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मंगल के चंद्रमा फ़ोबोस से नमूने लाने वाला जापान का एमएमएक्स यान रात 1 बजे के बाद उड़ान भरेगा

एच3 रॉकेट मंगलवार तड़के तानेगाशिमा से मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन यान को लॉन्च करेगा। पांच साल की इस यात्रा का मकसद मंगल के एक चंद्रमा के टुकड़े पहली बार धरती पर लाना है।

संपादकीय डेस्क से · तानेगाशिमा, जापानप्रकाशित
तानेगाशिमा से उड़ान भरता एच3 रॉकेट (फ़ाइल फ़ोटो)
तानेगाशिमा से उड़ान भरता एच3 रॉकेट (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: AF991 / Wikimedia Commons, Public domain

मुख्य बातें

  1. लॉन्च 20 अक्टूबर को जापान समय सुबह 4:41 बजे, यानी मंगलवार रात 1:11 बजे (भारतीय समय) तय है।
  2. एमएमएक्स फ़ोबोस से कम से कम 10 ग्राम सामग्री जुटाएगा।
  3. नमूनों वाला कैप्सूल 2031 में ऑस्ट्रेलिया के वूमेरा में उतरेगा।

जापान मंगलवार तड़के (भारतीय समय) अपना मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन (एमएमएक्स) यान लॉन्च करने वाला है। इस मिशन का मकसद मंगल के किसी चंद्रमा से पहली बार नमूने लाना है।

एच3 रॉकेट को दक्षिणी जापान के तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से 20 अक्टूबर को स्थानीय समय सुबह 4:41 बजे उड़ान भरनी है, यानी भारतीय समय रात 1:11 बजे। मौसम या तकनीकी दिक्कत होने पर लॉन्च विंडो 7 नवंबर तक खुली रहेगी।

मिशन का नेतृत्व जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) कर रही है। नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और फ़्रांस व जर्मनी की अंतरिक्ष एजेंसियां सीएनईएस और डीएलआर इसमें साझेदार हैं।

मिशन क्या करेगा

एमएमएक्स के अगस्त 2027 में मंगल की कक्षा में और अगले महीने मंगल के दो चंद्रमाओं में से बड़े फ़ोबोस की कक्षा में पहुंचने की उम्मीद है। यह सतह पर इडेफ़िक्स नाम का 25 किलो का फ़्रांसीसी-जर्मन रोवर उतारेगा और फिर 2030 में दो जगहों से कम से कम 10 ग्राम सामग्री जुटाएगा।

वापसी में इसका रिटर्न मॉड्यूल छोटे चंद्रमा डीमोस के पास से गुज़रेगा और खुद मंगल का अध्ययन करेगा। नमूनों वाला कैप्सूल 2031 में ऑस्ट्रेलिया के वूमेरा प्रोहिबिटेड एरिया में उतरेगा, जहां से सामग्री निकालकर वैज्ञानिकों को दी जाएगी।

जाक्सा अपने मिशन विवरण में कहती है, “मंगल और उसके दोनों चंद्रमा कैसे बने, यह सौरमंडल विज्ञान में भारी बहस का विषय है।” शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि नमूनों से तय हो सकेगा कि फ़ोबोस और डीमोस पकड़े गए क्षुद्रग्रह हैं या मंगल पर किसी बड़ी टक्कर से उछला मलबा।

यह उड़ान पहले 2024 में होनी थी, लेकिन एच3 रॉकेट की दिक्कतों के कारण टल गई।

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