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चीन ने वेनचांग से नौ और सैटनेट उपग्रह भेजे, इस हफ्ते के लॉन्च में इसरो का एनवीएस-03 सबसे अहम
रविवार को लॉन्ग मार्च 8ए रॉकेट ने चीन के सैटनेट ब्रॉडबैंड समूह का एक और जत्था कक्षा में पहुंचाया। भारत का नेविगेशन उपग्रह शुक्रवार को जीएसएलवी से उड़ान भरेगा।

मुख्य बातें
- रविवार को लॉन्ग मार्च 8ए ने वेनचांग से पृथ्वी की निचली कक्षा के नौ सैटनेट संचार उपग्रह लॉन्च किए।
- स्पेसएक्स के वैंडेनबर्ग से 27 और 30 अक्टूबर को दो स्टारलिंक लॉन्च तय हैं।
- इसरो का जीएसएलवी एमके II 30 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से एनवीएस-03 नेविगेशन उपग्रह ले जाएगा।
चीन ने रविवार को अपने सैटनेट ब्रॉडबैंड समूह के नौ और उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाए। इन्हें हैनान द्वीप पर वेनचांग स्पेस लॉन्च साइट से लॉन्ग मार्च 8ए रॉकेट से भेजा गया।
रॉकेट ने भारतीय समय के अनुसार सुबह 7:33 बजे उड़ान भरी। इस जत्थे को सैटनेट एलईओ ग्रुप 28 नाम दिया गया है और लॉन्च सफल बताया गया। इससे दो दिन पहले, शुक्रवार को चीन ने कुछ ही घंटों के अंतर पर दो और मिशन भेजे थे: याओगान 50-03 उपग्रह के साथ लॉन्ग मार्च 6ए, और कई याओगान उपग्रहों के साथ लॉन्ग मार्च 4बी।
निचली कक्षा में स्पेसएक्स का स्टारलिंक अब भी सबसे बड़ा नेटवर्क है। ट्रैकर ऑर्बिटल रडार के मुताबिक शनिवार को ट्रैक किए जा रहे 15,878 सक्रिय उपग्रहों में से 10,061 चालू स्टारलिंक उपग्रह थे। कुल मिलाकर उसने कक्षा में 31,849 सूचीबद्ध वस्तुएं और अंतरिक्ष में 10 लोग गिने।
आने वाला हफ्ता
स्पेसएक्स मंगलवार, 27 अक्टूबर को कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग से 27 और स्टारलिंक उपग्रह लॉन्च करेगा, और 30 अक्टूबर को 27 उपग्रहों का एक और जत्था भेजेगा।
भारत के लिए सबसे बड़ा मौका शुक्रवार को है। इसरो का जीएसएलवी एमके II 30 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से एनवीएस-03 नेविगेशन उपग्रह लेकर उड़ान भरेगा। यह लॉन्च भारत की अपनी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली नाविक (NavIC) के लिए अहम है। जनवरी 2025 में एनवीएस-02 के अपनी कक्षा तक न पहुंच पाने के बाद से नाविक के पास स्वतंत्र पोजिशनिंग के लिए जरूरी चार चालू उपग्रह नहीं हैं। लॉन्च का सटीक समय अभी तय नहीं हुआ है।