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अंकिता भंडारी मामले में धामी ने पुलिस का बचाव किया, कहा कांग्रेस कर रही राजनीति

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का बयान तब आया जब दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के खिलाफ दिल्ली में धरना दे रहे अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिया गया।

संपादकीय डेस्क से · देहरादूनप्रकाशित
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (फ़ाइल फ़ोटो)
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: AS Sayyad / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार ने पहले दिन से हर कानूनी कदम उठाया।
  2. पुलिस के मुताबिक तीनों आरोपी 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार हुए और अब भी जेल में हैं।
  3. गौतम की नियुक्ति का विरोध कर रहे अंकिता के माता-पिता को इंडिया गेट के पास हिरासत में लिया गया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को अंकिता भंडारी हत्याकांड में पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया और कांग्रेस पर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। उनका बयान अंकिता के माता-पिता को दिल्ली में धरने से हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटे बाद आया।

धामी ने कहा, “पहले दिन से हमने इस मामले में हर संभव प्रयास किया है और सभी ज़रूरी कानूनी कार्रवाई की है।” उन्होंने कहा कि इस अपराध के प्रति “बिल्कुल ज़ीरो टॉलरेंस” है, तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सज़ा हो चुकी है, और उनकी सरकार ने परिवार की सीबीआई जांच की मांग मानकर उसके लिए कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अपना कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह यह मामला उठा रही है।

अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) वी मुरुगेसन ने कहा, “पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और 24 घंटे के भीतर तीन लोगों को गिरफ्तार किया; वे अब भी जेल में हैं।”

इंडिया गेट पर धरना

अंकिता के माता-पिता भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में बुधवार से इंडिया गेट के पास धरने पर थे। उनकी मांग है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक नियुक्ति रोकी जाए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार को उनके साथ धरने में शामिल हुए थे और उन्होंने तड़के करीब 4 बजे हुई उनकी हिरासत की निंदा की।

19 साल की अंकिता ऋषिकेश के पास एक रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या हुई और छह दिन बाद उनका शव चीला नहर से मिला। उनका परिवार और कार्यकर्ता लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि इस अपराध से किसी अनाम “वीआईपी” का संबंध था, और इसमें बार-बार गौतम का नाम आया है। ये आरोप साबित नहीं हुए हैं और गौतम इनसे इनकार करते रहे हैं।