राज्यदिल्ली
छात्रसंघ के लिए जामिया में आंदोलन का 12वां दिन, इमरान मसूद समेत 10 लोग हिरासत में
कांग्रेस सांसद को भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मिलकर कैंपस से निकलते ही पुलिस ने पकड़ लिया। सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि वहां जाते समय पुलिस ने उन्हें धक्का दिया।

मुख्य बातें
- दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पास कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत 10 लोगों को हिरासत में लिया।
- छात्र छात्रसंघ की बहाली और 2026-27 के चुनाव कार्यक्रम की मांग कर रहे हैं; जामिया में 2006 से कोई चुना हुआ छात्रसंघ नहीं है।
- विश्वविद्यालय ने कैंपस की दीवारों पर लिखे "वीसी गो बैक" जैसे नारों की निंदा की और सुरक्षा कड़ी की।
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पास कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और नौ अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया। इस केंद्रीय विश्वविद्यालय में चुने हुए छात्रसंघ की बहाली के लिए चल रहा छात्रों का आंदोलन 12वें दिन में पहुंच गया है।
मसूद 12 अक्टूबर से धरने पर बैठे छात्रों से मिलने कैंपस पहुंचे थे। इनमें से कुछ छात्र भूख हड़ताल पर हैं। जैसे ही वे विश्वविद्यालय परिसर से बाहर निकले, पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और कुछ देर बाद छोड़ दिया। रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद और जामिया के पूर्व छात्र मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि प्रदर्शन स्थल की ओर जाते समय पुलिस ने उन्हें रोका और धक्का-मुक्की की। बाद में उन्हें भी छोड़ दिया गया। उनकी हिरासत का वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया।
दिल्ली पुलिस ने हिरासत के बारे में कुछ नहीं कहा।
छात्र क्या चाहते हैं
जामिया में 2006 से कोई चुना हुआ छात्रसंघ नहीं है; आखिरी चुनाव 2005 में हुआ था। आंदोलनकारी छात्र चाहते हैं कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ बहाल हो और 2026-27 सत्र के चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया जाए। वे आंदोलन करने वाले छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग भी कर रहे हैं। उन्होंने हॉस्टल की हालत, हाजिरी के नियम, छात्रवृत्ति और शोध वजीफे जैसे मुद्दे भी उठाए हैं।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्र जसीम अली ने कहा, “हमारी एकमात्र मांग छात्रसंघ की बहाली और उसका कार्यक्रम है।”
कुलपति मज़हर आसिफ समेत वरिष्ठ अधिकारियों की 18 अक्टूबर को हुई बैठक के बाद विश्वविद्यालय ने छात्रों से बात करने और उनकी मांगों पर विचार के लिए सात सदस्यों की एक समिति बनाई। उसने छात्रसंघ का नया संविधान तैयार करने का काम भी शुरू किया है और अनुशासनात्मक मामलों की समीक्षा का वादा किया है। छात्रों का कहना है कि इनमें से कोई भी कदम चुनाव की अधिसूचना की जगह नहीं ले सकता।
17 अक्टूबर को जब अधिकारियों ने गेट नंबर 7 के पास गालिब लॉन से प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की, तब से तनाव बढ़ा है। इसके बाद कई छात्र संगठन आंदोलन में शामिल हो गए हैं। सीपीआई(एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने 21 अक्टूबर को शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर छात्रों के संगठन बनाने के अधिकार का समर्थन किया।
नारों पर विवाद
प्रशासन ने कैंपस की दीवारों पर लिखे नारों की निंदा की है, जिनमें “वीसी गो बैक” और कश्मीर व आरएसएस से जुड़े नारे शामिल हैं। उसने कहा कि जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा रही है। लिखावट को रसायनों से मिटाया गया और प्रशासन का आरोप है कि उस इलाके के कुछ सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ की गई। अब विभागों और केंद्रों में घुसने से पहले छात्रों की जांच की जा रही है।
मसूद ने कहा कि ये नारे आंदोलन को बदनाम करने के लिए लिखे गए। उन्होंने कहा, “वहां ‘आज़ाद कश्मीर’ का कोई नारा नहीं लगा, एक भी नहीं।” उन्होंने कहा, “कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा।” उनका आरोप था कि “इन पोस्टरों के जरिए पूरे आंदोलन को पटरी से उतारने की कोशिश हो रही है”। उन्होंने पुलिस से पोस्टर लगाने वालों पर कार्रवाई की मांग की।
जसीम अली ने भी नारों से पल्ला झाड़ा। उन्होंने कहा, “हम इस बात का पूरी तरह खंडन करते हैं।” उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उसने शांतिपूर्ण आंदोलन खत्म कराने के लिए प्रदर्शनकारियों के बीच अपने लोग बैठा दिए।
हिरासत में लिए जाने से पहले मसूद ने विश्वविद्यालय से सवाल किया। उन्होंने कहा, “छात्रों की मांगें जायज़ हैं। छात्रसंघ बहाल क्यों नहीं किया जा रहा?” उन्होंने कहा, “ये छात्र देश का भविष्य हैं।”
शुक्रवार रात तक छात्रों की मुख्य मांग, यानी छात्रसंघ चुनाव की अधिसूचना, पूरी नहीं हुई थी।