LokVox

नीतिरक्षा

उपराष्ट्रपति ने कारवार में नौसेना के पहले बहुउद्देशीय पोत आईएनएस समर्थक को कमीशन किया

एलएंडटी ने कट्टुपल्ली में 75% से ज़्यादा स्वदेशी सामग्री से इसे बनाया है। निजी शिपयार्ड में बना यह पहला बड़ा युद्धपोत है जो नौसेना में शामिल हुआ।

संपादकीय डेस्क से · कारवारप्रकाशित
अपडेट
करवार का तट, जहां काली नदी समुद्र से मिलती है
करवार का तट, जहां काली नदी समुद्र से मिलती हैS5OKINFINITY / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कारवार नौसैनिक अड्डे पर समर्थक को कमीशन किया।
  2. यह नौसेना में शामिल हो रहे चार बहुउद्देशीय पोतों में पहला है।
  3. नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने इसे निजी शिपयार्ड में बना पहला बड़ा युद्धपोत बताया।

उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत समर्थक को कमीशन किया।

यह नौसेना में शामिल हो रहे चार बहुउद्देशीय पोतों में पहला है। लार्सन एंड टुब्रो ने इसका डिज़ाइन अपने वॉरशिप डिज़ाइन सेंटर में तैयार किया और तमिलनाडु के कट्टुपल्ली शिपयार्ड में इसे बनाया। इसमें 75% से ज़्यादा स्वदेशी सामग्री है। कंपनी ने 27 अगस्त को इसे नौसेना को सौंपा था।

नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने कहा कि समर्थक “किसी निजी शिपयार्ड को अनुबंध पर दिया गया और उसी में बना पहला बड़ा युद्धपोत” है जिसे नौसेना में कमीशन किया गया है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम पड़ाव बताया और कहा कि इस निर्माण से मिले सबक का इस्तेमाल गुणवत्ता बढ़ाने और डिलीवरी का समय घटाने में होना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने क्या कहा

राधाकृष्णन ने कहा कि रक्षा में आत्मनिर्भरता “अब सिर्फ़ एक आकांक्षा नहीं, बल्कि उभरती हुई हकीकत” है। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती जहाज़ निर्माण क्षमता से समुद्री सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने में नौसेना और मज़बूत होगी, और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस व मानवरहित प्रणालियां नौसैनिक युद्ध का स्वरूप बदल रही हैं।

उन्होंने कहा कि हिंद महासागर के समुद्री रास्तों से भारत का बड़ा व्यापार और ऊर्जा आती है, इसलिए समुद्री सुरक्षा अर्थव्यवस्था के केंद्र में है। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के बेड़े, चोल नौसेना की पहुंच और पाकिस्तान के साथ 1965 और 1971 के युद्धों में नौसेना की भूमिका को याद किया। साथ ही कारवार के गहरे प्राकृतिक बंदरगाह और प्रोजेक्ट सीबर्ड का ज़िक्र किया, जिसके तहत यहां बर्थ, नौसैनिक हवाई अड्डा, डॉकयार्ड और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं बन रही हैं।

समारोह में कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्सायन, युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण नियंत्रक वाइस एडमिरल संजय साधु और फ्लैग ऑफिसर कर्नाटक रियर एडमिरल विक्रम मेनन मौजूद थे। नौसेना के प्रवक्ता ने एक्स पर लिखा, “स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में एक नया मील का पत्थर!”

जहाज़ क्या काम करेगा

समर्थक नए हथियारों, सेंसरों और उभरती तकनीकों के परीक्षण का समर्पित मंच होगा। इसके अलावा यह समुद्री निगरानी, अपतटीय गश्त, लक्ष्य छोड़ने और वापस लाने तथा मानवरहित प्रणालियों के संचालन का काम करेगा।

लक्ष्य छोड़ते और वापस लेते समय जहाज़ को स्थिर रखने के लिए इसमें डायनेमिक पोज़िशनिंग सिस्टम है। इसमें भारी टोइंग उपकरण, चिकित्सा सुविधाएं और अग्निशमन प्रणाली भी है। आपदा राहत, बचाव अभियान या नागरिकों को निकालने के लिए इसे सीमित क्षमता वाले अस्पताल जहाज़ में बदला जा सकता है।

इसके प्रतीक चिह्न में लहरों से उभरता एक भारतीय हाथी है। इसका आदर्श वाक्य है “विजयार्थम् एकनिष्ठता”, यानी “विजय ही हमारा एकमात्र लक्ष्य है”।

नौसेना के लिए व्यस्त महीना

यह कमीशनिंग चार दिन पहले मुंबई में माहे श्रेणी के तीसरे पनडुब्बी-रोधी शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस मंगरोल को बेड़े में शामिल किए जाने के बाद हुई है। एलएंडटी समर्थक श्रेणी का दूसरा पोत भी बना रही है।

अपडेट 16 अक्टूबर 2026, शाम 5:15 बजे: यह खबर पहली बार प्रकाशित होने के बाद अपडेट की गई।