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शेयर बाज़ार में लिस्टिंग की तैयारी के बीच कार्ल्सबर्ग इंडिया का मुनाफा 22% बढ़कर 534 करोड़
टुबोर्ग और कार्ल्सबर्ग एलिफेंट बीयर बनाने वाली कंपनी का राजस्व 2025-26 में 2.2% घटा, लेकिन कम उत्पाद शुल्क से मुनाफा बढ़ा। उसे आईपीओ के लिए सेबी की मंज़ूरी मिल चुकी है।

मुख्य बातें
- मार्च 2026 को खत्म साल में कार्ल्सबर्ग इंडिया का मुनाफा 22% बढ़कर 534.51 करोड़ रुपये रहा।
- परिचालन राजस्व 8,906.5 करोड़ से फिसलकर 8,708.8 करोड़ रुपये पर आया।
- बिक्री प्रोत्साहन पर खर्च 42.6% बढ़कर 848.71 करोड़ रुपये हो गया।
डेनमार्क की बीयर कंपनी की भारतीय इकाई कार्ल्सबर्ग इंडिया का मुनाफा 2025-26 में बिक्री घटने के बावजूद 22% बढ़ा। यह जानकारी कंपनी के ताज़ा वित्तीय विवरणों से मिली है, ऐसे समय जब कंपनी भारतीय एक्सचेंजों पर लिस्टिंग की ओर बढ़ रही है।
मार्च 2026 को खत्म साल में मुनाफा 437.94 करोड़ से बढ़कर 534.51 करोड़ रुपये हो गया। परिचालन राजस्व करीब 2.2% घटकर 8,906.5 करोड़ से 8,708.8 करोड़ रुपये रह गया, और अन्य आय मिलाकर कुल आय 8,814.96 करोड़ रुपये रही।
सपाट बिक्री और बढ़े मुनाफे के बीच का फर्क मुख्य रूप से कर से आया। कंपनी ने 4,816.83 करोड़ रुपये का उत्पाद शुल्क चुकाया, जो पिछले साल के 5,468.24 करोड़ से करीब 12% कम है, और कुल खर्च 4% घटकर 8,090.81 करोड़ रुपये रहा।
बीयर बेचने पर ज़्यादा खर्च
बिक्री प्रोत्साहन पर खर्च 595.07 करोड़ से 42.6% उछलकर 848.71 करोड़ रुपये हो गया, जबकि मार्केटिंग और प्रचार का खर्च 2.2% घटकर 69.22 करोड़ रुपये रहा। मूल समूह को दी गई रॉयल्टी 13.2% बढ़कर 90.01 करोड़ रुपये हो गई।
कार्ल्सबर्ग इंडिया टुबोर्ग, कार्ल्सबर्ग एलिफेंट और क्रोनेनबर्ग 1664 ब्लांक बेचती है। इसका पूरा स्वामित्व सिंगापुर की साउथ एशियन ब्रुअरीज़ के पास है, जो इस क्षेत्र में समूह के कारोबार की होल्डिंग कंपनी कार्ल्सबर्ग साउथ एशिया की सहायक कंपनी है।
आईपीओ की ओर
कंपनी ने जुलाई में गोपनीय रास्ते से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास मसौदा दस्तावेज़ जमा किए थे और 1 अक्टूबर को नियामक की मंज़ूरी मिल गई। बताया गया है कि यह पेशकश 70 करोड़ डॉलर तक की हो सकती है।