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शहबाज़ शरीफ़ बोले, भारत ने सिंधु जल संधि तोड़ी तो इसे 'युद्ध की कार्रवाई' माना जाएगा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस्लामाबाद में मालदीव के राष्ट्रपति के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में पानी को 'रेड लाइन' बताया। अप्रैल 2025 से 1960 की संधि को स्थगित रखने वाले भारत की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

संपादकीय डेस्क से · इस्लामाबादप्रकाशित

मुख्य बातें

  1. शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि सिंधु संधि के किसी भी उल्लंघन को पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई मानेगा।
  2. भारत ने सिंधु जल संधि को अप्रैल 2025 से स्थगित रखा है।
  3. पाकिस्तानी अधिकारियों ने हाल में नदियों के बहाव में असामान्य उतार-चढ़ाव की शिकायत की है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने चेतावनी दी है कि भारत ने सिंधु जल संधि का कोई भी उल्लंघन किया तो इस्लामाबाद उसे युद्ध की कार्रवाई मानेगा। पिछले साल भारत के संधि रोकने के बाद से साझा नदियों पर चल रहा विवाद इस बयान से और गरमा गया है।

शरीफ़ ने बुधवार को इस्लामाबाद में दौरे पर आए मालदीव के राष्ट्रपति के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में यह बात कही। यह वार्ता दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के बाद हुई। उनकी ज़्यादातर बातें पानी पर ही केंद्रित रहीं।

उन्होंने कहा, “सब लोग यह जान लें कि इस मामले में किसी भी उल्लंघन को पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई मानेगा।” उन्होंने आगे कहा, “हमारा रुख साफ है। पानी इंसानियत के लिए जीवनरेखा है, खासकर निचले तटवर्ती देशों के लिए।”

उन्होंने कहा कि पानी पाकिस्तान के लिए “रेड लाइन” है, कानूनी रूप से बाध्यकारी संधियों का सम्मान होना चाहिए और साझा पानी को कभी हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान यह बात संयुक्त राष्ट्र महासभा समेत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा चुका है और संधि निलंबित करने के भारत के फैसले पर उसे “गंभीर चिंताएं” हैं। उन्होंने इस फैसले को एकतरफा उल्लंघन बताया।

नई दिल्ली की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

संधि क्या कहती है

सिंधु जल संधि पर 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हस्ताक्षर हुए थे। इसके तहत पश्चिमी नदियों, यानी सिंधु, झेलम और चिनाब, का ज़्यादातर पानी पाकिस्तान को मिलता है, जिन पर उसकी खेती का बड़ा हिस्सा निर्भर है। पूर्वी नदियों, रावी, ब्यास और सतलुज, के पानी के इस्तेमाल का लगभग पूरा अधिकार भारत के पास है।

भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर में हुए एक घातक आतंकी हमले के बाद संधि को “स्थगित” रखने की घोषणा की थी। नई दिल्ली ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया था। पाकिस्तान किसी भी भूमिका से इनकार करता है और कहता है कि संधि में किसी एक पक्ष द्वारा इसे निलंबित करने का प्रावधान नहीं है।

अभी क्यों भड़का मामला

इस्लामाबाद का आरोप है कि भारत संधि वाली नदियों पर जलाशय, विस्तार और जल-मोड़ परियोजनाएं आगे बढ़ा रहा है, हालांकि उसने यह नहीं बताया कि वह किन परियोजनाओं की बात कर रहा है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने हाल में नदियों के बहाव में असामान्य उतार-चढ़ाव की भी शिकायत की है। जिस देश की खेती पश्चिमी नदियों पर इतनी निर्भर हो, वहां ऊपरी इलाके में किसी भी बदलाव को तकनीकी नहीं, बल्कि सुरक्षा का मामला माना जाता है।

शरीफ़ की चेतावनी पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक रूप से व्यस्त समय में आई है। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिश के तहत पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर मंगलवार को तेहरान में थे। शरीफ़ के बयान वाले दिन ही पाकिस्तान ने दोहा में तुर्किये, क़तर और इंडोनेशिया के साथ रक्षा उद्योग समझौते पर हस्ताक्षर किए।

बयान का मंच भी अहम था। शरीफ़ ने यह धमकी किसी घरेलू रैली में नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के एक राष्ट्राध्यक्ष के साथ औपचारिक मौके पर दी, जिसका देश भारत का भी पड़ोसी है। इससे साफ है कि यह संदेश पाकिस्तान की सीमाओं से बहुत आगे तक पहुंचाने के लिए था।