राज्यदिल्ली
दिल्ली की हवा आज से 'खराब' श्रेणी में जाने के आसार, हवा थमी और पराली की आग बढ़ी
पूर्व चेतावनी प्रणाली के मुताबिक बुधवार और गुरुवार को इस मौसम में पहली बार हवा खराब रहेगी। बारिश के आसार नहीं हैं और दिवाली का मौसम सामने है। सोमवार शाम 4 बजे औसत एक्यूआई 139 था।
मुख्य बातें
- दिल्ली की हवा 21 और 22 अक्टूबर को खराब रहने का अनुमान है, उसके बाद के छह दिन भी खराब रह सकते हैं।
- सोमवार शाम 4 बजे 24 घंटे का औसत एक्यूआई 139 था; मंगलवार की शुरुआत 161 से हुई।
- 19 अक्टूबर को उपग्रहों ने उत्तर और मध्य भारत में 98 जगह पराली जलने की घटनाएं दर्ज कीं।
दिल्ली की हवा बुधवार से “खराब” श्रेणी में पहुंचने के आसार हैं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक यह खराब हवा के लंबे दौर की शुरुआत हो सकती है, क्योंकि राजधानी साफ आसमान और कमजोर हवाओं के बीच दिवाली के मौसम की ओर बढ़ रही है।
वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली का अनुमान है कि बुधवार और गुरुवार, 21 और 22 अक्टूबर को हवा मध्यम से खराब श्रेणी में चली जाएगी, और उसके बाद के छह दिनों का पूर्वानुमान भी खराब हवा का है। वजह मौसम है: जब वेंटिलेशन इंडेक्स 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से नीचे और औसत हवा की रफ्तार 10 किमी प्रति घंटे से कम हो जाती है, तो प्रदूषक बिखरने के बजाय शहर के ऊपर टिक जाते हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक सोमवार शाम 4 बजे शहर का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 139 था, जो मध्यम श्रेणी में आता है। डेटा देने वाले 58 निगरानी केंद्रों में से दो पहले ही खराब श्रेणी में थे, छह संतोषजनक और बाकी मध्यम। सबसे खराब स्थिति पूसा की रही, जहां एक्यूआई 281 था। दशहरे की सुबह 9 बजे एक्यूआई 161 दर्ज किया गया।
ठंडी रातें, थमी हवा
जल्दी आई ठंड भी समस्या का हिस्सा है। सफदरजंग में सोमवार सुबह न्यूनतम तापमान 17.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो मौसम के औसत से 1.3 डिग्री कम और इस महीने का अब तक का सबसे कम न्यूनतम तापमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग को 25 अक्टूबर तक मुख्य रूप से साफ और शुष्क मौसम की उम्मीद है। अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री और न्यूनतम 19 से 21 डिग्री के बीच रहेगा, और दिल्ली में बारिश के आसार नहीं हैं।
बारिश न होने से प्रदूषण का जमाव टूटने की गुंजाइश कम है। सप्ताहांत में इसकी झलक मिल चुकी थी: रविवार को एक्यूआई 187 रहा, जो मध्यम श्रेणी की ऊपरी सीमा पर है, और 22 निगरानी स्थलों पर हवा खराब दर्ज हुई।
पराली की आग बढ़ी
फसल अवशेष जलाने का धुआं भी बोझ बढ़ाने लगा है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की उपग्रह निगरानी में 19 अक्टूबर को पराली जलाने की 98 घटनाएं दर्ज हुईं: उत्तर प्रदेश में 27, पंजाब में 25, राजस्थान में 24, उत्तराखंड में 18 और मध्य प्रदेश में 4।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पराली जलाने पर नजर रखने के लिए 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक पंजाब और हरियाणा के 34 जिलों में उड़न दस्ते तैनात किए हैं।
मौसम की खराब शुरुआत
अक्टूबर की शुरुआत खराब रही। महीने के पहले चार दिनों का औसत एक्यूआई 174.5 रहा, जो 2020 के बाद इस अवधि का दूसरा सबसे खराब आंकड़ा है। इससे पहले सितंबर पांच साल में सबसे साफ रहा था, जिसका औसत 102 था। महीने की शुरुआत में हुई बारिश से कुछ समय राहत मिली, फिर सूखा दौर शुरू हो गया।
दिल्ली नगर निगम ने अपनी शीतकालीन कार्य योजना लागू कर दी है। सड़कों पर 66 मैकेनिकल स्वीपर, 167 पानी छिड़कने वाली गाड़ियां और 28 मोबाइल एंटी-स्मॉग गन लगाई गई हैं, और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की चिह्नित 46 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर खास निगरानी हो रही है।
खराब हवा से क्या लागू हो सकता है
खराब श्रेणी (एक्यूआई 201 से 300) में पहुंचते ही ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) के तहत पाबंदियां शुरू होती हैं। इस साल मई में दिल्ली का एक्यूआई 208 पहुंचने पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रैप का पहला चरण लागू किया था। आंकड़े बहुत खराब (301 से 400) और गंभीर (400 से ऊपर) श्रेणी में पहुंचने पर और सख्त चरण लागू होते हैं।