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यूरोपीय संसद ने ईयू से यमन के हूती विद्रोहियों को आतंकी सूची में डालने की मांग की

सांसदों ने भारी बहुमत से एक गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित कर सऊदी अरब की हूती नाकेबंदी और लाल सागर में जहाजों पर हमलों की निंदा की। अंतिम फैसला सदस्य देशों की सरकारों का है, जिनकी सर्वसम्मति जरूरी है।

संपादकीय डेस्क से · स्ट्रासबर्गप्रकाशित
यमन में एक रैली में हूती समर्थक (फ़ाइल फ़ोटो)
यमन में एक रैली में हूती समर्थक (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Henry Ridgwell (VOA) / Wikimedia Commons, Public domain

मुख्य बातें

  1. सांसदों ने गुरुवार को हाथ उठाकर भारी बहुमत से प्रस्ताव पारित किया।
  2. प्रस्ताव में हूतियों और उनके मददगारों की सारी संपत्ति फ्रीज करने की मांग है।
  3. ईयू के एस्पिडेस नौसैनिक मिशन में तीन जहाज हैं, जबकि काया कलास के मुताबिक कम से कम 10 चाहिए।

यूरोपीय संसद ने गुरुवार को यूरोपीय संघ से कहा कि यमन के हूती आंदोलन को आतंकी संगठनों की सूची में डाला जाए। यह मांग सऊदी अरब पर हफ्तों से बढ़ते हूती हमलों के बाद आई है।

स्ट्रासबर्ग में संसद के सत्र में यह गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव सांसदों ने हाथ उठाकर भारी बहुमत से पारित किया। इसमें हूतियों और उनके मददगारों के सभी फंड और आर्थिक संसाधन फ्रीज करने की मांग की गई है।

सूची में नाम आने का मुख्य असर वित्तीय पाबंदियों के रूप में होगा: ईयू देशों में बैंक खाते और संपत्ति फ्रीज की जा सकेगी और ईयू के लोगों व कंपनियों पर इस गुट को पैसा देने की रोक होगी। लेकिन फैसला सदस्य देशों के हाथ में है, और किसी भी नए नाम के लिए सभी 27 सरकारों की सर्वसम्मति जरूरी है।

प्रस्ताव में सऊदी अरब की हूती नौसैनिक नाकेबंदी और ऊर्जा ढांचे तथा लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमलों की निंदा की गई है। सांसदों ने इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, जिससे यमन का मानवीय संकट और गहरा हुआ है।

हूतियों ने जुलाई में यमन के लाल सागर तट पर हमला शुरू किया था। सऊदी नेतृत्व वाले जवाबी हमले ने उनकी ज्यादातर बढ़त पलट दी, लेकिन यह गुट अब भी जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा बना हुआ है। ब्रिटेन ने रियाद की रक्षा के लिए रक्षात्मक मिशनों का वादा किया है।

सांसदों ने लाल सागर में ईयू के नौसैनिक मिशन एस्पिडेस की भूमिका पर भी जोर दिया और सदस्य देशों से और जहाज व विमान भेजने को कहा। मिशन में अभी इटली और ग्रीस के तीन जहाज हैं, और बेल्जियम व नीदरलैंड्स ने दो और देने का वादा किया है। ईयू की विदेश नीति प्रमुख काया कलास कह चुकी हैं कि कम से कम 10 जहाज चाहिए।