LokVox

अर्थव्यवस्थाबैंकिंग

आरबीआई जांच में जोखिम भार की चूक, इंडियन ओवरसीज़ बैंक का पूंजी अनुपात घटकर 19.06%

केंद्रीय बैंक ने पाया कि चेन्नई के इस बैंक ने सिंडिकेटेड विदेशी मुद्रा कर्ज़ और कुछ बिना बांटे कर्ज़ पर ज़रूरी जोखिम भार कम लगाया। बैंक का कहना है कि इससे उसके मुनाफे पर कोई असर नहीं है।

संपादकीय डेस्क से · चेन्नईप्रकाशित
चेन्नई में इंडियन ओवरसीज़ बैंक का केंद्रीय कार्यालय (फ़ाइल फ़ोटो)
चेन्नई में इंडियन ओवरसीज़ बैंक का केंद्रीय कार्यालय (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Nivas10798 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. आरबीआई के आकलन से 31 मार्च 2026 तक आईओबी की जोखिम-भारित संपत्तियां करीब 7,392 करोड़ रुपये बढ़ गईं।
  2. आरबीआई के आंकड़ों पर बैंक का कुल पूंजी पर्याप्तता अनुपात 19.78% से घटकर 19.06% रह जाता है।
  3. आईओबी का कहना है कि इन टिप्पणियों का उसके शुद्ध मुनाफे पर कोई असर नहीं है।

भारतीय रिज़र्व बैंक ने पाया है कि इंडियन ओवरसीज़ बैंक ने अपने कर्ज़ के कुछ हिस्सों पर जोखिम कम आंका, और केंद्रीय बैंक की गणना से इस सरकारी बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात करीब 0.7 प्रतिशत अंक घट जाता है। बैंक ने यह जानकारी शेयर बाज़ारों को दी है।

ये निष्कर्ष आरबीआई के 2026 के पर्यवेक्षी मूल्यांकन निरीक्षण (आईएसई) से निकले हैं और 31 मार्च 2026 तक के बैंक के खातों से जुड़े हैं। आरबीआई के आकलन में आईओबी की जोखिम-भारित संपत्तियां 2,05,323.69 करोड़ रुपये रहीं, जबकि बैंक का अपना आंकड़ा 1,97,931.60 करोड़ रुपये था। यानी करीब 7,392 करोड़ रुपये का फर्क।

इससे कुल पूंजी-जोखिम भारित संपत्ति अनुपात 19.78% से घटकर 19.06% रह जाता है। कोर इक्विटी अनुपात 16.94% से घटकर 16.32% और लीवरेज अनुपात 6.60% से फिसलकर 6.58% पर आता है। खुद पूंजी में सिर्फ 10 करोड़ रुपये की कमी होती है।

कहां छूटा जोखिम

आरबीआई ने चार मामले गिनाए जिनमें ज़रूरी जोखिम भार नहीं लगाया गया। दो मामले सिंडिकेशन के ज़रिए दिए गए विदेशी मुद्रा कॉरपोरेट कर्ज़ के हैं, जहां बाहरी क्रेडिट रेटिंग या तो पूरे सिंडिकेट के कर्ज़ को कवर नहीं करती थी या उसमें लीड बैंक का नाम नहीं था।

तीसरा मामला उन बैंकों से सेकेंडरी सिंडिकेशन के तहत खरीदे गए कर्ज़ का है जो मेज़बान देश में काम नहीं करते। चौथा उन खातों की बिना बांटी रकम से जुड़ा है जिनका मास्टर रिकॉर्ड बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम में खोला ही नहीं गया था, जिससे कुल कर्ज़ कम दर्ज हुआ।

बैंक का जवाब

आईओबी ने कहा कि आरबीआई के आकलन का मार्च 2026 तक के साल के लिए बताए गए शुद्ध मुनाफे पर कोई असर नहीं है। उसका कोर इक्विटी और कुल पूंजी अनुपात 5.50% और 11.50% की नियामकीय न्यूनतम सीमा से काफी ऊपर है।

बैंक ने यह भी कहा कि उसने 30 सितंबर 2026 को खत्म तिमाही की जोखिम-भारित संपत्तियों और पूंजी अनुपात में आरबीआई की टिप्पणियों को पहले ही शामिल कर लिया है।