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मैक्रों ने रक्षा परिषद बुलाई, शनिवार के प्रदर्शनों में सिर्फ यूनियन मार्च को इजाजत

बरसों की सबसे भीषण सड़क हिंसा के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने धुर-वामपंथी 'राजद्रोह' की निंदा की। मेलांशों ने प्रधानमंत्री की बैठक बिगाड़ने की चेतावनी दी और बड़े शहरों के मेयरों ने स्वतंत्र जांच मांगी।

संपादकीय डेस्क से · पेरिसप्रकाशित
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ला फ्रांस इंसूमीज के संस्थापक जां-लुक मेलांशों (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ला फ्रांस इंसूमीज के संस्थापक जां-लुक मेलांशों (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: PRESIDENT OF UKRAINE VOLODYMYR ZELENSKYY Official website / Wikimedia Commons; AntoineIDE / Wikimedia Commons, CC BY 4.0, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. 24 अक्टूबर के बड़े प्रदर्शनों से पहले मैक्रों शुक्रवार को रक्षा परिषद की अध्यक्षता करेंगे।
  2. शनिवार को देश भर में सिर्फ ट्रेड यूनियनों के मार्च को इजाजत होगी।
  3. 17 अक्टूबर को तैनात करीब 60,000 सुरक्षाकर्मियों की संख्या लगभग 20% बढ़ाई जाएगी।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों शुक्रवार को एक आपात रक्षा परिषद की अध्यक्षता करेंगे। उन्होंने आदेश दिया है कि शनिवार को पूरे फ्रांस में सिर्फ ट्रेड यूनियनों के प्रदर्शनों को इजाजत दी जाए। देश में बरसों की सबसे भीषण सड़क हिंसा के बाद सरकार बड़े प्रदर्शनों की नई लहर के लिए तैयार हो रही है।

गुरुवार को खुफिया प्रमुखों से मुलाकात के बाद मैक्रों ने कहा, “कल मेरी अध्यक्षता में रक्षा परिषद की बैठक बुलाई जाएगी, और हम आगे के फैसले लेंगे।” उन्होंने धुर-वामपंथी गुटों के “राजद्रोह” की निंदा की और कहा कि वे गणतंत्र के लिए “गंभीर खतरा” हैं।

17 अक्टूबर के प्रदर्शनों में यूनियनें, ‘येलो वेस्ट’ कार्यकर्ता और छात्र शामिल थे, जो महंगाई, स्कूलों की हालत और ईंधन की कीमतों से नाराज थे। ये प्रदर्शन लूटपाट और पुलिस से झड़पों में बदल गए। गृह मंत्री लॉरों नुनेज ने करीब 2 लाख लोगों के आने का अनुमान लगाया था, जबकि 5.5 लाख से 8 लाख लोग सड़कों पर उतरे। अधिकारियों ने माना है कि खुफिया सेवाएं इसका पैमाना नहीं भांप पाईं।

शनिवार के लिए प्रीफेक्ट बिना इजाजत वाले जमावड़ों पर रोक लगा सकते हैं, खासकर उन गुटों के, जिनमें सरकार के शब्दों में “वैधता” नहीं है। 17 अक्टूबर को करीब 60,000 पुलिस और जेंडरमे तैनात थे। इस बार यह संख्या करीब पांचवां हिस्सा बढ़ने की उम्मीद है, और साथ में ‘सेंटिनेल’ सैनिक व विशेष दस्ते होंगे। कई शहरों के केंद्रों में सोमवार से कर्फ्यू है।

हंगामेदार बैठक के आसार

प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने पुलिसिंग पर चर्चा के लिए दलों के नेताओं को मातिन्यों बुलाया है। उन्होंने लिखा कि वे उनसे “पुलिस के बारे में” बात करना चाहते हैं और “एक खास फ्रांसीसी किस्म की राजनीतिक-मीडिया सिज़ोफ्रेनिया” की शिकायत की।

ला फ्रांस इंसूमीज के संस्थापक जां-लुक मेलांशों ने तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कहा, “हम जाएंगे, और तुम्हारी बैठक बिगाड़ देंगे!” बैठक में जाने वाले उनके समन्वयक मानुएल बोम्पार ने कहा कि वे “माफी”, “सफाई” और “राजनीतिक जवाब” मांगेंगे। नेशनल रैली की मरीन ले पेन और जॉर्डन बार्देला, और मध्य-दक्षिणपंथी एदुआर्द फिलिप बैठक में नहीं जाएंगे।

पेरिस, ल्यों और मार्सेई के मेयर, एमानुएल ग्रेगोआर, ग्रेगोरी डूसे और बेनोआ पायां, ने एक अखबार में साझा लेख लिखकर सरकार की कानून-व्यवस्था रणनीति पर “स्वतंत्र आयोग” और “असाधारण राष्ट्रीय एकजुटता कोष” की मांग की।