दुनियादक्षिण एशिया
पाकिस्तान की संसद ने ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में आपातकाल पर मुहर लगाई, पीटीआई अदालत पहुंची
बुधवार को दोनों सदनों ने आपातकाल का समर्थन किया। उधर पीटीआई अध्यक्ष गौहर अली ख़ान ने पेशावर हाईकोर्ट से सोहेल अफ़रीदी की सरकार बहाल करने और उनकी रिहाई की मांग की।

मुख्य बातें
- नेशनल असेंबली और सीनेट ने बुधवार को ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में आपातकाल के समर्थन में प्रस्ताव पारित किए।
- पीटीआई अध्यक्ष गौहर अली ख़ान ने उद्घोषणा रद्द करने के लिए पेशावर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
- गवर्नर शासन को अब भी संसद की संयुक्त बैठक की मंज़ूरी चाहिए, वरना दो महीने में यह ख़त्म हो जाएगा।
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और सीनेट ने बुधवार को उस आपातकाल का समर्थन कर दिया जो प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की सरकार ने तीन दिन पहले ख़ैबर पख़्तूनख़्वा पर लगाया था। कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) यह लड़ाई पेशावर हाईकोर्ट ले गई और जजों से उद्घोषणा रद्द कर अपने हटाए गए मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी को फिर से पद पर बिठाने की मांग की।
प्रस्तावों में राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी की ओर से 11 अक्टूबर को संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत जारी उद्घोषणा को मंज़ूरी दी गई है। बहस के लिए प्रश्नकाल स्थगित किया गया और नेशनल असेंबली में प्रस्ताव बहुमत से पारित हुआ। इसके कुछ देर बाद सीनेट ने भी इसे मंज़ूरी दे दी।
शांत रहा सदन
सत्र में आम तौर पर होने वाला हंगामा नहीं दिखा। शहबाज़ कुछ देर सदन में मौजूद रहे और विपक्ष के नेता महमूद ख़ान अचकज़ई से हाथ मिलाया। स्पीकर अयाज़ सादिक़ ने दोनों पक्षों की सराहना करते हुए कहा कि वे “मामला सुलझाने के लिए अपनी क्षमता से ज़्यादा कोशिश कर रहे हैं”।
क़ानून मंत्री आज़म नज़ीर तरार ने कहा कि प्रांत की स्थिति “चिंताजनक हद तक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बनती जा रही थी”। इससे पहले दिन में उन्होंने कहा था कि आपातकाल पूरे प्रांत पर लागू है, सिर्फ़ उग्रवाद से सबसे ज़्यादा प्रभावित 12 ज़िलों पर नहीं। इन ज़िलों के लिए अलग एरिया डेवलपमेंट सचिवालय बनेगा।
रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने पीटीआई से कहा कि उसके हाथ साफ़ नहीं हैं और अफ़रीदी पर अफ़ग़ानिस्तान से निर्देश लेने का आरोप लगाया। एमक्यूएम-पी के फ़ारूक़ सत्तार ने फ़ैसले को बेहद मुश्किल पर ज़रूरी बताया और पीटीआई से कहा: “खुलकर आतंकवाद की निंदा कीजिए।”
सरकार का समर्थन कर रही पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-ज़रदारी ने पीटीआई के रवैये को अपनी ही प्रांतीय सरकार पर “राजनीतिक आत्मघाती हमला” कहा। साथ ही उन्होंने चेताया कि आपातकाल “हमेशा एक अस्थायी उपाय” होता है। उन्होंने कहा, “हम आपातकाल को हमेशा के लिए नहीं चला सकते,” और दोनों पक्षों से बातचीत की अपील की। पीटीआई अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली ख़ान ने कहा कि उनकी पार्टी इस कदम को ख़ारिज करती है, पर बातचीत की अपील का स्वागत किया।
अचकज़ई इससे भी आगे गए और कहा कि अगला गवर्नर शासन सिंध में लग सकता है। उन्होंने सरकार से कहा, “कुछ अक़्ल से काम लीजिए। बातचीत कीजिए,” और जेल में बंद पीटीआई संस्थापक इमरान ख़ान से मुलाक़ात के विवाद को सुलझाने में मदद की पेशकश की।
पेशावर में मुक़दमा
गौहर की याचिका सलमान अकरम राजा और समीर खोसा समेत वकीलों के एक पैनल ने तैयार की है। इसमें दलील दी गई है कि उद्घोषणा “क़ानून और तथ्य, दोनों में दुर्भावना से ग्रस्त” है और इसके पीछे कोई ठोस आधार नहीं है। याचिका के मुताबिक़ मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाना संविधान के कई अनुच्छेदों का उल्लंघन है, और प्रांतीय सरकार के अनुरोध के बिना सेना तैनात नहीं की जा सकती थी।
पीटीआई चाहती है कि अफ़रीदी और उनका मंत्रिमंडल बहाल हो, हिरासत में लिए गए विधायक रिहा हों, अफ़रीदी को अदालत में पेश किया जाए और इस्लामाबाद भेजी गई गवर्नर की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। बुधवार रात तक सुनवाई की कोई तारीख़ तय नहीं हुई थी।
अफ़रीदी की क़ानूनी मुश्किलें भी बढ़ रही हैं। अभियोजन पक्ष ने मंगलवार को उन्हें और पीटीआई के चार अन्य नेताओं को मई 2023 में पेशावर में रेडियो पाकिस्तान की इमारत पर हुए हमले के मामले में आरोपी बनाया। इसके लिए वीडियो क्लिप से चेहरों के फ़ॉरेंसिक मिलान का हवाला दिया गया है। पीटीआई नेता इन वीडियो पर सवाल उठाते हैं। आतंकवाद-रोधी अदालत में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
बुधवार रात सादिक़ ने पंजाब पुलिस की हिरासत में मौजूद पीटीआई के दो सदस्यों, सनाउल्लाह ख़ान मस्तीख़ेल और दावर ख़ान कुंडी, के लिए प्रोडक्शन ऑर्डर जारी किए ताकि वे बैठकों में शामिल हो सकें। पार्टी ने नौ सदस्यों के लिए ऐसे आदेश मांगे थे।
आगे क्या
नेशनल असेंबली की अगली बैठक शुक्रवार सुबह 11 बजे होगी। अनुच्छेद 234 के तहत लगे गवर्नर शासन को अभी संसद की संयुक्त बैठक में पेश किया जाना है। वहां मंज़ूरी न मिलने पर यह दो महीने में ख़त्म हो जाएगा, और कुल मिलाकर छह महीने से ज़्यादा नहीं चल सकता।