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मैक्रों अचानक रियाद पहुंचे, लेबनानी सेना पर सम्मेलन इस्राइली चुनाव के बाद तक टाला

फ्रांस के राष्ट्रपति ने हूती हमलों के बाद एकजुटता दिखाने के लिए अपने खाड़ी दौरे में सऊदी अरब को जोड़ा। उन्होंने कहा कि फ्रांस ने सर्दियों के लिए क़तर से गैस का इंतज़ाम कर लिया है।

संपादकीय डेस्क से · रियादप्रकाशित

मुख्य बातें

  1. इमैनुएल मैक्रों क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिलने बिना पूर्व घोषणा के रियाद पहुंचे।
  2. उन्होंने कहा कि लेबनानी सेना के समर्थन में सम्मेलन इस्राइल के चुनाव के बाद होगा।
  3. उनके मुताबिक फ्रांस ने सर्दियों के लिए हर महीने दो टेरावाट-घंटे क़तरी एलएनजी पक्की कर ली है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों बुधवार को बिना पूर्व घोषणा के रियाद पहुंचे। इसके साथ उनके खाड़ी दौरे में सऊदी अरब भी जुड़ गया, जो अब तक मुख्य रूप से फ्रांस के लिए ईंधन जुटाने पर केंद्रित रहा है।

मैक्रों को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिलना था। इस पड़ाव का मकसद हफ्तों से सऊदी हवाई अड्डों, तेल ठिकानों और शहरों पर हो रहे हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब के साथ फ्रांस की “एकजुटता” दिखाना था। ब्रिटेन सऊदी आसमान की रक्षा के लिए पहले ही टाइफून लड़ाकू विमान भेज चुका है।

दौरे का दूसरा मकसद घरेलू है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से फ्रांस भर में सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं, और मैक्रों डीज़ल, पेट्रोल और गैस की आपूर्ति पक्की करने में लगे हैं। दिन में पहले उन्होंने कहा कि फ्रांस ने सर्दियों के लिए क़तर से गैस का इंतज़ाम कर लिया है। उन्होंने कहा, “हमने सर्दियों के दौरान हर महीने दो टेरावाट-घंटे के बराबर एलएनजी पक्की कर ली है।”

लेबनान सम्मेलन पर रोक

मैक्रों ने यह भी कहा कि फ्रांस लेबनानी सेना के समर्थन में “आने वाले हफ्तों में” एक सम्मेलन आयोजित करेगा, लेकिन 27 अक्टूबर को इस्राइल के आम चुनाव के बाद ही। उन्होंने कहा कि मतदान से पहले इसे करना “बेकार” होगा।

दक्षिणी लेबनान को स्थिर करने की पश्चिमी योजनाओं में लेबनानी सेना की केंद्रीय भूमिका है। वहां इस्राइली सैनिक अब भी कई ठिकानों पर मौजूद हैं और हिज़्बुल्लाह ने हथियार नहीं छोड़े हैं।

इस दौरे में पहले मैक्रों कुवैत गए, जहां दोनों देशों ने रक्षा और निवेश समझौते किए। इसके बाद वह संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन गए, जिन्होंने फ्रांस को डीज़ल देने पर सहमति जताई।