नीतिव्यापार
गोयल ने शुरू किया ट्रेड कमांड सेंटर, स्कोमेट निर्यात लाइसेंस जल्द निपटाने को कहा
नेशनल स्ट्रैटेजिक ट्रेड कमांड सेंटर डीजीएफटी की योजनाओं, लाइसेंसों और लंबित आवेदनों को इंटरैक्टिव डैशबोर्ड पर लाता है। मंत्री चाहते हैं कि स्कोमेट के लंबित मामलों के लिए हर हफ्ते बैठक हो।

मुख्य बातें
- पीयूष गोयल ने गुरुवार को वाणिज्य भवन में नेशनल स्ट्रैटेजिक ट्रेड कमांड सेंटर की शुरुआत की।
- उन्होंने स्कोमेट लाइसेंस देखने वाली अंतर-मंत्रालयी समिति से ज़रूरत हो तो हर हफ्ते बैठक करने को कहा।
- सेंटर के डैशबोर्ड में आईईसी, एडवांस ऑथराइज़ेशन, ईपीसीजी, सर्टिफ़िकेट ऑफ़ ओरिजिन और स्कोमेट शामिल हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में नेशनल स्ट्रैटेजिक ट्रेड कमांड सेंटर की शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशील वस्तुओं के निर्यात लाइसेंस के लंबित आवेदन जल्द निपटाने को कहा।
वाणिज्य विभाग का बनाया यह सेंटर विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की प्रणालियों का डेटा एक ही जगह डैशबोर्ड पर लाता है। इसका मकसद वरिष्ठ अधिकारियों को देश के व्यापार प्रदर्शन, निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के इस्तेमाल, नियामक मंज़ूरियों और आवेदनों के निपटारे में लगने वाले समय की लगातार जानकारी देना है।
शुरुआत के मौके पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और विदेश व्यापार महानिदेशक लव अग्रवाल मौजूद थे।
स्कोमेट के लंबित मामले
मंत्रालय के मुताबिक, स्कोमेट (स्पेशल केमिकल्स, ऑर्गेनिज़्म्स, मैटेरियल्स, इक्विपमेंट एंड टेक्नोलॉजीज़) का डैशबोर्ड देखते हुए गोयल ने कहा कि इन आवेदनों को देखने वाली अंतर-मंत्रालयी समिति नियमित रूप से, ज़रूरत हो तो हर हफ्ते, बैठक करे ताकि लंबित मामले जल्दी निपटें। इस सूची की वस्तुओं के निर्यात से पहले लाइसेंस लेना होता है।
मंत्रालय ने कहा कि गोयल ने सेंटर की इस बात के लिए सराहना की कि इससे व्यापार से जुड़े फ़ैसले डेटा और सबूतों के आधार पर हो सकेंगे। मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि स्कोमेट के कितने आवेदन लंबित हैं।
डैशबोर्ड पर क्या है
पहले चरण में सेंटर डीजीएफटी के मुख्य कामकाज को कवर करता है: इंपोर्टर एक्सपोर्टर कोड (आईईसी), एडवांस ऑथराइज़ेशन और एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (ईपीसीजी) योजनाएं, सर्टिफ़िकेट ऑफ़ ओरिजिन, स्कोमेट, और प्रतिबंधित आयात-निर्यात।
अधिकारी अपनी पहुंच के अधिकार के हिसाब से डेटा कई स्तरों पर देख सकेंगे: पूरे देश की तस्वीर, अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यालय, योजनाएं, उत्पाद, गंतव्य बाज़ार, और एक-एक आवेदन तक। डैशबोर्ड योजनाओं के इस्तेमाल, निपटारे के समय, लंबित मामलों, निर्यात दायित्वों और अनुपालन पर नज़र रखते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि सेंटर तीन कामों में मदद करेगा: रुझानों और अड़चनों को समय रहते पहचानना, क्षेत्रीय कार्यालयों और योजनाओं को तय लक्ष्यों पर परखना, और बार-बार आने वाली उन समस्याओं को पहचानना जिनके लिए नियम सरल करने की ज़रूरत है।
इसका एक मकसद व्यापार से जुड़ी खुफ़िया जानकारी को बेहतर करना भी है: उत्पाद और बाज़ार के हिसाब से विश्लेषण, व्यापार समझौतों के इस्तेमाल का आकलन, और निर्यात के नए मौकों की तलाश।
आगे क्या
सेंटर डीजीएफटी की मौजूदा प्रणालियों और ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफ़ॉर्म पर चलता है। मंत्रालय की योजना है कि आगे इसमें दूसरे विभागों और एजेंसियों का डेटा, स्वचालित अलर्ट और ज़्यादा उन्नत विश्लेषण जोड़े जाएं।
चरणबद्ध तरीके से इसकी पहुंच दूसरे मंत्रालयों, राज्यों और निर्यात संवर्धन परिषदों तक बढ़ाई जाएगी, ताकि यह पूरी सरकार के लिए फ़ैसलों में मददगार प्रणाली बन सके। मंत्रालय ने कहा कि इससे विभाग और डीजीएफटी “समय-समय पर रिपोर्टिंग से लगातार निगरानी की ओर” बढ़ सकेंगे।
यह शुरुआत उसी दिन हुई जब मंत्रालय ने अप्रैल से सितंबर 2026-27 के दौरान वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात अनुमानित 476.20 अरब डॉलर बताया, जो एक साल पहले 418.31 अरब डॉलर था।
मूल दस्तावेज़
- Union Commerce and Industry Minister Shri Piyush Goyal Launches National Strategic Trade Command Centre at Vanijya BhawanPIB (Ministry of Commerce & Industry), 15 अक्टूबर 2026
- The cumulative exports (merchandise & services) during April-September 2026-27 are estimated at US$ 476.20 BillionPIB (Ministry of Commerce & Industry), 15 अक्टूबर 2026