राजनीतिभाजपा बनाम कांग्रेस
स्मृति ईरानी बोलीं, राहुल गांधी को किनारे करना होगा; खेड़ा की आरएसएस को दलित महिला प्रमुख बनाने की चुनौती
आरएसएस को 'पुरुषों का, संविधान विरोधी पंथ' कहने पर कांग्रेस नेता को लेकर छिड़ा विवाद बुधवार शाम और बढ़ गया। समाजवादी पार्टी के एक सांसद भी इसमें कूद पड़े।
मुख्य बातें
- भाजपा महासचिव स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी की टिप्पणी को "सस्ती टिप्पणी" बताया।
- कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने आरएसएस को दलित महिला को प्रमुख बनाने की चुनौती दी।
- सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने आरएसएस की कार्यशैली को भेदभावपूर्ण बताया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर राहुल गांधी के हमले को लेकर बुधवार शाम और नेता बहस में उतर आए। भाजपा महासचिव स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस नेता को सार्वजनिक जीवन में किनारे किया जाना चाहिए, जबकि कांग्रेस के पवन खेड़ा ने संघ को चुनौती दी कि वह किसी दलित महिला को अपना प्रमुख बनाए।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने मंगलवार को एक्स पर लिखा था, “आरएसएस पुरुषों का, संविधान विरोधी पंथ है जो मानता है कि महिलाएं पुरुषों की संपत्ति हैं।” उन्होंने जोड़ा, “खूबसूरत बात यह है कि उनकी ‘अपनी’ कई महिलाएं मेरे साथ हैं।”
ईरानी ने इस पोस्ट को सुर्खियों में बने रहने के लिए की गई “सस्ती टिप्पणी” बताया। उन्होंने कहा, “यह हमारा कर्तव्य है कि ऐसे व्यक्ति को किनारे किया जाए।”
भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने कहा, “उनकी टिप्पणियों को बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।” विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने दोहराया कि गांधी “मानसिक दिवालियापन” से ग्रस्त हैं और कहा, “हर कार्यक्रम में परिवार मौजूद थे।”
कांग्रेस पीछे नहीं हटी। राज्यसभा सांसद खेड़ा ने सवाल उठाया कि आरएसएस महिलाओं से कैसा व्यवहार करता है और उसे किसी दलित महिला को प्रमुख बनाने की चुनौती दी। संभल से समाजवादी पार्टी (सपा) सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने भी गांधी का साथ दिया। उन्होंने कहा, “आरएसएस की कार्यशैली भेदभावपूर्ण है।”
आरएसएस अपने शताब्दी वर्ष के आखिरी साल में है। उसके प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को नागपुर में विजयादशमी संबोधन दिया था, जिसके कुछ घंटे बाद गांधी ने यह पोस्ट लिखी।