नीतिपर्यावरण
भूपेंद्र यादव ने स्टार्टअप्स से दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण के सस्ते और बड़े पैमाने के हल मांगे
पर्यावरण मंत्री ने छेड़छाड़-रोधी उत्सर्जन मॉनिटर से लेकर धूल नियंत्रण और पराली तक नौ क्षेत्रों की समस्याएं सामने रखीं और पूछा कि नवाचारी अपनी तकनीक जमीन पर कैसे उतारें।
मुख्य बातें
- यादव ने वायु प्रदूषण प्रबंधन के नौ क्षेत्रों की समस्याएं नवाचारियों के सामने रखीं।
- प्रदर्शित तकनीकों में पराली जलाने की चौबीसों घंटे पहचान और बिना वैध पीयूसी वाले वाहनों की स्वचालित पहचान शामिल थी।
- उन्होंने कृषि मंत्रालय, सीएक्यूएम और सीपीसीबी को मिलाकर पराली भंडारण के दिशानिर्देश बनाने की बात कही।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को स्टार्टअप्स और तकनीकी कंपनियों से मुलाकात कर दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण घटाने के व्यावहारिक, किफायती और बड़े पैमाने पर लागू हो सकने वाले तरीके तलाशे।
यादव ने वायु प्रदूषण प्रबंधन के नौ प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी खास समस्याएं सामने रखीं और नवाचारियों से पूछा कि उनकी तकनीक को जमीन पर कैसे ढाला और लागू किया जा सकता है। इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के अधिकारी मौजूद थे।
मंत्री ने इस बैठक को नीति निर्माताओं और तकनीकी नवाचारियों के बीच की दूरी पाटने की एक नई, सक्रिय पहल बताया। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी पकड़ने के लिए ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के आंकड़ों को संयंत्रों के संचालन के आंकड़ों से जोड़ना जरूरी है, और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मदद कर सकती है। उन्होंने छेड़छाड़-रोधी पीयूसी जांच और ट्रैफिक जाम वाली जगहों का एआई से अनुमान लगाने की भी जरूरत बताई।
प्रदर्शित समाधान निगरानी, पूर्वानुमान और प्रवर्तन तीनों से जुड़े थे: हाइपरलोकल वायु गुणवत्ता सेंसर, शहर भर की प्रदूषण मैपिंग, एआई आधारित स्रोत पहचान, पराली और खुले में बायोमास जलाने की चौबीसों घंटे पहचान, और बिना वैध पीयूसी प्रमाणपत्र या तय उम्र पार कर चुके वाहनों की स्वचालित पहचान। कुछ समाधान निर्माण स्थलों की धूल, कम लागत वाली मशीनी सड़क सफाई और चलते-फिरते गड्ढा मरम्मत से जुड़े थे।
पराली के मुद्दे पर यादव ने कृषि मंत्रालय, सीएक्यूएम और सीपीसीबी के साथ मिलकर पराली भंडारण के दिशानिर्देश बनाने और खेत में ही फसल अवशेष भंडारण का मॉडल विकसित करने की बात कही। स्टार्टअप्स ने पराली को बायोएनर्जी, बायोमास ईंधन, कंपोस्ट, बायोचार और पैकेजिंग में बदलने के तरीके भी दिखाए।
यह बैठक सरकार के “साफ हवा में हिस्सेदारी, हम सभी की है जिम्मेदारी” अभियान का हिस्सा थी, और इसका मकसद ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान जैसे मौजूदा उपायों को मजबूती देना है।
मूल दस्तावेज़
- Union Environment Minister interacts with Start-ups to explore Affordable, Scalable, Technology-driven Solutions for Air Pollution in Delhi-NCRPress Information Bureau, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, 17 अक्टूबर 2026