LokVox

विज्ञान-तकनीकअंतरिक्ष

मंगल के चंद्रमा से पहली बार मिट्टी लाने को तैयार जापान का एमएमएक्स यान

जाक्सा का मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन मिशन मंगलवार तड़के जापानी समय पर तानेगाशिमा से एच3 रॉकेट पर उड़ान भरेगा। लक्ष्य है 2031 में फ़ोबोस की मिट्टी धरती पर लाना।

संपादकीय डेस्क से · तोक्योप्रकाशित
तानेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र में जापान का एच3 रॉकेट (फ़ाइल फ़ोटो)
तानेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र में जापान का एच3 रॉकेट (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: ウニウニ / Wikimedia Commons; Composited by: NASA / Dr. Edwin V. Bell, II (NSSDC/Raytheon ITSS) Original images: NASA / Viking 1 Orbiter / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0, Public domain

मुख्य बातें

  1. एमएमएक्स मंगलवार, 20 अक्टूबर को सुबह 4:41 बजे (जापानी समय), यानी भारत में रात 1:11 बजे, एच3 रॉकेट से लॉन्च होगा।
  2. यह फ़ोबोस पर दो बार उतरकर उसकी सतह से 10 ग्राम से ज़्यादा मिट्टी लाने की कोशिश करेगा।
  3. नासा ने दो उपकरण दिए हैं और उसे करीब 15% नमूना मिलेगा।

जापान एक ऐसा अंतरिक्ष यान भेजने की तैयारी में है, जो वह करने की कोशिश करेगा जो अब तक किसी मिशन ने नहीं किया: मंगल के एक चंद्रमा पर उतरना, उसकी मिट्टी उठाना और उसे धरती पर वापस लाना।

जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) ने अपने मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन (एमएमएक्स) यान का लॉन्च मंगलवार, 20 अक्टूबर को जापानी समय सुबह 4:41 बजे तय किया है। भारत में तब रात के 1:11 बजे होंगे। यह तानेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से एच3 रॉकेट की दसवीं उड़ान पर जाएगा।

सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो एमएमएक्स अगस्त 2027 में मंगल पहुंचेगा और 2030 तक फ़ोबोस के आसपास रहेगा। नमूनों वाला कैप्सूल 2031 में लौटेगा और उसे ऑस्ट्रेलिया में बरामद करने की योजना है।

मिशन क्या करेगा

एमएमएक्स एक पुराने सवाल का जवाब तलाशेगा: फ़ोबोस और उसका साथी चंद्रमा डिमोस कहां से आए, और वे मंगल के शुरुआती इतिहास के बारे में वैज्ञानिकों को क्या बता सकते हैं।

मिशन के लिए नासा के प्रोग्राम साइंटिस्ट टॉम स्टैटलर ने कहा, “फ़ोबोस और डिमोस मंगल पर हुई किसी विशाल टक्कर के अवशेष हो सकते हैं।”

यान फ़ोबोस के चारों ओर उस कक्षा में जाएगा जिसे जाक्सा क्वासी-सैटेलाइट ऑर्बिट कहता है। वहां वह उसका बारीकी से अध्ययन करेगा और फिर नमूने जुटाने के लिए दो बार धीरे से उतरेगा। जाक्सा का लक्ष्य सतह की ढीली चट्टान और धूल, यानी रेगोलिथ, के 10 ग्राम से ज़्यादा नमूने लाना है। वापसी के लिए 2030 में रवाना होने से पहले आख़िरी चरण में डिमोस को भी देखा जाएगा।

इसके पेलोड में करीब 14 चीज़ें हैं, जिनमें एक लिडार, एक रोवर और नमूने जुटाने की दो प्रणालियां शामिल हैं। जाक्सा का अपना सी-सैंपलर सतह से कुछ इंच नीचे से कोर निकालेगा।

नासा की भूमिका

नासा ने दो उपकरण दिए हैं। जॉन्स हॉपकिन्स एप्लाइड फ़िज़िक्स लैबोरेटरी का बनाया स्पेक्ट्रोमीटर मेगाने फ़ोबोस से निकलने वाली गामा किरणों और न्यूट्रॉन को मापकर पता लगाएगा कि उसकी सतह किन तत्वों से बनी है। ब्लू ओरिजिन की कंपनी हनीबी रोबोटिक्स का बनाया पी-सैंपलर एक लैंडिंग लेग पर लगा है और ऊंचे दबाव वाली नाइट्रोजन के झोंकों से सतह की सामग्री जुटाता है।

नासा का डीप स्पेस नेटवर्क यान को ट्रैक करने और उससे संपर्क में मदद करेगा। नासा को लौटे नमूने का करीब 15% हिस्सा मिलेगा, जिसे ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर में रखा जाएगा।

नासा के साइंस मिशन डायरेक्टोरेट की प्रमुख निकी फ़ॉक्स ने कहा, “एमएमएक्स के नमूने मंगल प्रणाली के बारे में ऐसा विज्ञान सामने लाएंगे जो पीढ़ियों तक सोच बदल देगा।”

आगे क्या

कामयाब रहा तो एमएमएक्स मंगल प्रणाली में कहीं से भी सामग्री लाने वाला पहला मिशन होगा। जाक्सा ने लॉन्च की तारीख में किसी बदलाव का एलान नहीं किया है। अमेरिका में यह लॉन्च सोमवार दोपहर, पूर्वी समय 3:41 बजे होगा।

मूल दस्तावेज़