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चीन से सामान्य रिश्तों के लिए स्थिर सीमा "सामान्य समझ" की बात: जयशंकर

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन के बीच अब भी कोई सहमत सीमा नहीं है। पीयूष गोयल ने कहा कि उचित शर्तों पर भारत चीन के साथ कारोबार के लिए तैयार है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (फ़ाइल फ़ोटो)
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: U.S. Department of State from United States / Wikimedia Commons; Europäische Kommission - Audiovisueller Dienst, Xa / Wikimedia Commons, Public domain and CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच कोई सहमत सीमा नहीं है, यह मसला दशकों पुराना है।
  2. उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाके 2024 से काफी हद तक शांत हो गए हैं।
  3. पीयूष गोयल ने कहा कि चीन से रिश्ते सुधारने के सफर का आखिरी शब्द अभी लिखा नहीं गया है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के बीच अब भी कोई सहमत सीमा नहीं है, और बीजिंग को यह मानना होगा कि सामान्य रिश्तों की कीमत एक स्थिर और शांत सीमा है।

नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में ब्लूमबर्ग के एडिटर-इन-चीफ जॉन मिकलथ्वेट से बातचीत में जयशंकर ने कहा, “भारत और चीन के बीच हमारी कोई सहमत सीमा नहीं है। यह कोई नया मुद्दा नहीं है, यह कई दशकों से चल रहा है।”

उन्होंने लंबे शांत दौर का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, “1975 से 2020 तक, पूरे 45 साल, उस सीमा पर खून नहीं बहा। आखिरी बार 1975 में मौतें हुई थीं।” उन्होंने कहा, “इस दौरान भारत-चीन रिश्ते बढ़े।”

“सीधी-सी बात”

जयशंकर ने कहा कि बीजिंग को संदेश साफ है। उन्होंने कहा, “हम चीनियों से यही कहते हैं: ‘अगर आप सामान्य रिश्ता चाहते हैं, अगर बाकी रिश्ते को आगे बढ़ना है, तो यह सामान्य समझ की बात है।’” उन्होंने कहा, “यह सीधी-सी बात है कि सीमा स्थिर होनी चाहिए, सीमावर्ती इलाकों में शांति और सौहार्द चाहिए।”

उन्होंने कहा कि ज़मीनी हालात सुधरे हैं। उनके शब्दों में, “जैसे-जैसे सीमावर्ती इलाके शांत हो रहे हैं, और 2024 से वे काफी हद तक शांत हो चुके हैं, रिश्ता भी उसी अनुपात में सामान्य होने की ओर बढ़ रहा है।”

यह पूछे जाने पर कि क्या शुरुआती व्यापार समझौता (अर्ली हार्वेस्ट) होने पर भारत ज़्यादा चीनी निवेश की इजाज़त देगा, उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है, और निवेश व बाज़ार पहुंच के मसले सीमा के सवाल से अलग निपटाए जाएंगे।

गोयल: उचित शर्तों पर तैयार

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उसी फोरम में आपूर्ति शृंखला और तकनीकी साझेदारी पर एक पैनल में चीन के साथ कारोबार बढ़ाने की शर्तें गिनाईं।

उन्होंने कहा, “हम दुनिया के सभी देशों के लिए खुले हैं, बशर्ते हमें उचित सौदा मिले, बातचीत में निरंतरता का भरोसा हो और भू-राजनीतिक हालात न बिगड़ें।” उन्होंने कहा, “हम चीन के साथ रिश्ते फिर से विकसित करने पर काम कर रहे हैं, लेकिन इस सफर का आखिरी शब्द अभी लिखा नहीं गया है।”

बैठकों का सिलसिला

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों देश कई स्तरों पर बात करते रहे हैं। उन्होंने कहा, “भारत-चीन संबंधों पर पिछले एक साल में हमारी कई बैठकें हुई हैं।” उन्होंने कहा, “जब राष्ट्रपति शी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए यहां आए थे, तब शिखर स्तर की बैठक हुई थी; वे हमारे प्रधानमंत्री से मिले थे।”

उन्होंने कहा कि सरकार आगे भी जनता को जानकारी देती रहेगी।

कुल मिलाकर इन बयानों से सरकार की लाइन साफ है: चीन के साथ व्यापार और निवेश बढ़ सकता है, लेकिन उसी रफ्तार से जितनी सीमा के हालात इजाज़त दें। ये बयान ऐसे समय आए हैं जब दो दिन पहले बीजिंग ने लद्दाख की 28 जगहों के भारतीय नामों को “अवैध” कहा था, जिसे विदेश मंत्रालय ने खारिज कर दिया।