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केरलम विधेयक: बुज़ुर्गों को छोड़ने या सताने पर तीन साल तक की जेल का प्रस्ताव

मुख्यमंत्री वी डी सतीशन के वरिष्ठ नागरिक विधेयक में डॉक्टरों पर दुर्व्यवहार की सूचना देने की ज़िम्मेदारी, लिविंग विल को मान्यता और केयर होम में रहने वालों के दान पर मजिस्ट्रेट की निगरानी का प्रावधान है।

संपादकीय डेस्क से · तिरुवनंतपुरमप्रकाशित
तिरुवनंतपुरम में केरल विधानसभा
तिरुवनंतपुरम में केरल विधानसभाRajithmohan at English Wikipedia / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. केरलम वरिष्ठ नागरिक (देखभाल और अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2026 में दुर्व्यवहार या बेसहारा छोड़ने पर तीन साल तक की जेल और ₹50,000 जुर्माने का प्रस्ताव है।
  2. गंभीर उपेक्षा या बेमेल चोटों की सूचना डॉक्टरों और केयर सेंटरों को 48 घंटे के भीतर देनी होगी।
  3. विधेयक लिविंग विल को कानूनी मान्यता देता है और डिमेंशिया व हॉस्पिस सुविधाओं का वादा करता है।

केरलम में बुज़ुर्गों को बेसहारा छोड़ने या उनसे दुर्व्यवहार करने वालों को तीन साल तक की जेल और ₹50,000 का जुर्माना हो सकता है। मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने इसके लिए एक विधेयक राज्य विधानसभा में पेश किया है।

सतीशन चाहते हैं कि केरलम वरिष्ठ नागरिक (देखभाल और अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2026 जल्द पारित हो। 12 अक्टूबर को सत्र शुरू होने से पहले उन्होंने कहा था, “मुझे उम्मीद है कि हम इसी महीने यह कानून पारित कर लेंगे। हम वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी गारंटी देने के लिए कानून तैयार कर रहे हैं।”

डॉक्टरों को देनी होगी सूचना

विधेयक के मुताबिक डॉक्टरों और पंजीकृत केयर सेंटरों को किसी बुज़ुर्ग के साथ दुर्व्यवहार, उपेक्षा या शोषण के संदेह की सूचना ज़िला स्तर की संरक्षण इकाई को देनी होगी। अगर मेडिकल जांच में पता चले कि खाना, पानी या दवा रोकी गई, या चोटें दी गई सफाई से मेल नहीं खातीं, तो 48 घंटे के भीतर सूचना देनी होगी।

यह बुज़ुर्गों के पैसे की हिफ़ाज़त भी करता है। केयर सेंटर में रहने वाला कोई व्यक्ति अपनी मर्ज़ी से पैसा या संपत्ति दान करना चाहे, तो उसकी औपचारिक जांच होगी और यह ज़िला मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में ही पूरा होगा।

लिविंग विल, यानी जीवन के अंतिम दौर में कैसा इलाज चाहिए इसकी पहले से लिखी इच्छा, को कानूनी मान्यता मिलेगी। विधेयक में हॉस्पिस देखभाल और अल्ज़ाइमर, डिमेंशिया व पार्किंसन के मरीज़ों के लिए विशेष सुविधाओं का वादा है।

देखभालकर्ता, क्लिनिक और साइबर अपराध

राज्य सरकारी और निजी संस्थानों में देखभालकर्ताओं के लिए छह महीने और एक साल के सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने की योजना बना रहा है, जो अगले शैक्षणिक सत्र से शुरू होंगे। क्षेत्रीय जेरियाट्रिक केंद्र, अलग ओपीडी और मोबाइल मेडिकल यूनिट भी प्रस्तावित हैं, जिनमें आदिवासी बस्तियों के लिए यूनिट भी शामिल हैं। नई रिहायशी इमारतों में ऐसी सुविधाएं ज़रूरी होंगी जो बुज़ुर्गों के लिए आसान हों।

विधेयक बुज़ुर्गों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधों से निपटने के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था भी बनाता है और इसमें एआई से होने वाली धोखाधड़ी का खास ज़िक्र है। विधवाओं, हिंसा पीड़ितों और बेसहारा महिलाओं को सरकारी और स्थानीय निकायों के केयर सेंटरों में प्राथमिकता मिलेगी।

केरलम पहल क्यों कर रहा है

सतीशन कह चुके हैं कि केरलम को “बढ़ती उम्र वाली आबादी की चुनौतियों के लिए पहले से तैयारी करनी थी”। इस महीने की शुरुआत में अकेले रह गए बुज़ुर्ग दंपतियों के बारे में उन्होंने कहा, “ब्रेन ड्रेन हो रहा है। हम उनकी रक्षा करना चाहते हैं।”

उनकी सरकार स्थानीय स्वयंसेवकों के ज़रिए रोज़ यह जांचने की बात भी कर चुकी है कि बुज़ुर्गों ने खाना खाया या नहीं और दवा ली या नहीं, और देखभाल से जुड़ी नौकरियों वाली “सिल्वर इकोनॉमी” की भी। कैबिनेट ने सत्र से पहले विधेयक को मंज़ूरी दी थी। अब इसे विधानसभा की मंज़ूरी चाहिए।