अर्थव्यवस्थाबाज़ार
इंस्टामार्ट के घाटे से निवेशक नाखुश, स्विगी का शेयर रिकॉर्ड निचले स्तर पर
फूड और ग्रोसरी डिलीवरी कंपनी का शेयर शुक्रवार सुबह करीब 10% टूट गया। जुलाई-सितंबर तिमाही के नतीजों के एक दिन बाद विश्लेषकों ने कहा कि मुनाफे की राह और लंबी हो गई है। घटा घाटा और 36% बढ़ी कमाई भी बाज़ार को नहीं मना पाई।

मुख्य बातें
- बीएसई पर स्विगी करीब 10% गिरकर ₹190.85 के नए निचले स्तर पर आया, लगातार चौथे दिन गिरावट।
- तिमाही शुद्ध घाटा एक साल पहले के ₹1,092 करोड़ से घटकर ₹922 करोड़ रहा।
- ऑर्डर वैल्यू 31.4% बढ़ने के बावजूद इंस्टामार्ट को तिमाही में ₹895 करोड़ का घाटा हुआ।
शुक्रवार सुबह स्विगी का शेयर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, क्योंकि निवेशकों ने कंपनी के सितंबर तिमाही के नतीजों को ठंडा जवाब दिया। बाज़ार खुलते ही बीएसई पर शेयर करीब 10% गिरकर ₹190.85 पर आ गया, जो गुरुवार के ₹211.30 के बंद भाव से 9.6% नीचे है।
यह लगातार चौथे कारोबारी दिन की गिरावट थी और इन चार दिनों में शेयर करीब 18% टूट चुका है। नतीजों के बाद विश्लेषकों ने कमाई के अनुमान और टारगेट प्राइस घटा दिए। उनका कहना है कि कंपनी के मुनाफे में आने का रास्ता लंबा खिंच रहा है।
आंकड़े क्या कहते हैं
कागज़ पर तिमाही बुरी नहीं थी। स्विगी का शुद्ध घाटा एक साल पहले के ₹1,092 करोड़ से घटकर ₹922 करोड़ रह गया और कामकाज से आय 36.1% बढ़कर ₹7,571 करोड़ हो गई। लेकिन कुल खर्च भी ₹6,711 करोड़ से बढ़कर ₹8,703 करोड़ पहुंच गया।
फूड डिलीवरी अब लगातार कमाई कर रहा है। इस कारोबार की ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू 17.7% बढ़कर ₹10,054 करोड़ रही और एडजस्टेड एबिटा ₹341 करोड़ यानी ऑर्डर वैल्यू का 3.4% रहा। प्रबंध निदेशक और ग्रुप सीईओ श्रीहर्ष मजेटी ने कहा कि इस यूनिट ने “अब तक का सबसे ऊंचा मुनाफा और मार्जिन” दिया।
चिंता इंस्टामार्ट को लेकर है, जो ब्लिंकिट और ज़ेप्टो से मुकाबला करने वाला क्विक कॉमर्स कारोबार है। इसकी नेट ऑर्डर वैल्यू 31.4% बढ़कर ₹6,954 करोड़ हुई और 69 नए डार्क स्टोर जुड़ने से नेटवर्क 1,240 तक पहुंच गया, लेकिन कारोबार को ₹895 करोड़ का घाटा हुआ। ऑर्डर वैल्यू के माइनस 1% पर इसका कंट्रीब्यूशन मार्जिन साल भर पहले से बेहतर, पर पिछली तिमाही से कमज़ोर रहा।
मजेटी ने कहा कि क्विक कॉमर्स ने “वादे के मुताबिक तेज़ ग्रोथ” दी और स्विगी को भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनी का दर्जा पाने की मंज़ूरी मिल गई है। उनके मुताबिक भीड़ भरे बाज़ार में रफ्तार और सामान की विविधता अब बुनियादी शर्त बन गई है और अलग पहचान ही विजेता तय करेगी।
यह बिकवाली ऐसे दिन हुई जब दलाल स्ट्रीट पर उपभोक्ता और छोटे शेयरों में भारी कमज़ोरी रही और निफ्टी मिडकैप व स्मॉलकैप सूचकांक पूरे सत्र में तेज़ी से फिसले।