राज्यकेरलम
केरलम में वेतन संशोधन और ₹36,000 करोड़ डीए बकाये पर सतीशन-बालगोपाल आमने-सामने
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि एलडीएफ सरकार कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का भारी बकाया छोड़ गई। पूर्व वित्त मंत्री का कहना है कि पैसे और प्रक्रिया, दोनों का इंतज़ाम पहले ही हो चुका था।

मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने कहा कि पिछली एलडीएफ सरकार करीब ₹36,000 करोड़ का डीए और डीआर बकाया छोड़ गई।
- पूर्व वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने कहा कि एलडीएफ ने 12वां वेतन संशोधन आयोग बनाया था और उसके लिए पैसे भी रखे थे।
- यह विवाद ऐसे समय उठा है जब यूडीएफ सरकार चार महीने पूरे होने पर अपनी 12 विषयों वाली योजना सामने रख रही है।
केरलम के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन और पूर्व वित्त मंत्री के एन बालगोपाल के बीच इस बात पर तीखी बहस छिड़ गई है कि राज्य कर्मचारियों के वेतन संशोधन में देरी और कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के भारी बकाये के लिए ज़िम्मेदार कौन है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा
विधानसभा में सतीशन ने कहा कि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार करीब ₹36,000 करोड़ का डीए और डीआर बकाया छोड़ गई। उनके मुताबिक एलडीएफ ने 2021-2026 के अपने कार्यकाल में वेतन आयोग का गठन नहीं किया, जिससे संशोधन दो साल पिछड़ गया, और 12वें वेतन संशोधन आयोग का आदेश फरवरी में, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जारी किया गया।
उन्होंने पिछली सरकार पर 2021 से बार-बार अवकाश समर्पण (लीव सरेंडर) के भुगतान टालने का आरोप भी लगाया।
“सरकार जिन वित्तीय मुश्किलों से गुज़र रही है, उनके बावजूद हम अब यह बकाया चुका रहे हैं।”
बालगोपाल का जवाब
एलडीएफ सरकार में वित्त मंत्री रहे सीपीआई(एम) नेता बालगोपाल ने फेसबुक पोस्ट में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि एलडीएफ ने अपना कार्यकाल खत्म होने से काफी पहले प्रक्रिया शुरू कर दी थी और बकाया चुकाने का प्रावधान भी किया था।
उन्होंने पूरा क्रम गिनाया: 23 फरवरी 2026 को 12वें वेतन संशोधन आयोग की नियुक्ति का आदेश, 5 मार्च को कार्य-शर्तें जिनमें संशोधन की प्रभावी तारीख 1 जुलाई 2024 तय हुई, 24 मार्च को आयोग के कर्मचारियों की नियुक्ति, और मई की शुरुआत में कर्मचारियों को प्रश्नावली। उनके अनुसार 2026 के बजट में वेतन संशोधन और डीए बकाये की शुरुआती किस्तों के लिए ₹12,000 करोड़ अतिरिक्त रखे गए थे, जिनका भुगतान आठ किस्तों में होना था।
बालगोपाल ने नई सरकार पर आयोग की समय-सीमा न बढ़ाकर प्रक्रिया को खतरे में डालने का आरोप लगाया। उन्होंने लीव सरेंडर पर एलडीएफ के तरीके का बचाव किया, जिसमें कम वेतन वाले कर्मचारियों को नकद भुगतान हुआ और ज़्यादा वेतन वालों का लाभ उनके भविष्य निधि (पीएफ) खाते में जमा किया गया। सरकार के दोष मढ़ने को उन्होंने “राजनीतिक दिवालियापन” बताया।
चार महीने पुरानी सरकार
यह बहस ऐसे समय हो रही है जब 18 मई से सत्ता में आई कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार “जनता के साथ सरकार, बदलता केरलम” नाम से 12 विषयों के इर्द-गिर्द अपना कामकाज पेश कर रही है।
सरकार के मुताबिक उसने कई पुराने बकाये चुकाने शुरू किए हैं: पिछड़े वर्ग के छात्रों की ₹310 करोड़ की लंबित छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य विभाग की पुरानी देनदारियों के लिए ₹200 करोड़, और प्रवासियों की कल्याण पेंशन का बकाया चुकाने के लिए ₹32 करोड़। उसने ₹25 लाख तक के कवर वाली स्वास्थ्य बीमा योजना, महिलाओं के लिए केएसआरटीसी बसों में मुफ्त सफर और धान किसानों के बकाये के भुगतान की भी घोषणा की है।
वेतन और पेंशन राज्य के खज़ाने पर सबसे भारी बोझों में हैं, और वेतन आयोग का काम ही तय करेगा कि सरकार को कितना और जुटाना होगा। किसी भी पक्ष ने आयोग की रिपोर्ट की तारीख नहीं बताई है।