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जूनियर अफसर को डांटने का वीडियो: जम्मू-कश्मीर में आईएएस सचिव के खिलाफ जांच के आदेश

श्रम सचिव कुमार राजीव रंजन के एक समीक्षा बैठक में जेकेएएस अफसर को चुप कराने के वीडियो पर उमर अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती एक सुर में बोले, और नौकरशाही पर नियंत्रण की बहस फिर छिड़ गई।

संपादकीय डेस्क से · श्रीनगरप्रकाशित
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (फ़ाइल फ़ोटो)
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Joel's Goa Pics / Wikimedia Commons, CC BY-SA 2.0

मुख्य बातें

  1. जांच अधिकारी को कुमार राजीव रंजन के बर्ताव पर 15 दिन में रिपोर्ट देनी है।
  2. उमर अब्दुल्ला ने मुख्य सचिव से कहा कि जूनियर अफसर के खिलाफ कोई बदले की कार्रवाई न हो।
  3. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि आईएएस अफसर को जम्मू-कश्मीर से बाहर किया जाना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक वरिष्ठ आईएएस अफसर के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं, जो एक समीक्षा बैठक में एक जूनियर महिला अफसर को डांटते हुए वीडियो में दिखे। इस मामले की नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस, तीनों ने आलोचना की है।

ये अफसर हैं कुमार राजीव रंजन, जो श्रम एवं रोज़गार विभाग के प्रशासनिक सचिव हैं। सोशल मीडिया पर फैले वीडियो में वे इसी हफ्ते मिशन युवा पर हुई बैठक में बीनिश वानी को बीच में टोकते दिख रहे हैं। वानी जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) की अफसर हैं और गांदरबल में रोज़गार विभाग की सहायक निदेशक हैं।

वीडियो में क्या है

वानी ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ तालमेल को लेकर चिंता जताई। रंजन ने आपत्ति की कि मिशन सिर्फ एक सहायक एजेंसी है, और जब वानी ने अपने विभाग के लक्ष्य समझाने चाहे तो वे बीच में बोले: “शट अप! शट अप! डोंट एक्सप्लेन।” वानी ने अपनी बात पूरी करने की इजाज़त मांगी। आरोप है कि इसके बाद रंजन ने एक अपमानजनक शब्द कहा। वानी ने एतराज़ किया तो जवाब मिला: “मैं तुम्हारा बॉस हूं।”

एक आधिकारिक आदेश के मुताबिक 2004 बैच की आईएएस अफसर और आवास एवं शहरी विकास विभाग की आयुक्त-सचिव मनदीप कौर को जांच अधिकारी बनाया गया है, जिन्हें 15 दिन में रिपोर्ट देनी है। खबरों के मुताबिक उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मुख्य सचिव अटल डुल्लू से रिपोर्ट मांगी है। बताया गया कि रंजन ने वानी के निलंबन की मांग की थी, लेकिन ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ। रंजन ने सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है।

उमर ने बताई अपने दफ्तर की सीमाएं

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने डुल्लू से कहा कि वानी के खिलाफ कोई बदले की कार्रवाई न हो। एक्स पर उन्होंने लिखा कि यह बर्ताव “एक वरिष्ठ आईएएस अफसर से अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं” है, और याद दिलाया कि केंद्र शासित प्रदेश में आईएएस अफसरों पर नियंत्रण उपराज्यपाल के दफ्तर के पास है। उन्होंने कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर राज्य होता तो इस अफसर को जांच पूरी होने तक सामान्य प्रशासन विभाग से अटैच कर दिया जाता।

उनके पिता और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और आगे गए। उन्होंने शुक्रवार को कहा, “उन्हें जम्मू-कश्मीर से बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने जो भाषा इस्तेमाल की, वह पूरी तरह गलत थी; उन्हें फटकार लगनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि वीडियो देखकर उन्हें “गहरा दुख हुआ और शर्म आई”, और “गेट आउट, गेट आउट” चिल्लाना “पूरी तरह गलत” था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के दौर में होते तो वे क्या करते: “मैं उन्हें तुरंत वापस विमान में बिठाकर भेज देता।” उन्होंने इस घटना को 2019 में जम्मू-कश्मीर के दो केंद्र शासित प्रदेशों में बंटवारे से जोड़ा।

विपक्ष भी साथ

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने एक्स पर लिखा कि “ऐसा मनमाना और तिरस्कार भरा बर्ताव बर्दाश्त नहीं किया जा सकता”, और उमर से यह मामला केंद्र के सामने उठाने को कहा। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक कर्रा ने उपराज्यपाल को चिट्ठी लिखकर पूरी रिकॉर्डिंग की जांच वाली निष्पक्ष और समयबद्ध जांच और वानी को उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग की।

जेकेएएस अफसरों के संगठन ने अपनी सहयोगी के सार्वजनिक अपमान की निंदा की और निष्पक्ष जांच की मांग की।