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केस में नरमी के बदले ₹5 लाख की रिश्वत, सीबीआई ने लखनऊ में ईडी के दो अफसर पकड़े
सीबीआई के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय के लखनऊ जोनल दफ्तर में तैनात एक प्रवर्तन अधिकारी और प्रतिनियुक्ति पर आए एक हेड कांस्टेबल को जाल बिछाकर पकड़ा गया।

मुख्य बातें
- सीबीआई ने लखनऊ में ईडी के प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार और हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी को गिरफ्तार किया।
- द्विवेदी पर ईडी के एक मामले में तलब किए गए व्यक्ति से ₹5 लाख लेने का आरोप है।
- सीबीआई ने 23 अक्टूबर को मामला दर्ज कर जाल बिछाया।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने लखनऊ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ईडी की जांच का सामना कर रहे एक व्यक्ति से उसके मामले में मदद के बदले ₹5 लाख की रिश्वत मांगी और ली।
दोनों आरोपी प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार और ईडी में प्रतिनियुक्ति पर आए हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी हैं। दोनों एजेंसी के लखनऊ जोनल दफ्तर में तैनात थे।
सीबीआई के मुताबिक, शिकायतकर्ता के पिता को ईडी के एक मामले में इस साल अगस्त और सितंबर में दो बार समन भेजा गया था। आरोप है कि द्विवेदी ने प्रवर्तन अधिकारी की ओर से पिता से पैसे मांगे और मामले में अनुकूल रवैये का भरोसा दिलाया।
बेटे की शिकायत पर सीबीआई ने 23 अक्टूबर को मामला दर्ज किया और जाल बिछाया। आरोप है कि द्विवेदी ₹5 लाख लेते हुए पकड़ा गया, जिसके बाद दोनों को हिरासत में ले लिया गया। एजेंसी ने कहा कि जांच जारी है।
सीबीआई ने शिकायतकर्ता का नाम नहीं बताया और न ही यह बताया कि ईडी का मूल मामला किस बारे में है। शनिवार सुबह तक गिरफ्तारियों पर प्रवर्तन निदेशालय का कोई बयान सामने नहीं आया था।
ईडी मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन की जांच करने वाली केंद्रीय एजेंसी है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उसके पास लोगों को तलब करने, पूछताछ करने और गिरफ्तार करने के व्यापक अधिकार हैं। शिकायत के मुताबिक इसी ताकत का सौदा किया जा रहा था: उस व्यक्ति के साथ नरमी, जिसे एजेंसी पहले ही दो बार तलब कर चुकी थी।