दुनियापाकिस्तान
शहबाज़ शरीफ़ बोले, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा को जलने देना 'आपराधिक' होता; वकीलों की सोमवार को हड़ताल
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और उनके भाई नवाज़ शरीफ़ ने प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन का बचाव किया। ख़ैबर पख़्तूनख़्वा बार काउंसिल ने इसे असंवैधानिक बताते हुए पूरे प्रांत में हड़ताल का ऐलान किया।

मुख्य बातें
- शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि केपी में आपातकाल लगाने के सिवा सरकार के पास कोई और विकल्प नहीं था।
- नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि गवर्नर शासन पहले ही लगना चाहिए था।
- केपी के वकील सोमवार, 19 अक्टूबर को हड़ताल करेंगे और सोहेल अफ़रीदी की रिहाई चाहते हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लगाने के सिवा उनकी सरकार के पास कोई चारा नहीं था। उनका तर्क है कि चुप बैठने का मतलब प्रांत को खूनखराबे में जाते देखना होता।
शरीफ़ ने शनिवार को गुजरांवाला में पत्रकारों से कहा, “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। हम समझ गए थे कि हम चुपचाप बैठकर खूनखराबा होते नहीं देख सकते।” उन्होंने कहा कि कुछ न करना आपराधिक लापरवाही होती।
रविवार सुबह सामने आए उनके ये बयान इस कदम का सरकार की ओर से अब तक का सबसे सीधा बचाव हैं। यह कदम तब उठाया गया था जब इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) राजधानी की ओर लॉन्ग मार्च की तैयारी कर रही थी।
शरीफ़ ने बताया कि मार्च रोकने के लिए सरकार ने करीब 48 घंटे पीटीआई से बात की, और बातचीत टूटने से पहले उन्होंने प्रांत के मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी के साथ कई बैठकें कीं। दो महीने की अंतरिम व्यवस्था के दौरान एक सलाहकार परिषद प्रांत चलाने में मदद करेगी। उन्होंने इसे निष्पक्ष और ज़्यादातर गैर-राजनीतिक बताया और कहा कि वे खुद इसकी बैठकों में शामिल होंगे।
उन्होंने फ़ैसले को सुरक्षा से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि संघीय सरकार आतंकवाद से लड़ने के लिए “सभी उपलब्ध संसाधन और प्रशासनिक सुविधाएं” देगी, और 2018 से अफ़ग़ानिस्तान से हो रही घुसपैठ और उग्रवाद का ज़िक्र किया।
नवाज़: यह पहले होना चाहिए था
उनके बड़े भाई और सत्तारूढ़ पीएमएल-एन के अध्यक्ष नवाज़ शरीफ़ इससे भी आगे गए। लंदन में उन्होंने कहा कि आपातकाल पहले ही लगा देना चाहिए था। उन्होंने पूछा, “कौन सा देश किसी मुख्यमंत्री को संघीय राजधानी पर हमले के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल करने देता है?”
वकीलों का विरोध
पेशावर में ख़ैबर पख़्तूनख़्वा बार काउंसिल की राय बिल्कुल उलट रही। इसकी कार्यकारी समिति के अध्यक्ष मलिक इमाद आज़म ने आपातकाल और गवर्नर शासन को “असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक” बताया और संघीय सरकार से प्रांत में “दुस्साहस” से बचने को कहा।
प्रांत भर के वकील सोमवार को हड़ताल करेंगे और अदालतों में पेश नहीं होंगे। काउंसिल चाहती है कि अफ़रीदी और प्रांतीय विधानसभा अध्यक्ष बाबर सलीम स्वाती को अदालत में पेश किया जाए या रिहा किया जाए। वह वरिष्ठ वकील और इंसाफ़ लॉयर्स फ़ोरम के नेता अमीर इजाज़ की रिहाई भी मांग रही है, जिन्हें उसके मुताबिक गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है। काउंसिल ने वकीलों के घरों पर कथित गैरकानूनी छापे बंद करने की भी मांग की।
काउंसिल के उपाध्यक्ष असफ़ंदयार ख़ान ने कहा कि उसका पैनल इस कदम के खिलाफ़ याचिका दायर करेगा। पेशावर हाई कोर्ट 20 अक्टूबर को इसे अन्य याचिकाओं के साथ सुन सकता है, और सभी ज़िला व तहसील बार एसोसिएशनों के अध्यक्ष 24 अक्टूबर को आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक करेंगे।