दुनियापश्चिम एशिया
पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ मक्का रक्षा समझौता तुर्किये की संसद में पेश
16 अनुच्छेदों वाली यह संधि तीनों देशों को किसी एक पर हमला होने पर फौरन मदद के लिए बांधती है। यह प्रावधान नाटो के अनुच्छेद 5 जैसा है।
मुख्य बातें
- मक्का संयुक्त रक्षा समझौता अनुमोदन के लिए तुर्किये की संसद में भेजा गया है।
- अनुच्छेद 2 के तहत किसी साथी पर सशस्त्र हमला होने पर बाकी देश फौरन मदद करेंगे।
- समझौता 10 साल चलेगा, जिसके बाद कोई भी सदस्य अलग हो सकता है।
तुर्किये ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ हुई त्रिपक्षीय रक्षा संधि को अनुमोदन के लिए अपनी संसद में भेज दिया है। सऊदी अरब पर हूती हमलों के बीच यह गठबंधन कानून बनने की ओर एक कदम और बढ़ा है।
मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर 7 अगस्त को हस्ताक्षर हुए थे और इसमें 16 अनुच्छेद हैं। अनुमोदन के लिए सिर्फ साधारण बहुमत चाहिए, जो सत्तारूढ़ गठबंधन के पास है, लेकिन प्रक्रिया में समय लगने और सदन में तीखी बहस की उम्मीद है।
संधि में क्या है
अनुच्छेद 1 के तहत हस्ताक्षर करने वाले देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता के लिए खतरों को दूर करने में “सभी ज़रूरी साधनों” का इस्तेमाल करेंगे।
अनुच्छेद 2 इस समझौते का मूल है। मसौदे के मुताबिक अगर किसी एक पक्ष पर सशस्त्र हमला होता है, तो बाकी “हमले के शिकार पक्ष को फौरन सहायता देंगे”। यह प्रावधान नाटो के अनुच्छेद 5 जैसा है, हालांकि हर देश ज़रूरत का आकलन करके और सैन्य क्षमताओं समेत अपने उपलब्ध संसाधनों के आधार पर “दी जाने वाली मदद का दायरा और स्वरूप तय करेगा”।
अनुच्छेद 3 से 6 रक्षा उद्योग में सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने, रसद, संयुक्त प्रशिक्षण और “हर तरह के आतंकवाद” से लड़ने से जुड़े हैं। समझौते में उन्नत तकनीक में संयुक्त शोध और तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों की एक रक्षा समिति का भी प्रावधान है। दूसरे देश भी इसमें शामिल हो सकते हैं, लेकिन तभी जब तीनों संस्थापक सदस्य सहमत हों। यह 10 साल चलेगा, जिसके बाद कोई भी सदस्य अलग हो सकता है।
आगे क्या
संसद के स्पीकर संधि को विदेश मामलों के आयोग को भेजेंगे, जो जल्द से जल्द शुक्रवार को इस पर चर्चा कर सकता है। आयोग को मिलते ही इसका पूरा पाठ सार्वजनिक होने की उम्मीद है। सिर्फ अनुमोदन से तुर्की सैनिक कहीं तैनात नहीं होंगे, इसके लिए अलग कानून की ज़रूरत होगी।
तुर्किये के राष्ट्रपति कार्यालय के संचार निदेशक बुरहानेत्तिन दुरान ने एक्स पर कहा कि इस साझेदारी का मकसद “सामूहिक प्रतिरोध को मज़बूत करना, रक्षा क्षेत्र में संयुक्त क्षमताएं बढ़ाना” है। उन्होंने इसे तीनों देशों के सहयोग के “संस्थागत रूप” की ओर कदम बताया।
राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने सोमवार को रियाद हवाई अड्डे पर हूती हमलों का ज़िक्र करते हुए कहा था कि तुर्किये “आग के घेरे से घिरा” है।
अभी यह क्यों अहम है
इस महीने की शुरुआत में तीनों देशों ने समझौते के तहत “प्रतिरोधक कदम” सक्रिय करने और यमन के हूतियों का मुकाबला करने के लिए सऊदी अरब में सेना भेजने पर सहमति दी थी। हूती सऊदी तेल ठिकानों और मुख्य हवाई अड्डे पर मिसाइलें और ड्रोन दाग चुके हैं। सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन हूती ठिकानों पर हवाई हमलों से जवाब दे रहा है।
पाकिस्तान के लिए यह रियाद के साथ दूसरा रक्षा समझौता है। पहला सितंबर 2025 का रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता था। इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य मध्यस्थ भी है, और उसके सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर मंगलवार को ईरानी नेतृत्व से बातचीत के लिए तेहरान में थे।