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राज्यपश्चिम बंगाल

न वीआईपी कतार, न गेट पर खाने के स्टॉल: कोलकाता के बड़े पंडालों में बंगाल की सुरक्षा टीम

चोरबागान भगदड़ में 19 लोगों की मौत के एक दिन बाद रविवार को एक उच्चस्तरीय टीम ने दुर्गा पूजा के बड़े पंडालों की जांच शुरू की। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि जरूरत पड़ी तो भीड़ सीमित की जाएगी।

संपादकीय डेस्क से · कोलकाताप्रकाशित
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और कोलकाता का एक दुर्गा पूजा पंडाल (फ़ाइल फ़ोटो)
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और कोलकाता का एक दुर्गा पूजा पंडाल (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: মঞ্জুর আলম খান / Wikimedia Commons; Subhrajyoti07 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. सुरक्षा समिति ने पूजा पंडालों में अलग वीआईपी प्रवेश द्वार खत्म कर दिए हैं।
  2. रविवार को टीम सबसे पहले संतोष मित्र स्क्वायर पहुंची, फिर ताला प्रत्तोय।
  3. अधिकारी 20 और 21 अक्टूबर को पीड़ित परिवारों से मिलेंगे।

अलग वीआईपी प्रवेश द्वार खत्म, प्रवेश और निकास द्वारों से खाने के स्टॉल दूर, और आयोजकों को निकास चौड़े करने व वहां रोशनी बढ़ाने का निर्देश। रविवार को कोलकाता के सबसे बड़े दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंची उच्चस्तरीय सुरक्षा समिति के ये पहले फैसले थे। एक दिन पहले शहर के उत्तरी हिस्से में चोरबागान में मची भगदड़ में 19 लोगों की जान गई थी, जिनमें एक सात साल का बच्चा भी था।

टीम ने संतोष मित्र स्क्वायर से शुरुआत की और फिर ताला प्रत्तोय समेत दूसरे बड़े पंडालों में गई। उसे मौके पर फैसला लेने का अधिकार दिया गया है। दुर्गा पूजा की भीड़ संभालने का अनुभव रखने वाले नौ आईपीएस अधिकारी मदद के लिए लगाए गए हैं। आयोजकों से अस्थायी घेरों से बनी रुकावटें हटाने को भी कहा गया।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि जरूरत पड़ने पर दर्शकों की संख्या सीमित की जा सकती है और वीआईपी के लिए अलग कतार नहीं होगी। उन्होंने सभी बड़ी पूजाओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा का आदेश दिया।

शोक में डूबा उत्सव

रविवार पूजा का दूसरा दिन था, पर उत्सव पर मातम छाया रहा। न्यू टाउन के रिक्शा चालक विनोद हलदर ने भगदड़ में अपनी 17 साल की बेटी खो दी। उन्होंने कहा, “मेरे पास कुछ नहीं बचा। हमारी जिंदगी में अब कभी दुर्गा पूजा नहीं होगी।”

25 घायलों में से 23 को मामूली चोटें थीं और उन्हें छुट्टी मिलने की उम्मीद थी, जबकि दो गहन चिकित्सा कक्ष में थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने पूजा कार्यक्रम रद्द कर एक निजी अस्पताल में 14 घायलों से मुलाकात की।

भगदड़ पंडाल के अंदर नहीं, बल्कि एक साझा प्रवेश और निकास द्वार पर हुई। बताया गया कि अधिकारियों के मुताबिक गार्डों ने रस्सी से रास्ते को बांट रखा था और बारिश शुरू होते ही वे बचने के लिए भाग गए।

जांच

पुलिस ने चोरबागान पूजा समिति के महासचिव और उपाध्यक्ष समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है और गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। पंडाल पर तैनात अस्थायी होम गार्डों, आयोजकों और अनुमति देने वाले अधिकारियों, सभी की जांच होगी। अधिकारी ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से किसी मौजूदा जज को जांच का नेतृत्व सौंपने की अनुमति मांगी जाएगी। कोलकाता पुलिस, नगर निगम और अग्निशमन सेवा को विशेष जांच से बाहर रखा गया है।

पंडाल पर सियासत

विपक्ष ने देबदीप अधिकारी के नाम पर सवाल उठाए, जिन्हें प्रचार सामग्री में चोरबागान पूजा का मुख्य संरक्षक बताया गया है। विपक्ष ने उन्हें मुख्यमंत्री का भतीजा बताया। तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने पूछा, “सुवेंदु बाबू, दोषी भतीजे को जेल में कब डालेंगे?” भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें देबदीप अधिकारी की भूमिका की कोई जानकारी नहीं है। मुख्यमंत्री ने हादसे को राजनीतिक विवाद बनाने की कोशिशों की निंदा की और कहा कि प्रशासन का ध्यान राहत पर है।

आगे क्या

अधिकारी 20 और 21 अक्टूबर को मृतकों के परिवारों से मिलकर मुआवजे के चेक देंगे। मजिस्ट्रेटों और डीएसपी रैंक के अधिकारियों से कहा गया है कि अंतिम संस्कार पूरा होने तक वे परिवारों के साथ रहें। पूजा समितियों के लिए 26 अक्टूबर को एक सादा बिजया सम्मिलनी होगी, जिसमें इस हादसे से सबक पर चर्चा होगी।