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एनसीएईआर सर्वे: कारोबारी भरोसा सुधरकर 107.8 पर, पर पिछले साल से काफी नीचे

चार कमज़ोर तिमाहियों के बाद जुलाई-सितंबर में कंपनियां अर्थव्यवस्था को लेकर ज़्यादा आशावादी हुईं, लेकिन ज़्यादातर अगले छह महीने में कोई नई भर्ती नहीं करना चाहतीं।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
भारत का एक रुपये का सिक्का (फ़ाइल फ़ोटो)
भारत का एक रुपये का सिक्का (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: சக்திகுமார் லெட்சுமணன் / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. एनसीएईआर का कारोबारी भरोसा सूचकांक जुलाई-सितंबर तिमाही में 99.8 से बढ़कर 107.8 हो गया।
  2. सूचकांक अब भी एक साल पहले के 142.6 से करीब 35 अंक नीचे है।
  3. 76% से 79% कंपनियां अगले छह महीने में कर्मचारियों की संख्या में कोई बदलाव नहीं चाहतीं।

जुलाई-सितंबर तिमाही में भारतीय कंपनियां अर्थव्यवस्था को लेकर ज़्यादा आशावादी हुईं, लेकिन भरोसा अब भी एक साल पहले के स्तर से काफी नीचे है और कम ही कंपनियां भर्ती की योजना बना रही हैं। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के सर्वे में यह बात सामने आई है।

शुक्रवार को जारी सर्वे नतीजों के मुताबिक इस थिंक टैंक का कारोबारी भरोसा सूचकांक अप्रैल-जून के 99.8 से बढ़कर 107.8 हो गया। एक साल पहले यह 142.6 था, यानी करीब 35 अंक ज़्यादा। यह बढ़त लगातार चार तिमाहियों की गिरावट के बाद आई है।

अर्थव्यवस्था की हालत सुधरने की उम्मीद करने वाली कंपनियों का हिस्सा 43.4% से बढ़कर 49.8% हो गया। अपनी वित्तीय स्थिति बेहतर होने की उम्मीद करने वाली कंपनियां 37% से बढ़कर 40.6% हो गईं, और 29.5% कंपनियों ने मौजूदा निवेश माहौल को सकारात्मक बताया, जो पहले 26% थीं। लगभग सभी, यानी 93.6% कंपनियों ने कहा कि वे अपनी आदर्श क्षमता के करीब या उससे ऊपर काम कर रही हैं।

नौकरियां कमज़ोर कड़ी हैं। कुशल, अकुशल, अस्थायी और स्थायी, चारों श्रेणियों में 76% से 79% कंपनियां अगले छह महीने में कर्मचारियों की संख्या में कोई बदलाव नहीं चाहतीं। ज़्यादा भर्ती की योजना वाली कंपनियों का हिस्सा हर श्रेणी में थोड़ा घटा; कुशल कर्मचारियों के लिए यह 21% से घटकर 20% रह गया।

वेतन भी सपाट दिख रहा है। करीब 69% कंपनियां प्रबंधकीय और कुशल कर्मचारियों के वेतन में और 71% अकुशल कर्मचारियों के वेतन में कोई बदलाव नहीं चाहतीं।

एनसीएईआर 1992 से हर तिमाही अपना बिज़नेस एक्सपेक्टेशंस सर्वे करता है। इस बार सितंबर में छह शहरों की अलग-अलग आकार की 502 कंपनियों को शामिल किया गया।