राज्यमणिपुर
शांति ही मणिपुर के विकास में भागीदारी का एकमात्र रास्ता: मुख्यमंत्री खेमचंद
शनिवार को इंफाल में मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले एनआरसी अपडेट करने को लेकर लोगों की चिंताओं से केंद्र को अवगत कराए जाने के बाद राज्य में जनगणना टाल दी गई है।

मुख्य बातें
- वाई खेमचंद सिंह ने कहा कि मणिपुर के विकास के लिए शांति ही एकमात्र रास्ता है।
- उन्होंने कहा कि मणिपुर में जनगणना टाल दी गई है।
- राज्य के महीने भर चले सेवा संकल्प अभियान में 4 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए।
मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने शनिवार को कहा कि शांति ही राज्य के लिए भारत की विकास यात्रा में हिस्सा लेने का एकमात्र रास्ता है। इंफाल में एक सभा में उन्होंने बताया कि मणिपुर में जनगणना टाल दी गई है।
जन सेवक महाकुंभ में उन्होंने कहा, “शांति ही राज्य के लिए विकास की यात्रा में भाग लेने का एकमात्र रास्ता है।” उन्होंने कहा कि मणिपुर के विकास के बिना भारत को विकसित नहीं माना जा सकता, और राज्य के भविष्य को आजादी के 100वें वर्ष तक मजबूत भारत बनाने के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ा।
जनगणना और एनआरसी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अपडेट करने को लेकर लोगों की चिंता से केंद्र को अवगत कराया गया था, और राज्य में जनगणना टाल दी गई है। उन्होंने कोई नई समय-सीमा नहीं बताई।
उन्होंने मणिपुरी भाषा को सभी समुदायों के बीच संवाद का जरिया बताया और कहा कि इसे सहेजना और ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए। राज्य के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने कहा कि शांति बहाल करने के लिए सभी समुदायों के बीच आपसी भरोसा और समझ जरूरी है।
यह कार्यक्रम सेवा संकल्प अभियान का समापन था, जो नरेंद्र मोदी के पहले गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक सेवा के 25 साल पूरे होने पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सभी जिलों में चला। सिंह ने कहा, “महीने भर चले इस सफल अभियान में राज्य भर के 6,122 स्थानों पर 4 लाख से ज्यादा लोगों ने भाग लिया।”
हिंसा जारी
शांति की यह अपील ताजा हिंसा वाले दिन आई। कामजोंग जिले में संदिग्ध उग्रवादियों के हमले में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई और चार अन्य घायल हो गए।
मई 2023 में इंफाल घाटी के मैतेई और पहाड़ी इलाकों के कुकी समुदाय के बीच शुरू हुए जातीय संघर्ष में अब तक कम से कम 306 लोगों की जान जा चुकी है। 49 लोग अब भी लापता हैं और हजारों लोग बेघर हैं। हाल के महीनों में कुकी और नगा समुदायों के बीच भी झड़पों की खबरें आई हैं।