राज्यकेरलम
पिनराई विजयन और परिवार पर विजिलेंस एफआईआर के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक से इनकार
सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में पूर्व मुख्यमंत्री, उनकी बेटी वीणा टी और उनके पति पीए मोहम्मद रियास की अपीलों पर खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा।

मुख्य बातें
- कोच्चि में हाईकोर्ट ने पिनराई विजयन पर विजिलेंस एफआईआर के आदेश पर अंतरिम रोक से इनकार किया।
- अपील की सुनवाई से पहले ही विजिलेंस ब्यूरो दो एफआईआर दर्ज कर चुका था।
- जस्टिस के नटराजन और जस्टिस जॉनसन जॉन ने अपीलों पर फैसला सुरक्षित रखा।
कोच्चि स्थित हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) ने मंगलवार को उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) को पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी और उनके पति पीए मोहम्मद रियास के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने को कहा गया था।
जस्टिस के नटराजन और जस्टिस जॉनसन जॉन की खंडपीठ ने सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में शुक्रवार को आए एकल पीठ के आदेश के खिलाफ परिवार की अपीलों पर सुनवाई की। उस आदेश में ब्यूरो को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से मिली जानकारी के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने को कहा गया था। साथ ही प्रारंभिक जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने का राज्य सरकार का फैसला रद्द कर दिया गया था।
अपीलों की सुनवाई तक ब्यूरो दो एफआईआर दर्ज कर चुका था, इसलिए अंतरिम रोक का खास मतलब नहीं रह गया था। खंडपीठ ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया कि अपीलें सुनवाई योग्य हैं या नहीं।
परिवार के वकीलों ने दलील दी कि मूल रिट याचिका असल में छिपी हुई जनहित याचिका थी और उसे स्वीकार ही नहीं किया जाना चाहिए था। उन्होंने याचिकाकर्ता को “दखल देने वाला बाहरी व्यक्ति” बताया, जिसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा, “मुकदमे से पहले या एफआईआर दर्ज होने के चरण में आरोपी को सुने जाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।” उन्होंने कहा कि एकल पीठ के आदेश पर अमल हो चुका है, इसलिए खंडपीठ के दखल की गुंजाइश कम है।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अपीलकर्ताओं का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एसआईटी यह जांचने के लिए बनाई गई थी कि कोई संज्ञेय अपराध हुआ है या नहीं, और ईडी की जानकारी इतनी साफ नहीं थी कि बिना प्रारंभिक जांच के उस पर कार्रवाई की जाए।
करदाता के तौर पर अदालत पहुंचे मूल याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कथित अपराध अपने आप में जनहित का मामला बनते हैं, इसलिए किसी भी नागरिक को मामला उठाने का हक है।