा कि “अशांति फैलाने की कोशिश” करने वाले 50 “शरारती तत्वों” को गिरफ्तार किया गया। प्रांत की नवनियुक्त सूचना सलाहकार समर हारून बिलौर ने पीटीआई से जुड़े 42 लोगों की गिरफ्तारी बताई और कहा कि इनमें 25 पाकिस्तान में अवैध रूप से रह रहे अफगान हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर सरकारी संपत्ति नष्ट करने का आरोप लगाया।

शहबाज ने सहयोगियों को साथ लिया

इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एमक्यूएम-पी, पीएमएल-क्यू, बलूचिस्तान अवामी पार्टी और इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी समेत सहयोगी दलों से मुलाकात की। सभी ने फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “हमने यह कठोर कदम उठाने से बचने की हर तरह से पूरी कोशिश की।”

शहबाज ने कहा कि संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा को आतंकवाद से लड़ने के लिए 800 अरब रुपये से ज्यादा दिए, लेकिन प्रांत ने अपने आतंकवाद-रोधी विभाग को मजबूत नहीं किया। उन्होंने इमरान खान की रिहाई के लिए पीटीआई के लॉन्ग मार्च को “देश की सुधरती अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की साजिश” बताया।

सीनेट में पीटीआई के संसदीय नेता अली जफर ने गवर्नर शासन को “सुरक्षा समाधान के लिबास में राजनीतिक संकट” कहा। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि ये कदम संवैधानिक हैं और आरोप लगाया कि पीटीआई नेता पाकिस्तानी तालिबान के संपर्क में थे। उन्होंने कहा कि “जरूरत पड़ने पर” सबूत पेश किए जाएंगे। ऐसे संपर्कों का कोई सबूत अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।

भाई अदालत में

गवर्नर शासन में किनारे किए गए मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को रविवार को ले जाया गया था। उनके भाई मुहम्मद आमिर ने मंगलवार को पेशावर हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) में याचिका देकर उनका पता लगाने की मांग की। याचिका में आरोप है कि अफरीदी को पेशावर पुलिस प्रमुख की मौजूदगी में “अज्ञात हथियारबंद और नकाबपोश लोग” मुख्यमंत्री आवास से ले गए। सरकार का कहना है कि अफरीदी और कुछ मंत्री एहतियाती हिरासत में हैं।

पीटीआई के सूचना सचिव शेख वकास अकरम ने कहा कि पार्टी आपातकाल और गवर्नर शासन को अदालत में चुनौती देगी। उन्होंने कहा, “लॉन्ग मार्च खत्म नहीं हुआ है। लेकिन पार्टी के खिलाफ ऐतिहासिक कार्रवाई शुरू हो गई है।”

आगे क्या

आपातकाल की घोषणा 10 दिन के भीतर संसद के दोनों सदनों के सामने रखनी होगी। गवर्नर शासन संयुक्त बैठक में जाएगा और मंजूरी न मिलने पर दो महीने बाद खत्म हो जाएगा। नेशनल असेंबली की बैठक बुधवार को स्थानीय समय सुबह 11 बजे फिर होगी, और स्पीकर अयाज सादिक ने कहा है कि तब राजनीतिक बहस की इजाजत होगी।