राज्यकेरलम
केरलम में एलडीएफ का बनाया वक्फ बोर्ड भंग, आईयूएमएल के मायिन हाजी नए अध्यक्ष
मार्च में बने बोर्ड का चार साल से ज़्यादा कार्यकाल बाकी था। उसके अध्यक्ष की याचिका हाईकोर्ट में अब भी लंबित है, और कांतापुरम सुन्नी गुट को नए बोर्ड में जगह नहीं मिली।

मुख्य बातें
- शुक्रवार के सरकारी आदेश से के एस हम्ज़ा की अध्यक्षता वाला बोर्ड भंग कर नौ सदस्यों की समिति बनाई गई।
- आईयूएमएल के प्रदेश उपाध्यक्ष एम सी मायिन हाजी और छह सदस्यों ने शनिवार को कार्यभार संभाला।
- कांतापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार के नेतृत्व वाले ए पी सुन्नी गुट को नए बोर्ड में कोई सीट नहीं मिली।
केरलम सरकार ने पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार का सिर्फ सात महीने पहले बनाया राज्य वक्फ बोर्ड भंग कर दिया है। नए बोर्ड की कमान इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के प्रदेश उपाध्यक्ष एम सी मायिन हाजी को मिली है, जिन्होंने शनिवार को कार्यभार संभाला।
शुक्रवार को जारी आदेश से के एस हम्ज़ा की अध्यक्षता वाला बोर्ड खत्म कर दिया गया। एलडीएफ ने इसे मार्च में बनाया था और इसका चार साल से ज़्यादा कार्यकाल बाकी था। इसकी जगह नौ सदस्यों की समिति बनाई गई है। शनिवार को हाजी और छह अन्य सदस्यों ने पद संभाला।
यह फैसला ऐसे समय आया जब पुनर्गठन के खिलाफ हम्ज़ा की याचिका केरल हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) में अब भी लंबित है।
नए बोर्ड में कौन
आदेश में हाजी के अलावा आईयूएमएल नेता और विधायक कुरुक्कोली मोइदीन, मुस्तफल फैज़ी, सिरास डी कैप्सी, थोडियूर मुहम्मद कुंजु मौलवी, सजना फिरोज़, जसीम सबाहा, डॉ. अब्दुल मजीद स्वलाही और सी मदीना बेगम के नाम हैं। हाजी पहले भी बोर्ड में रह चुके हैं।
मुजाहिद गुट के प्रतिनिधियों को जगह मिली है, लेकिन कांतापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार के नेतृत्व वाले ए पी सुन्नी गुट का कोई सदस्य बोर्ड में नहीं है। संशोधित वक्फ कानून के तहत ज़रूरी दो गैर-मुस्लिम सदस्य भी नियुक्त नहीं किए गए हैं, क्योंकि कानून को दी गई चुनौती सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
मंत्री ने अदालती मामलों का हवाला दिया
वक्फ मंत्री एन समसुद्दीन ने फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने भी बोर्ड का पुनर्गठन किया था, और बोर्ड के ठीक से काम न करने के आरोप वाले हाईकोर्ट के दो-तीन मामले फिर खुल गए हैं। उनके मुताबिक पुनर्गठन अदालत के कहने पर किया गया और “सरकार के पास मौजूद उसी अधिकार का इस्तेमाल करके वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया गया”।
यह बदलाव ऐसे वक्त हुआ है जब केंद्र के वक्फ कानून संशोधनों के खिलाफ विरोध जारी है और राज्य में वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद चल रहे हैं।
हाजी ने क्या कहा
हाजी ने कहा कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और समुदाय के भीतर के विवादों को आपसी सहमति से सुलझाना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा, “यह सुनिश्चित करने के लिए हर कदम उठाया जाएगा कि एक भी संपत्ति हाथ से न जाए।”
उन्होंने कहा कि मुनंबम ज़मीन विवाद में बोर्ड की भूमिका खत्म हो चुकी है और अब ऐसे मामलों का फैसला ट्रिब्यूनल, हाईकोर्ट और दूसरी न्यायिक संस्थाएं करेंगी। उन्होंने नए बोर्ड को पुराने बोर्डों से अलग भी नहीं बताया। उन्होंने कहा, “पिछले सभी बोर्डों ने जो फैसले लिए हैं, हम उनसे अलग नहीं खड़े हो सकते।”