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आरएएफ़ फ़ेयरफ़र्ड साज़िश के पीछे ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड: ब्रिटेन

प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने सांसदों से कहा कि अमेरिकी बमवर्षकों वाले एयरबेस के पास की यह साज़िश लगभग निश्चित रूप से आईआरजीसी के निर्देश पर थी। ईरानी राजदूत तलब किए गए और दो ईरानियों पर प्रतिबंध लगे।

संपादकीय डेस्क से · लंदनप्रकाशित
2023 में इंग्लैंड के आरएएफ़ फ़ेयरफ़र्ड में अमेरिकी बी-1 बमवर्षक (फ़ाइल फ़ोटो)
2023 में इंग्लैंड के आरएएफ़ फ़ेयरफ़र्ड में अमेरिकी बी-1 बमवर्षक (फ़ाइल फ़ोटो)US Air Force / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. बर्नहम ने कहा कि इस साज़िश का समन्वय बहुत संभवतः ईरान से हुआ था।
  2. ब्रिटेन ने आईआरजीसी के एक वरिष्ठ काउंटर-इंटेलिजेंस अधिकारी समेत दो ईरानी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए।
  3. 27 सितंबर से सात लोग गिरफ़्तार हुए, सभी ज़मानत पर हैं और किसी पर आरोप तय नहीं हुआ।

ब्रिटेन ने आरएएफ़ फ़ेयरफ़र्ड में एक संदिग्ध साज़िश के पीछे ईरान का हाथ बताया है। ग्लूस्टरशायर का यह एयरबेस ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध में अमेरिकी बमवर्षकों के इस्तेमाल में रहा है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने सोमवार को सांसदों से कहा कि सरकार के आकलन के मुताबिक़ इस घटना का “समन्वय बहुत संभवतः ईरान से हुआ था, और यह लगभग निश्चित रूप से ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के निर्देश पर था।”

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन अपनी ज़मीन पर ईरान के आपराधिक नेटवर्कों के इस्तेमाल पर सख़्ती करेगा और ईरान व आईआरजीसी की नुकसान पहुँचाने की क्षमता सीमित करने के लिए और प्रतिबंध लगाएगा।

राजदूत तलब, दो ईरानियों पर प्रतिबंध

विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने अपने विभाग को ईरान के राजदूत को तलब करने का निर्देश दिया। उन्होंने एक बयान में कहा, “ब्रिटेन अपनी ज़मीन पर धमकियाँ बर्दाश्त नहीं करेगा।” उन्होंने ईरान की “ब्रिटेन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की सुरक्षा को कमज़ोर करने की लगातार कोशिशों” को अस्वीकार्य बताया।

दो ईरानी नागरिकों पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगाए गए, जिनमें संपत्ति ज़ब्ती, यात्रा प्रतिबंध और कंपनी निदेशक बनने पर रोक शामिल है। ये हैं आईआरजीसी में काउंटर-इंटेलिजेंस अभियानों के प्रमुख रूहुल्लाह बज़ग़ंदी, और ज़िंदाश्ती आपराधिक नेटवर्क के मददगार बताए गए शहराम अली रज़ा तमरज़ादेह जक्की।

फ़ेयरफ़र्ड में क्या हुआ था

रविवार 27 सितंबर को आधी रात के ठीक बाद पुलिस को सूचना मिली कि तीन संदिग्ध गाड़ियाँ एयरबेस की ओर जा रही हैं। पास के गाँव व्हेलफ़र्ड की एक किसान ने अपने घर का रास्ता बंद पाया और वहाँ नक़ाबपोश और हुड पहने लोगों का एक बड़ा समूह देखा। उन्होंने 999 पर फ़ोन किया।

सशस्त्र पुलिस ने पाँच लोगों को गिरफ़्तार किया। सभी ब्रिटिश नागरिक हैं, लंदन में रहते हैं और उनकी उम्र 23 से 25 साल के बीच है। बम निरोधक रोबोट ने वैन की जाँच की और लगभग 85 परिवारों को घर छोड़ने को कहा गया। पुलिस ने बाद में बताया कि कोई विस्फोटक उपकरण नहीं मिला, हालाँकि कुछ मात्रा में पेट्रोल बरामद हुआ।

इसके बाद दो और गिरफ़्तारियाँ हुईं: 1 अक्टूबर को ब्रिटिश और ईरानी दोहरी नागरिकता वाला 25 साल का एक युवक, और 6 अक्टूबर को 22 साल का एक ब्रिटिश नागरिक। सातों पुलिस ज़मानत पर हैं और किसी पर आरोप तय नहीं हुआ है। काउंटर टेररिज़्म पुलिसिंग का कहना है कि वह किसी विदेशी देश या उसके प्रॉक्सी की भूमिका समेत हर पहलू की जाँच कर रही है।

उस समय लंदन में ईरानी दूतावास ने गिरफ़्तारियों से किसी भी संबंध को ख़ारिज करते हुए अटकलों को दुर्भावनापूर्ण बताया था।

यह एयरबेस अहम क्यों है

आरएएफ़ फ़ेयरफ़र्ड में अमेरिकी वायुसेना की 501वीं कॉम्बैट सपोर्ट विंग तैनात है। ब्रिटिश सरकार ने मार्च में फ़ेयरफ़र्ड और डिएगो गार्सिया से “रक्षात्मक” अमेरिकी कार्रवाई को मंज़ूरी दी थी, जिसके बाद ईरान पर हमलों में अमेरिकी बी-1 और बी-2 बमवर्षक यहीं से उड़े। संदिग्ध साज़िश के बाद बमवर्षक यहाँ से हटा लिए गए, हालाँकि इसकी वजह साफ़ नहीं है।

बर्नहम से पहले प्रधानमंत्री रहे सर कीर स्टार्मर ने जुलाई में आईआरजीसी के समर्थन पर पाबंदी लगाई थी, और तब से इस संगठन को ब्रिटेन के नए राज्य-ख़तरा क़ानूनों के तहत नामित किया जा चुका है। पहली गिरफ़्तारियों के समय अधिकारियों ने इस घटना को ईरान से नहीं जोड़ा था, हालाँकि इसकी संभावना से इनकार भी नहीं किया था।

मूल दस्तावेज़