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श्रम संहिताएं: केंद्र चाहता है कि 31 अक्टूबर तक हर राज्य के नियम तैयार हों

श्रम सचिव के मुताबिक दस राज्यों के अंतिम नियम आ चुके हैं और बाकी ने मसौदा जारी किया है। संहिताएं लागू हुए करीब 11 महीने हो गए, फिर भी इनके कई प्रावधान अब तक राज्यों के नियमों पर टिके हैं।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
मुंबई के धारावी में धातु के ड्रम साफ करते कामगार
मुंबई के धारावी में धातु के ड्रम साफ करते कामगारEverhard van Eimeren / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. श्रम सचिव चंद्र भूषण कुमार ने 24 सितंबर को कहा कि दस राज्यों ने श्रम संहिताओं के तहत अंतिम नियम प्रकाशित कर दिए हैं और बाकी ने मसौदा नियम जारी किए हैं।
  2. केंद्र को उम्मीद है कि 31 अक्टूबर 2026 तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नियम तैयार हो जाएंगे।
  3. एक से ज़्यादा भरोसेमंद स्रोतों के मुताबिक गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और बिहार ने चारों संहिताओं के तहत अंतिम नियम बना लिए हैं; मंत्रालय ने पूरी सूची जारी नहीं की है।
  4. 29 केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह लेने वाली चारों संहिताएं 21 नवंबर 2025 को लागू हुईं, और केंद्र के नियम 8 मई 2026 को अधिसूचित किए गए।

केंद्र सरकार चाहती है कि 31 अक्टूबर 2026 तक हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में चारों श्रम संहिताओं के तहत नियम लागू हो जाएं। बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रम सचिव चंद्र भूषण कुमार ने 24 सितंबर को कहा कि दस राज्यों ने अंतिम नियम प्रकाशित कर दिए हैं और बाकी ने परामर्श के लिए मसौदा नियम जारी किए हैं।

हमें उम्मीद है कि 31 अक्टूबर तक राज्य स्तर पर नियम तैयार हो जाएंगे।

चंद्र भूषण कुमार, केंद्रीय श्रम सचिव, 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में पीएचडीसीसीआई और ग्रांट थॉर्नटन भारत के सेमिनार में, बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार

कुमार ने राज्यों के स्तर पर नियम बनाने को “बहुत, बहुत बड़ी कवायद” बताया, क्योंकि ज़्यादातर मामलों में राज्य सरकारें ही उपयुक्त सरकार होती हैं।

राज्यों के नियम क्यों अहम हैं

चारों संहिताओं, यानी वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता, ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह ली है। ये 21 नवंबर 2025 को लागू हुईं। लॉ फर्म शार्दुल अमरचंद मंगलदास के मुताबिक, केंद्र ने 8 मई 2026 को चारों संहिताओं के तहत अपने नियम और मॉडल स्टैंडिंग ऑर्डर अधिसूचित किए।

श्रम समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए संसद और राज्य विधानसभाएं, दोनों इस पर कानून बना सकती हैं। चूंकि ज़्यादातर मामलों में राज्य ही उपयुक्त सरकार हैं, इसलिए संहिताओं की कई प्रक्रियाएं और शर्तें इस पर निर्भर हैं कि हर राज्य क्या अधिसूचित करता है।

राज्य कहां खड़े हैं

न तो श्रम मंत्रालय ने और न ही बिज़नेस स्टैंडर्ड ने अंतिम नियम बना चुके दस राज्यों के नाम बताए हैं। जुलाई में द ट्रिब्यून और अक्टूबर 2026 के शार्दुल अमरचंद मंगलदास के रोज़गार कानून न्यूज़लेटर, दोनों के मुताबिक गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और बिहार ने चारों संहिताओं के तहत अंतिम नियम बना लिए हैं।

द ट्रिब्यून ने जुलाई में बताया था कि केरल ने संहिताओं के अध्ययन के लिए और समय मांगा है और पश्चिम बंगाल ने मसौदा नियम प्रकाशित नहीं किए हैं। लोकवॉक्स इसकी पुष्टि नहीं कर सका कि उसके बाद इन दोनों में से किसी राज्य ने कोई कदम उठाया है या नहीं।

श्रम संहिताएं, आंकड़ों में

  • 29केंद्रीय श्रम कानून, जिनकी जगह चार संहिताओं ने ली
  • 10राज्य जिनके अंतिम नियम आ चुके हैं, 24 सितंबर 2026 को श्रम सचिव के मुताबिक
  • 1,436 से 351नियमों की संख्या में कटौती, ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के मुताबिक
  • 31 अक्टूबर 2026वह तारीख जब तक केंद्र को सभी राज्यों के नियम तैयार होने की उम्मीद है

संहिताएं एक, नियम अलग-अलग

अब तक अधिसूचित नियम राज्य दर राज्य अलग हैं। शार्दुल अमरचंद मंगलदास के न्यूज़लेटर के मुताबिक, कई राज्यों के सामाजिक सुरक्षा नियमों में निश्चित अवधि (फिक्स्ड-टर्म) के कर्मचारी कम से कम एक साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी के हकदार हो जाते हैं, लेकिन गुजरात के नियमों में पांच साल की शर्त है। महिलाओं को रात की पाली में काम की इजाज़त देने वाले कुछ राज्यों ने अलग-अलग शर्तें रखी हैं: बिहार में ड्यूटी पर कम से कम दो महिलाओं का होना ज़रूरी है और उत्तर प्रदेश में कम से कम चार।

बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, उसी सेमिनार में जारी ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट में कुछ अनसुलझे सवाल भी उठाए गए। इनमें कर्मचारी के नौकरी छोड़ने के दो कार्यदिवसों के भीतर वेतन चुकाने का नियम, और प्रबंधकीय, प्रशासनिक व पर्यवेक्षी भूमिकाओं की परिभाषा का न होना शामिल है।

श्रम संहिताएं: कानून से नियमों तक

  1. 21 नवंबर 2025चारों श्रम संहिताएं लागू, 29 केंद्रीय कानूनों की जगह ली
  2. 8 मई 2026केंद्र ने चारों संहिताओं के तहत नियम और मॉडल स्टैंडिंग ऑर्डर अधिसूचित किए
  3. 10 जुलाई 2026द ट्रिब्यून की रिपोर्ट: चार राज्यों के चारों संहिताओं के तहत अंतिम नियम तैयार; केरल ने और समय मांगा
  4. 24 सितंबर 2026श्रम सचिव ने कहा, दस राज्यों के अंतिम नियम तैयार; 31 अक्टूबर का लक्ष्य तय किया
  5. 31 अक्टूबर 2026हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में नियमों के लिए केंद्र का लक्ष्य

मज़दूरों के लिए डेटा प्लेटफॉर्म

कुमार ने यह भी बताया कि मंत्रालय एक “लेबर स्टैक” बना रहा है, ताकि मज़दूरों के डेटाबेस और कल्याण योजनाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर आ सकें और “आपस में बात कर सकें”। उन्होंने कहा कि 15 दिनों के भीतर इसका पायलट आने की उम्मीद है, जिसके बाद व्यापक रूप से शुरू करने से पहले कम से कम एक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में इसका परीक्षण होगा। इसका फोकस सामाजिक सुरक्षा संहिता के दायरे में आने वाले असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों पर है।

केंद्र की लक्ष्य तिथि में अब बीस दिन बचे हैं।