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शहबाज़ शरीफ़ ने ख़ैबर पख़्तूनख़्वा को 160 अरब रुपये दिए, करक में मुठभेड़ में चार पुलिसकर्मी मारे गए

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने पेशावर में सुरक्षा बैठक में प्रांत में गवर्नर शासन का बचाव किया। कुछ घंटे बाद करक में छापे के दौरान आतंकवाद-रोधी विभाग के एक डीएसपी समेत चार पुलिसकर्मी मारे गए। बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों ने ग्वादर में हमला नाकाम करने का दावा किया।

संपादकीय डेस्क से · पेशावरप्रकाशित
शहबाज़ शरीफ़ (फ़ाइल फ़ोटो)
शहबाज़ शरीफ़ (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: khamenei.ir / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. शहबाज़ शरीफ़ ने ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के लिए 160 अरब रुपये के पैकेज का ऐलान किया, जिसका 70% हिस्सा विलय वाले ज़िलों को जाएगा।
  2. करक में छापे के दौरान आतंकवाद-रोधी विभाग के एक डीएसपी और तीन अन्य पुलिसकर्मी मारे गए; दो उग्रवादी भी ढेर हुए।
  3. सुरक्षा बलों के मुताबिक ग्वादर में एक निर्माण शिविर पर हमले की कोशिश कर रहे तीन उग्रवादी मारे गए।

प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने गुरुवार को ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के लिए 160 अरब रुपये के पैकेज का ऐलान किया और प्रांत में अपनी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल और गवर्नर शासन का बचाव किया। पेशावर में एक सुरक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई को कमज़ोर पड़ने दिया।

कुछ ही घंटों में इस लड़ाई की कीमत फिर सामने आ गई। करक ज़िले में उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ में आतंकवाद-रोधी विभाग (सीटीडी) के एक उप पुलिस अधीक्षक समेत चार पुलिसकर्मी मारे गए।

पेशावर की बैठक

शहबाज़ ने नेशनल एक्शन प्लान की एपेक्स कमेटी की बैठक की अध्यक्षता की। यह पाकिस्तान का आतंकवाद-रोधी ढांचा है। बैठक में संघीय मंत्री, प्रांत के गवर्नर फ़ैसल करीम कुंडी और वरिष्ठ नागरिक, सैन्य और पुलिस अधिकारी मौजूद थे। सेना प्रमुख फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने देश के सामने मौजूद चुनौतियों की जानकारी दी।

प्रधानमंत्री ने संघीय नियंत्रण से पहले प्रांत में सत्ता में रही पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) पर उग्रवादियों की वापसी होने देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि करीब 5,000 पुलिस पद खाली छोड़ दिए गए, सेफ़ सिटी परियोजनाएं टलती रहीं और सीटीडी कमज़ोर रहा। उनके मुताबिक संघीय सरकार ने पीटीआई के पिछले दो मुख्यमंत्रियों को पूरी मदद की पेशकश की थी, जिसे कभी स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “शिक्षा और नागरिकों की सुरक्षा जैसे जनता से जुड़े मुद्दों को किनारे कर दिया गया।”

प्रांत के सूचना सलाहकार समर बिलौर ने बताया कि नई रकम का 70% हिस्सा विलय वाले ज़िलों, यानी पूर्व कबायली इलाकों को, और बाकी अन्य ज़िलों को मिलेगा। बिलौर ने कहा कि पुलिस और सीटीडी की समस्याएं प्राथमिकता से दूर की जाएंगी।

यह संघीय कब्ज़ा ऐसे समय हुआ जब पीटीआई इस्लामाबाद तक लंबे मार्च की तैयारी कर रही थी। ख़ैबर पख़्तूनख़्वा बार काउंसिल ने इसे असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक बताया है और इसके खिलाफ सोमवार को प्रांतभर में वकीलों की हड़ताल का आह्वान किया था।

करक में छापा

करक में अभियान गुरुवार दोपहर शुरू हुआ। इससे एक रात पहले उग्रवादियों ने ख़ुर्रम थाना क्षेत्र में चिरपीरा रोड पर नाकाबंदी कर दी थी। पुलिस ने चिरपीरा में कथित उग्रवादी कमांडर क़ैसर इक़बाल के घर पर छापा मारा, जिसके बाद देर तक गोलीबारी चली।

पुलिस ने मृतकों के नाम सीटीडी के डीएसपी इमरानुद्दीन ख़ान, लतांबर थाने के प्रभारी सब-इंस्पेक्टर अफ़ज़ल अवान, डीएसपी के गार्ड काज़िम और बम निरोधक दस्ते के अमजद बताए। दो उग्रवादी भी मारे गए। छापे में ड्रोन टीम, रैपिड रिस्पॉन्स फ़ोर्स और बचाव कर्मी भी शामिल थे। पुलिस ने कहा कि बाकी संदिग्धों की तलाश रात तक जारी थी।

ग्वादर में हमला नाकाम

बलूचिस्तान में सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि बंदरगाह शहर ग्वादर में गुरुवार को एक खाली निर्माण कंपनी शिविर पर हमले की कोशिश कर रहे तीन उग्रवादियों को मार गिराया गया और तीन अन्य को घेर लिया गया। ग्वादर हाईवे के पास एक होटल में अलग अभियान चल रहा था, जहां चार उग्रवादियों के घिरे होने की खबर थी। स्थानीय जनरल ऑफिसर कमांडिंग खुद इसकी कमान संभाल रहे थे। अधिकारियों ने मारे गए लोगों की पहचान नहीं बताई।

अधिकारियों ने हमले के लिए “फ़ित्ना अल-हिंदुस्तान” को ज़िम्मेदार ठहराया। पाकिस्तान यह नाम उन बलूच उग्रवादी गुटों के लिए इस्तेमाल करता है जिन्हें वह भारत समर्थित बताता है।

इसी हफ्ते की शुरुआत में ग्वादर में सड़क किनारे बम धमाके में सेना के एक मेजर की मौत हुई थी।