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ट्रंप ने धोखाधड़ी की सूचना देने वालों के लिए 2.5 करोड़ डॉलर की योजना शुरू की, सवाल पूछने वाले पत्रकार से कहा 'संभलकर रहना'
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मंगलवार को ओवल ऑफ़िस में न्याय विभाग की इनाम योजना शुरू की, फिर उस पत्रकार पर भड़क गए जिसने पूछा था कि इनाम इतना कम क्यों है।

मुख्य बातें
- ट्रंप और वेंस ने न्याय विभाग के साथ मिलकर 2.5 करोड़ डॉलर की फ्रॉड व्हिसलब्लोअर इंसेंटिव योजना का ऐलान किया।
- जिनकी पुष्ट सूचना से सज़ा या बड़ी कार्रवाई होगी, उन्हें 30,000 डॉलर तक मिल सकते हैं।
- 1% कमीशन पर सवाल उठाने वाले द इंडिपेंडेंट के एंड्रयू फ़ीनबर्ग से ट्रंप ने कहा, "संभलकर रहना"।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मंगलवार को सरकार के साथ धोखाधड़ी की सूचना देने वाले अमेरिकियों को इनाम देने के लिए 2.5 करोड़ डॉलर की योजना शुरू की। लेकिन ओवल ऑफ़िस के इस कार्यक्रम का एक हिस्सा उस पत्रकार के साथ तीखी बहस में बीता, जिसने पूछा कि यह योजना असल में कितनी फ़ायदेमंद है।
न्याय विभाग के साथ चलने वाली फ्रॉड व्हिसलब्लोअर इंसेंटिव योजना के तहत उन नागरिकों को 30,000 डॉलर तक दिए जाएंगे, जिनकी पुष्ट सूचना से किसी को सज़ा हो या कोई बड़ी कार्रवाई हो।
द इंडिपेंडेंट के व्हाइट हाउस संवाददाता एंड्रयू फ़ीनबर्ग ने पूछा कि जब फ़ॉल्स क्लेम्स एक्ट 10% से 25% तक इनाम की अनुमति देता है, तो यह योजना सिर्फ़ 1% कमीशन क्यों दे रही है। फ़ॉल्स क्लेम्स एक्ट सरकार के खिलाफ़ धोखाधड़ी के मामलों में व्हिसलब्लोअर को इनाम देने वाला पुराना कानून है।
ट्रंप ने सवाल का जवाब नहीं दिया। उन्होंने फ़ीनबर्ग से कहा, “मुझे नहीं पता तुम कौन हो, लेकिन संभलकर रहना।” वेंस ने इस सवाल को “बुनियादी तौर पर बेईमानी भरा” बताया।
दूसरी झड़प
बाद में जब फ़ीनबर्ग ने ट्रंप के गोल्फ़ कोर्स के बारे में पूछने की कोशिश की, तो राष्ट्रपति ने उन्हें बीच में ही रोक दिया। ट्रंप ने कहा, “चुप रहो,” और फिर पूछा: “क्या तुम बीमार आदमी हो?” फ़ीनबर्ग ने जवाब दिया: “जहां तक मुझे पता है, नहीं।” उनका सवाल पूरा नहीं हो सका।
इसके बाद ट्रंप की रैपिड रिस्पॉन्स टीम ने एक्स पर फ़ीनबर्ग का नाम लेकर उन पर हमला करने वाली पोस्ट डाली।
यह ट्रंप और उन्हें कवर करने वाले पत्रकारों के बीच टकराव की लंबी कड़ी में ताज़ा मामला है। वे अक्सर अपने खिलाफ़ खबरों को “फ़ेक न्यूज़” कहकर खारिज करते हैं और कहते हैं कि ज़्यादातर मीडिया उनके प्रति पक्षपाती है।
यह विवाद 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव से दो हफ़्ते पहले हुआ।