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पन्नू का दावा, एडमंटन में खालिस्तान वोट से पहले एफबीआई ने जान के खतरे की चेतावनी दी
सिख्स फॉर जस्टिस के नेता का कहना है कि रविवार के गैर-बाध्यकारी जनमत संग्रह के लिए कनाडा जाने से पहले एजेंटों ने 15 अक्टूबर को उन्हें 'ड्यूटी टू वॉर्न' नोटिस दिया।
मुख्य बातें
- गुरपतवंत सिंह पन्नू का कहना है कि एफबीआई एजेंटों ने 15 अक्टूबर को उन्हें 'ड्यूटी टू वॉर्न' नोटिस दिया।
- वह रविवार, 18 अक्टूबर को एडमंटन में गैर-बाध्यकारी जनमत संग्रह में शामिल होने वाले हैं।
- भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने फरवरी में उनकी हत्या की साज़िश का गुनाह कबूल किया था।
न्यूयॉर्क में रहने वाले वकील और सिख्स फॉर जस्टिस समूह के नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू का कहना है कि खालिस्तान जनमत संग्रह के लिए कनाडा जाने से कुछ दिन पहले एफबीआई ने उन्हें उनकी जान को “तत्काल खतरे” की चेतावनी दी है।
अमेरिका और कनाडा दोनों की नागरिकता रखने वाले पन्नू ने कहा कि एफबीआई एजेंट न्यूयॉर्क में उनके घर आए और 15 अक्टूबर को उनकी प्रस्तावित यात्रा के सिलसिले में “ड्यूटी टू वॉर्न” नोटिस दिया। उन्होंने कहा कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने भी उन्हें उनकी जान और ओंटारियो वाले घर को खतरे की चेतावनी दी है। किसी भी एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है।
सिख्स फॉर जस्टिस की ओर से रविवार, 18 अक्टूबर को एडमंटन में होने वाला यह मतदान गैर-बाध्यकारी है। इसमें पूछा जा रहा है कि क्या पंजाब को खालिस्तान नाम का स्वतंत्र देश बनना चाहिए। समूह का कहना है कि कनाडा में जनमत संग्रह के दूसरे आयोजकों को भी हाल के महीनों में ऐसी चेतावनियां मिली हैं।
पन्नू ने इस चेतावनी के बहाने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में भारत के साथ कनाडा के नए सिरे से बढ़ते संबंधों पर सवाल उठाया, जिसमें व्यापार और सुरक्षा पर बातचीत शामिल है। उन्होंने पूछा कि जब आयोजकों को चेतावनियां मिल रही हैं, तब कनाडा “भारत के साथ सुरक्षा सहयोग में प्रगति का दावा” कैसे कर सकता है।
गुप्ता मामला
पन्नू पहले भी निशाने पर रहे हैं। फरवरी में 54 वर्षीय भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने अमेरिका की एक संघीय अदालत में न्यूयॉर्क में पन्नू की हत्या कराने की साज़िश का गुनाह कबूल किया था। गुप्ता ने सुपारी देकर हत्या कराने, उसकी साज़िश और मनी लॉन्ड्रिंग की साज़िश के आरोप स्वीकार किए।
अमेरिकी अभियोजकों का कहना है कि उसने विकास यादव के निर्देश पर काम किया, जिन्हें वे भारत सरकार का कर्मचारी बताते हैं। गुप्ता ने हत्या के लिए जिस व्यक्ति से संपर्क किया, वह अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ काम कर रहा था, और किसी को नुकसान पहुंचने से पहले साज़िश नाकाम कर दी गई। भारत विदेश में सिख कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा में किसी भी भूमिका से इनकार करता रहा है।
नई दिल्ली ने पन्नू के ताज़ा दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।