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असम में गोलाघाट, होजाई और नगांव में 638 हेक्टेयर वन भूमि खाली कराई, करीब 1,000 परिवार बेदखल

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि तीन आरक्षित वनों में अतिक्रमणकारियों पर प्रशासन का 'रुद्र रूप' टूटा। अल्पसंख्यक अधिकार समूहों का कहना है कि विस्थापितों का पुनर्वास होना चाहिए।

संपादकीय डेस्क से · गुवाहाटीप्रकाशित
असम के गोलाघाट के दृश्य (फ़ाइल फ़ोटो)
असम के गोलाघाट के दृश्य (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: OmerMarcel / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. बेदखली अभियानों में तीन जिलों में 638 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि खाली कराई गई।
  2. अधिकारियों के मुताबिक संरक्षित इलाकों से करीब 1,000 परिवार हटाए गए।
  3. लुटुमारी, बोरपानी और जमुना-मौदंगा वनों की इस जमीन पर पौधारोपण अभियान चलेगा।

असम सरकार ने पिछले कुछ दिनों में चलाए गए बेदखली अभियानों में गोलाघाट, होजाई और नगांव जिलों में 638 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि खाली कराई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को यह घोषणा की। अधिकारियों के मुताबिक संरक्षित इलाकों से करीब 1,000 परिवारों को हटाया गया।

सरमा ने सोशल मीडिया पर लिखा, “तीन जिलों में अतिक्रमणकारियों पर हमारे प्रशासन का ‘रुद्र रूप’ टूटा।” उन्होंने कहा, “अभियान में 638 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन खाली कराई गई है।”

ये अभियान लुटुमारी, बोरपानी और जमुना-मौदंगा आरक्षित वनों में चलाए गए। कई दिनों तक भारी सुरक्षा बल, खुदाई मशीनें और प्रशासनिक टीमें उन ढांचों को गिराती रहीं, जिन्हें सरकार अवैध कब्जा बताती है। सरमा ने कहा कि सरकार “हमारे वन पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करेगी”। खाली कराई गई जमीन पर इलाके की जैव विविधता लौटाने के लिए पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा।

मौके पर क्या हुआ

होजाई के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निरुपम हजारिका ने कहा कि तोड़फोड़ शांति से हुई और बुलडोजर पहुंचने से पहले ही कई लोगों ने खुद अपने घर हटा लिए थे। होजाई के जमुना-मौदंगा वन में दोबारा चलाए गए अभियान के निशाने पर 152 परिवार थे।

इतने बड़े पैमाने पर विस्थापन की आलोचना भी हो रही है। अल्पसंख्यक अधिकार समूहों ने परिवारों को इतनी तेजी से उजाड़े जाने पर चिंता जताई है और बेघर हुए लोगों के पुनर्वास की मांग की है। सरकार ने अभी यह नहीं बताया है कि बेदखल परिवार कहां जाएंगे।

आगे क्या

बेदखली अभियान सरमा सरकार की उस कोशिश का अहम हिस्सा हैं, जिसके तहत वह वन भूमि समेत उस जमीन को वापस लेना चाहती है जिसे वह अतिक्रमित बताती है। सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए यह कार्रवाई जरूरी है। गोलाघाट, होजाई और नगांव में खाली कराई गई जमीन पौधारोपण के लिए तय है, हालांकि इसकी कोई समय सारिणी घोषित नहीं हुई है और बेदखल परिवारों के पुनर्वास की कोई योजना भी सार्वजनिक नहीं की गई है।