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यूपीआई पर मर्चेंट फीस दिवाली के बाद तक टली, पेटीएम और पाइन लैब्स के शेयर संभले
दुकानों पर बड़े भुगतान पर लगने वाली फीस 15 अक्टूबर से शुरू होनी थी। अब यह त्योहार के बाद अधिसूचित की जाने वाली तारीख से लागू होगी, यानी देरी महीनों की नहीं, हफ्तों की है।

मुख्य बातें
- कुछ यूपीआई भुगतानों पर मर्चेंट फीस 15 अक्टूबर से लगनी थी, अब यह दिवाली के बाद शुरू होगी।
- ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट भुगतान पर फीस 0.40% तय है, अधिकतम ₹300।
- सितंबर में यूपीआई पर रोज़ औसतन रिकॉर्ड 80.2 करोड़ लेनदेन हुए।
दुकानों पर बड़े यूपीआई भुगतान पर लगने वाली नई फीस, जो गुरुवार से शुरू होनी थी, दिवाली के बाद तक टाल दी गई है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने कहा कि कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) अब “दिवाली के तुरंत बाद, अलग से अधिसूचित की जाने वाली तारीख पर” लागू होगा। इसकी वजह त्योहारी सीज़न बताई गई। यह फैसला यूपीआई एंड सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमेटी ने लिया।
पहले घोषित फीस ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट भुगतान पर 0.40% है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन है। बिल भुगतान, यूटिलिटी, शिक्षा और ईंधन पर ₹2,000 से ऊपर के हर लेनदेन पर ₹5 की तय फीस लगेगी।
इसे 1 जनवरी तक टालने की भी चर्चा थी। कम अवधि की देरी से मंगलवार को पेमेंट कंपनियों के शेयर संभले। पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस दिन के निचले स्तर से करीब 6.6% चढ़ी, पाइन लैब्स अपने निचले स्तर से 6.8% उछलकर दोपहर में 1.25% बढ़त के साथ ₹165 पर रही, और मोबिक्विक हरे निशान में आ गई।
इनवैसेट पीएमएस के हर्षल दसानी ने कहा, “जो सच अफवाह से कम बुरा निकले, उससे राहत की तेज़ी आती है, और आज की तेज़ी बस इतनी ही है।” उनके अनुमान के मुताबिक अगर फीस 8 नवंबर के बाद शुरू होती है, तो पेमेंट कंपनियां अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 78 के बजाय करीब 53 दिन ही इसे वसूल पाएंगी। यह एक बार का नुकसान होगा, जिससे दिसंबर के बाद की कमाई पर असर नहीं पड़ेगा।
यह फीस ऐसे समय आ रही है जब यूपीआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। सितंबर में नेटवर्क पर रोज़ औसतन रिकॉर्ड 80.2 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कीमत ₹97,913 करोड़ थी। महीने का कुल वॉल्यूम 2,407 करोड़ लेनदेन रहा, जो एक साल पहले से 22.6% ज़्यादा है।