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स्पेसएक्स का कार्गो ड्रैगन आख़िरी सोलर ऐरे लेकर अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ा

सीआरएस-35 कैप्सूल लॉन्च के दो दिन बाद गुरुवार शाम भारतीय समय पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ गया। इसमें करीब 2,860 किलो सामान और शोध सामग्री है।

संपादकीय डेस्क से · Houstonप्रकाशित
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर स्पेसएक्स का कार्गो ड्रैगन
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर स्पेसएक्स का कार्गो ड्रैगनPhoto: NASA Johnson / Wikimedia Commons, Public domain

मुख्य बातें

  1. ड्रैगन गुरुवार शाम 7:57 बजे (भारतीय समय) अपने आप स्टेशन से जुड़ा, तब स्टेशन दक्षिण अफ़्रीका के ऊपर था।
  2. यह स्टेशन के लिए रोल-आउट सोलर ऐरे का आख़िरी सेट लाया है, जिसे स्पेसवॉक में लगाया जाएगा।
  3. कैप्सूल नवंबर के मध्य तक रुकेगा और फिर कैलिफ़ोर्निया के पास समुद्र में उतरेगा।

स्पेसएक्स का ड्रैगन कार्गो कैप्सूल गुरुवार शाम अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ गया। यह करीब 2,860 किलो सामान, वैज्ञानिक प्रयोग और स्टेशन के नए सोलर पैनलों का आख़िरी सेट लेकर पहुंचा है।

बिना चालक वाला यह यान अमेरिकी पूर्वी समय के अनुसार सुबह 10:27 बजे, यानी भारतीय समय शाम 7:57 बजे, स्टेशन के हार्मनी मॉड्यूल के अंतरिक्ष की ओर वाले पोर्ट से जुड़ा। उस समय दोनों दक्षिण अफ़्रीका से करीब 400 किलोमीटर ऊपर थे। डॉकिंग अपने आप हुई और नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन स्टेशन के अंदर से यान के पास आने और उसकी प्रक्रियाओं पर नज़र रखे हुए थे। ड्रैगन मंगलवार को केप कैनेवरल से लॉन्च होने के दो दिन से कुछ ज़्यादा समय बाद पहुंचा।

सीआरएस-35 उड़ान नासा के कमर्शियल रीसप्लाई सर्विसेज़ अनुबंध के तहत स्पेसएक्स का 35वां आपूर्ति मिशन है।

दल क्या खोलेगा

सवार सामान में सबसे बड़े हैं रोल-आउट सोलर ऐरे के दो पंख, जो स्टेशन के लिए तय आख़िरी जोड़ी है। नासा इन्हें स्पेसवॉक के दौरान लगाएगा, जिससे स्टेशन पर उपलब्ध बिजली बढ़ेगी।

कैप्सूल में भारहीनता में कृत्रिम रेटिना बनाने का उपकरण, बड़े पैमाने पर दवाओं के परीक्षण के लिए त्रि-आयामी हृदय ऊतक, और लैब में बने मानव मस्तिष्क के छोटे मॉडल भी हैं। ये मॉडल पांच हफ़्ते कक्षा में रहेंगे और फिर ज़मीन पर रखे गए एक जैसे नमूनों से उनकी तुलना की जाएगी।

वापसी

ड्रैगन नवंबर के मध्य तक स्टेशन पर रहेगा। रवाना होने से पहले दल इसमें पूरे हो चुके प्रयोग, उपकरण और कचरा भरेगा। इसके बाद यह अलग होकर कैलिफ़ोर्निया के तट के पास प्रशांत महासागर में उतरेगा और समय के लिहाज़ से अहम शोध नमूने धरती पर वैज्ञानिकों तक लाएगा।