राज्यहिमाचल प्रदेश
कुल्लू दशहरे के तीसरे दिन भगवान नृसिंह की जलेब में घाटी के सैकड़ों देवी-देवता शामिल
शुक्रवार दोपहर ढोल-नगाड़ों और शहनाई के साथ ढालपुर से नृसिंह जलेब निकली, वहीं कलाकेंद्र में लोकनृत्य प्रतियोगिता शुरू हुई।

मुख्य बातें
- शुक्रवार दोपहर बाद ढालपुर में राजा की चननी से भगवान नृसिंह की जलेब निकली।
- घाटी के सैकड़ों देवी-देवता अपने देवलुओं के साथ इसमें शामिल हुए।
- सात दिन का उत्सव 27 अक्टूबर को लंका दहन के साथ खत्म होगा।
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरे का तीसरा दिन भगवान नृसिंह के नाम रहा। शुक्रवार दोपहर बाद ढालपुर में राजा की चननी से भगवान नृसिंह की जलेब शुरू हुई, जिसमें कुल्लू घाटी के सैकड़ों देवी-देवता अपने देवलुओं के साथ शामिल हुए।
ढोल-नगाड़ों, करनाल और शहनाई की धुनों के बीच जलेब अस्पताल और कॉलेज परिसर समेत शहर के कई हिस्सों से गुज़री। ढालपुर मैदान से राजा की चननी तक सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही, जो “जय श्रीराम” और “जय देव नृसिंह” के जयकारे लगा रही थी। जलेब से पहले ढालपुर में देवताओं का मिलन हुआ।
भगवान नृसिंह को कुल्लू घाटी का रक्षक देवता माना जाता है। सात दिन का यह उत्सव बुधवार, 21 अक्टूबर को कुल्लू के अधिष्ठाता देवता भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ शुरू हुआ था। इस बार ढालपुर में 300 से ज्यादा ग्राम देवताओं के पहुंचने की उम्मीद थी।
उधर लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र में शुक्रवार को उत्सव की लोकनृत्य प्रतियोगिता शुरू हुई। महिला और युवक मंडलों के 10 से ज्यादा सांस्कृतिक दलों ने पारंपरिक कुल्लवी वेशभूषा में नाटी पेश की। डॉ. सूरत ठाकुर समेत चार निर्णायक प्रस्तुतियों का आकलन कर रहे हैं। जिला भाषा अधिकारी की देखरेख में हो रही यह प्रतियोगिता शनिवार को भी जारी रहेगी और विजेताओं को उत्सव के समापन पर सम्मानित किया जाएगा।
कुल्लू दशहरा सातवें दिन, 27 अक्टूबर को लंका दहन के साथ संपन्न होगा।