राज्यकर्नाटक
अवैध प्रवासियों पर ज़िला समितियां बनाने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य को तीन महीने दिए
जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने बेंगलुरु के एक डॉक्टर के खिलाफ उन संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के दर्ज कराए दो मामले रद्द कर दिए, जिनकी उसने शिकायत की थी। अदालत ने इन्हें बदले की कार्रवाई बताया।

मुख्य बातें
- अदालत ने गृह मंत्रालय की एसओपी के तहत ज़िला समितियों को तीन महीने में चालू करने का आदेश दिया।
- उसने डॉ. टी नागेंद्रप्पा के खिलाफ दो मामलों को बदले की कार्रवाई मानकर रद्द किया।
- अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के विदेशी नागरिक होने भर से पुलिस शिकायत दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती।
कर्नाटक हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) ने राज्य सरकार को संदिग्ध अवैध प्रवासियों से निपटने के लिए ज़िला स्तर की समितियों को काम में लाने के लिए तीन महीने दिए हैं। अदालत ने चेताया कि “आज की उदासीनता कल की संस्थागत कमज़ोरी बन सकती है।”
जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने यह आदेश 16 अक्टूबर को बेंगलुरु के डॉक्टर टी नागेंद्रप्पा की याचिका पर दिया, जो इस हफ्ते सामने आया। न्यायाधीश ने कहा कि अवैध प्रवास से “दृढ़ता से निपटा जाना चाहिए।”
ये समितियां केंद्रीय गृह मंत्रालय की 2 मई 2025 को जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का हिस्सा हैं। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ज़िला स्तर पर विशेष कार्यबल और निर्वासन का इंतज़ार कर रहे लोगों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाने को कहा गया है। साथ ही, अगर कोई संदिग्ध अवैध प्रवासी खुद को भारतीय या देश में कहीं और का निवासी बताए, तो 30 दिन में उसके दावे की जांच करनी होती है। अदालत ने कहा कि कर्नाटक यह नहीं दिखा पाया कि ऐसी समितियां हैं या काम कर रही हैं, और उनकी बनावट और कामकाज के ब्योरे के साथ ज़िलेवार अनुपालन रिपोर्ट मांगी।
डॉक्टर का मामला
18 जुलाई को नागेंद्रप्पा ने अधिकारियों को सरजापुर मेन रोड के पास कोडथी गांव में एक सरकारी स्कूल के पीछे मज़दूरों के शेड में रह रहे उन लोगों के बारे में बताया, जिन्हें वह बिना दस्तावेज़ वाले बांग्लादेशी नागरिक मानते थे। इनमें से दो, मोहम्मद सैदुल इस्लाम और नसरीना, ने इसके बाद उनके खिलाफ मारपीट, गलत तरीके से रोकने और आपराधिक धमकी की शिकायतें दर्ज कराईं।
अदालत ने गौर किया कि 22 जुलाई को सुबह 11:30 बजे एक जांच अधिकारी ने नसरीना को डिटेंशन सेंटर भेजने की सिफारिश की और उसकी शिकायत सुबह 11:45 बजे दर्ज हुई। न्यायाधीश ने कहा, “इन घटनाओं की निकटता इतनी साफ है कि इसे महज़ संयोग कहकर नहीं टाला जा सकता”, और दोनों मामलों को बदले की कार्रवाई मानकर रद्द कर दिया।
उन्होंने यह भी साफ किया कि पुलिस किसी संज्ञेय अपराध की शिकायत दर्ज करने से सिर्फ इसलिए इनकार नहीं कर सकती कि शिकायतकर्ता विदेशी नागरिक है या उस पर भारत में गैरकानूनी तरीके से रहने का शक है।