LokVox

अर्थव्यवस्थाकॉरपोरेट

कंपनियां 31 दिसंबर तक बिना अतिरिक्त शुल्क के जमा कर सकेंगी वित्त वर्ष 2026 के खाते

कंपनी सचिवों की ओर से एमसीए-21 पोर्टल में बार-बार की गड़बड़ियों की शिकायत के बाद कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने वित्तीय विवरण और वार्षिक रिटर्न की समयसीमा बढ़ा दी है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
नई दिल्ली का शास्त्री भवन (फ़ाइल फ़ोटो)
नई दिल्ली का शास्त्री भवन (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Pinakpani / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. कंपनियां वित्त वर्ष 2026 के वित्तीय विवरण फॉर्म एओसी-4 पर 31 दिसंबर 2026 तक बिना अतिरिक्त शुल्क के जमा कर सकेंगी।
  2. फॉर्म एमजीटी-7 और एमजीटी-7ए पर वार्षिक रिटर्न की समयसीमा 31 जनवरी 2027 कर दी गई है।
  3. यह राहत वार्षिक आम बैठक करने की समयसीमा पर लागू नहीं होती।

कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने 24 अक्टूबर के एक परिपत्र में सालाना फाइलिंग की समयसीमा बढ़ा दी है। अब कंपनियां 2025-26 के अपने वित्तीय विवरण 31 दिसंबर 2026 तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के जमा कर सकेंगी।

यह राहत फॉर्म एओसी-4 पर लागू है, जिसके ज़रिए कंपनियां रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ के पास वित्तीय विवरण दाखिल करती हैं। इसमें इसके समेकित, एक्सबीआरएल और एनबीएफसी वाले रूप भी शामिल हैं। फॉर्म एमजीटी-7 और एक व्यक्ति वाली व छोटी कंपनियों के छोटे फॉर्म एमजीटी-7ए पर वार्षिक रिटर्न अब 31 जनवरी 2027 तक, बिना अतिरिक्त शुल्क के, जमा किए जा सकेंगे।

परिपत्र वार्षिक आम बैठक (एजीएम) करने की वैधानिक समयसीमा नहीं बढ़ाता। यानी कागज़ी काम भले बाद में हो, कंपनियों को एजीएम समय पर ही करनी होगी।

पोर्टल की परेशानी

मंत्रालय ने यह कदम अधिक समय मांगने वाले पक्षों की अर्ज़ियों पर उठाया। इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज़ ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) ने 9 अक्टूबर को पत्र लिखकर बिना अतिरिक्त शुल्क के 31 दिसंबर तक की मोहलत मांगी थी। उसने एमसीए-21 वी3 पोर्टल में बार-बार आने वाली गड़बड़ियों और संशोधित फॉर्मों में बढ़ी अनुपालन ज़रूरतों का हवाला दिया था।

संस्थान ने पोर्टल के बंद रहने, धीमी रफ्तार, सेशन टाइमआउट, लॉगिन और प्रोफाइल अपडेट की दिक्कतों, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट जोड़ने में परेशानी और फॉर्म वैलिडेशन फेल होने जैसी शिकायतें गिनाईं।

आईसीएसआई अध्यक्ष पवन जी चांडक ने कहा कि मकसद यह सुनिश्चित करना है कि “अनुपालन की सच्ची कोशिशों पर बदलाव के दौर या तकनीकी चुनौतियों का बुरा असर न पड़े।”

पहली बार नहीं

मंत्रालय ने पिछले साल भी ऐसा किया था। 2024-25 की फाइलिंग के लिए उसने 17 अक्टूबर 2025 और 30 दिसंबर 2025 के परिपत्रों के ज़रिए दो बार समयसीमा बढ़ाई थी।