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ईरान का दावा, होर्मुज़ के पास एक रात में सात टैंकर निशाने पर; अमेरिकी ठिकानों को भी चेतावनी

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि चार तेल जहाज़ों में आग लगा दी गई और तीन बारूदी सुरंगों से टकराए। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेज़ाई बोले, ईरान ने अपनी पूरी ताकत अभी इस्तेमाल नहीं की और वह "अगले चरण के लिए तैयार" है।

संपादकीय डेस्क से · तेहरानप्रकाशित
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेज़ाई (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेज़ाई (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Khamenei.ir / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नौसेना के मुताबिक रात भर में सात टैंकर हमले या बारूदी सुरंगों की चपेट में आए।
  2. सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेज़ाई ने चेताया कि जंग जारी रही तो तीन साल तक ऊर्जा बाज़ार शांत नहीं होंगे।
  3. अमेरिका इलाके में दशकों की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती कर रहा है, जिसमें तीसरा विमानवाहक पोत भी है।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने गुरुवार को कहा कि रात भर में खाड़ी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सात तेल टैंकरों में आग लगी या वे क्षतिग्रस्त हुए। एक ही रात में तेहरान की ओर से जहाज़ों पर हमलों का यह अब तक का सबसे बड़ा दावा है, और यह उस समुद्री रास्ते पर तनाव को और बढ़ाता है जिस पर भारत का बड़ा कच्चा तेल आयात टिका है।

सरकारी प्रसारक आईआरआईबी पर जारी बयान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की नौसेना ने कहा कि उसने उन चार जहाज़ों का पीछा किया जो पहले उसके शब्दों में “अवैध रास्ते” से गुज़रे थे, और उन्हें उत्तरी खाड़ी में तेल का माल एक-दूसरे में चढ़ाते पाया। बयान के अनुसार, “चारों जहाज़ों पर एक साथ हमला हुआ और उनमें आग लग गई।” उसने यह भी कहा कि तीन और जहाज़ बुधवार रात जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में बारूदी सुरंगों से टकराकर रुक गए।

गार्ड्स ने न जहाज़ों के नाम बताए, न उनके मालिकों के और न ही नुकसान का ब्योरा दिया। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। व्यापारिक जहाज़ों पर हमलों पर नज़र रखने वाले यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने इन घटनाओं की पुष्टि नहीं की थी, हालांकि निगरानी करने वालों का कहना है कि कुछ शिपिंग कंपनियां अब हमलों की जानकारी देने से कतराने लगी हैं।

वॉशिंगटन को चेतावनी

आईआरजीसी ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह व्यापारिक जहाज़ों को ऐसे पानी से ले जा रहा है जहां, ईरान के मुताबिक, बारूदी सुरंगें बिछी हैं। नौसेना ने कहा, “आक्रामक अमेरिकी सेना को जान लेना चाहिए कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो टकराव का दायरा इलाके के आक्रामक ठिकानों तक फैल जाएगा। यह गंभीर चेतावनी है।”

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेज़ाई ने भी यही सुर अपनाया। गुरुवार को उन्होंने कहा, “सबको जान लेना चाहिए कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई की कीमत चुकानी पड़ती है। अगर कूटनीति यह समझ बना सके तो हम कूटनीति को तरजीह देंगे; लेकिन अगर जंग जारी रही तो ईरान के पास जवाब देते रहने के ज़रूरी साधन हैं।”

रेज़ाई ने कहा कि 28 फरवरी को अमेरिकी और इज़राइली हमलों से शुरू हुई जंग के पिछले दौर में ईरान ने अपनी पूरी क्षमता इस्तेमाल नहीं की। उन्होंने कहा, “हम अगले चरण के लिए तैयार हैं।” उनके मुताबिक मौजूदा हालात जारी रहे तो “अगले 3 साल तक ऊर्जा बाज़ार शांत नहीं होंगे।”

फिर से जंग की आशंका

ये दावे ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका इलाके में तीसरा विमानवाहक पोत और हज़ारों और सैनिक भेज रहा है, जो पश्चिम एशिया में दशकों की सबसे बड़ी अमेरिकी नौसैनिक और हवाई तैनाती से जुड़ेंगे। इस हफ्ते ऐसी योजनाओं की खबरें आईं कि अगले महीने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिका और इज़राइल ईरान के ऊर्जा, परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर छोटा लेकिन तीखा हमला कर सकते हैं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि प्रशासन उन सैन्य योजनाओं पर टिप्पणी नहीं करता “जो हो भी सकती हैं और नहीं भी।”

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अमेरिका ईरान से “बातचीत नहीं कर रहा” और “जल्द ही” “कुछ” होगा, पर उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या। ईरान अब भी अपना वह प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है जिसमें अमेरिका अगर ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाए और कुछ और शर्तें माने तो एक हफ्ते में जंग खत्म कर जलडमरूमध्य पूरी तरह खोल दिया जाएगा। ट्रंप इसे ठुकरा चुके हैं, हालांकि दोनों पक्ष मानते हैं कि परोक्ष संपर्क जारी हैं। उस इनकार के बाद से जहाज़ों पर हमले बढ़े हैं।

राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने ईरानी संसद में कहा कि देश “चुनौती नहीं, महाचुनौती” का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा, “मौजूदा हालात न हमारे लिए अच्छे हैं, न इलाके के लिए, न दुनिया के लिए।”

भारत के लिए मायने

हिंसा पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल रही है, जहां लाखों भारतीय रहते और काम करते हैं। रियाद में भारतीय दूतावास ने बताया कि बुधवार को सऊदी अरामको के शायबा तेल क्षेत्र में मार गिराए गए ड्रोन का मलबा गिरने से एक भारतीय नागरिक घायल हुआ। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में दो लोगों की मौत हुई। दूतावास ने कहा, “दूतावास को जानकारी मिली है कि आज शायबा तेल क्षेत्र पर हमले में एक भारतीय नागरिक घायल हुआ है,” और हर ज़रूरी मदद का भरोसा दिया।

भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर तेल आयात करता है। होर्मुज़ के आसपास जंग फैलने का मतलब है ईंधन और माल ढुलाई की बढ़ती लागत और खाड़ी के रास्तों पर काम करने वाले भारतीय नाविकों के लिए ज़्यादा खतरा। गुरुवार को हमलों के बीच ब्रेंट कच्चा तेल 112 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया।