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कांगो में इबोला के बुंदीबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ टीके का ट्रायल शुरू, मौतें 4,600 के पार

तुमैनी ट्रायल के तहत बुनिया में पहले स्वयंसेवकों को टीका लगा। इसमें ऑक्सफ़र्ड और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया का बनाया टीका भी परखा जाएगा।

संपादकीय डेस्क से · बुनियाप्रकाशित
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस (फ़ाइल फ़ोटो)
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Foreign, Commonwealth & Development Office / Wikimedia Commons, CC BY 2.0

मुख्य बातें

  1. तुमैनी ट्रायल पूर्वी कांगो के बुनिया में 23 अक्टूबर को पहले टीकाकरण के साथ शुरू हुआ।
  2. 21 अक्टूबर तक कांगो में 9,552 मामले और 4,602 मौतें दर्ज हो चुकी थीं।
  3. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के साथ बना ऑक्सफ़र्ड का टीका भी ट्रायल में जुड़ेगा।

कांगो ने इबोला के बुंदीबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ टीकों का परीक्षण शुरू कर दिया है। इस स्ट्रेन के लिए आज तक कोई टीका मंज़ूर नहीं हुआ है। देश में इस बीमारी का अब तक का सबसे बड़ा प्रकोप 4,600 से ज्यादा जानें ले चुका है।

पहले स्वयंसेवकों को शुक्रवार को देश के पूर्व में बुनिया में टीका लगाया गया। ट्रायल का नाम तुमैनी है, जिसका स्वाहिली में अर्थ है “उम्मीद”। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस ने एक्स पर लिखा, “विज्ञान हमें उम्मीद देता है।” उन्होंने कहा, “यह ट्रायल हमें यह समझने में मदद करेगा कि बुंदीबुग्यो वायरस के लिए बनाए गए टीकों में से कोई काम करता है या नहीं।”

दूसरे और तीसरे चरण का यह ट्रायल एर्वेबो से शुरू होगा, जो ज़्यादा आम ज़ायर स्ट्रेन के खिलाफ लाइसेंसशुदा टीका है। देखा जाएगा कि यह बुंदीबुग्यो से भी कुछ बचाव देता है या नहीं। बुंदीबुग्यो के लिए बने दो टीके बाद में जुड़ेंगे: मॉडर्ना का एमआरएनए टीका और ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी का सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के साथ विकसित ChAdOx1 BDBV। दोनों अभी छोटे, शुरुआती ट्रायल में हैं।

ट्रायल में रिंग टीकाकरण होगा, यानी पुष्ट मरीज़ों के संपर्क में आए लोगों और ज़्यादा जोखिम वालों को टीका दिया जाएगा। इसकी अगुवाई कांगो का इंस्टीट्यूट नैशनल दे रिशर्श बायोमेडिकाल और बेल्जियम की एंटवर्प यूनिवर्सिटी कर रहे हैं। डब्ल्यूएचओ तकनीकी सलाह दे रहा है और वैक्सीन गठबंधन सेपी पैसा दे रहा है। कांगो को एर्वेबो की शुरुआती 70,000 खुराकें मिली हैं, जिनमें 20,000 ट्रायल के लिए और 50,000 अग्रिम मोर्चे के स्वास्थ्यकर्मियों के लिए हैं।

15 मई को प्रकोप घोषित होने के बाद से 21 अक्टूबर तक कांगो में 9,552 मामले और 4,602 मौतें दर्ज हुई थीं। वायरस केन्या और इसी हफ्ते नाइजीरिया तक पहुंच चुका है। अफ़्रीका सीडीसी के महानिदेशक जीन कासेया ने इस बात की आलोचना की है कि युगांडा में इस स्ट्रेन की पहचान के करीब दो दशक बाद भी इसके टीके पर निवेश नहीं हुआ।

ट्रायल शुरू होने का मतलब यह नहीं कि इनमें से कोई टीका इस स्ट्रेन पर कारगर साबित हो चुका है।