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आईएमएफ बोला, खाड़ी की अर्थव्यवस्थाएं जल्द युद्ध से पहले जैसी रफ्तार नहीं पकड़ेंगी

मुद्रा कोष के पश्चिम एशिया निदेशक जिहाद अज़ूर ने कहा कि ईरान युद्ध लंबे समय तक नुकसान छोड़ जाएगा। आईएमएफ का अनुमान है कि इस साल सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था 3.3% सिकुड़ेगी।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित
आईएमएफ़ के मध्य पूर्व निदेशक जिहाद अज़ूर (फ़ाइल फ़ोटो)
आईएमएफ़ के मध्य पूर्व निदेशक जिहाद अज़ूर (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: World Policy Conference TV / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. जिहाद अज़ूर ने कहा कि मध्यम अवधि में क्षेत्र युद्ध से पहले की राह पर नहीं लौटेगा।
  2. आईएमएफ को 2026 में सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में 3.3% गिरावट की आशंका है।
  3. पश्चिम एशिया और मध्य एशिया क्षेत्र के इस साल 0.3% सिकुड़ने का अनुमान है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने गुरुवार को चेताया कि खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाएं मध्यम अवधि में उस रफ्तार पर नहीं लौटेंगी जिस पर वे ईरान युद्ध से पहले थीं। इस बीच सऊदी अरब के हवाई अड्डों और तेल ठिकानों पर मिसाइल हमले जारी हैं।

आईएमएफ के पश्चिम एशिया और मध्य एशिया विभाग के निदेशक जिहाद अज़ूर ने पत्रकारों से कहा, “मध्यम अवधि में हम युद्ध से पहले वाली राह पर वापस नहीं जाएंगे।” उन्होंने कहा कि इस झटके से कई क्षेत्रों को लंबे समय तक नुकसान होगा, बुनियादी ढांचा प्रभावित होगा और सरकारों को अपनी अर्थव्यवस्थाओं को मज़बूत बनाने पर ज़्यादा खर्च करना पड़ेगा।

मंगलवार को जारी आईएमएफ के ताज़ा अनुमानों के मुताबिक युद्ध की सीधी चपेट में आया पश्चिम एशिया और मध्य एशिया क्षेत्र 2026 में 0.3% सिकुड़ेगा। सऊदी अरब सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों में है, जहां अर्थव्यवस्था में 3.3% गिरावट का अनुमान है। यह इस देश के लिए दुर्लभ मंदी होगी।

आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने बुधवार को चेताया था कि सऊदी अरब पर जारी हमलों का असर “हर जगह” लोगों पर पड़ सकता है।

हाल के दिनों में सऊदी अरब पर हूतियों के बार-बार मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं, जिनमें हवाई अड्डे, ऊर्जा ठिकाने और सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको का मुख्यालय निशाना बने। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने उत्तरी यमन में हूतियों के ईंधन और ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से जवाब दिया है।

लड़ाई के दौरान तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। गुरुवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 104 डॉलर प्रति बैरल पर था।

अज़ूर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब इस हफ्ते बैंकॉक में वित्त अधिकारी और अर्थशास्त्री विश्व अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों पर चर्चा के लिए जुटे हैं।