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श्रम संहिताएं

भारत के केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह लेने वाली चार संहिताएं, और राज्यों में इन्हें ज़मीन पर उतारने का धीमा काम।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह ली है। ये 21 नवंबर 2025 को लागू हुईं।

अभी क्या स्थिति है

केंद्र ने चारों संहिताओं के तहत अपने नियम 8 मई 2026 को अधिसूचित किए। श्रम समवर्ती सूची का विषय है और ज़्यादातर मामलों में राज्य ही उपयुक्त सरकार हैं, इसलिए बहुत कुछ राज्यों के नियमों पर निर्भर है। 24 सितंबर 2026 को श्रम सचिव चंद्र भूषण कुमार ने कहा कि दस राज्यों ने अंतिम नियम प्रकाशित कर दिए हैं और बाकी के मसौदे तैयार हैं, और केंद्र को उम्मीद है कि 31 अक्टूबर तक सबका काम पूरा हो जाएगा।

सरकार ने इन दस राज्यों के नाम नहीं बताए हैं। एक से ज़्यादा भरोसेमंद स्रोतों के मुताबिक गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और बिहार ने चारों संहिताओं के तहत अंतिम नियम बना लिए हैं। जुलाई में द ट्रिब्यून ने खबर दी थी कि केरल ने और समय मांगा है और पश्चिम बंगाल ने मसौदा नियम प्रकाशित नहीं किए हैं।

जो नियम अधिसूचित हो चुके हैं, वे राज्यों में अलग-अलग हैं, जैसे फिक्स्ड-टर्म (निश्चित अवधि) कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और रात की पाली में काम करने वाली महिलाओं की शर्तों पर। बिज़नेस स्टैंडर्ड में उद्धृत ग्रांट थॉर्नटन भारत की एक रिपोर्ट कहती है कि संहिताओं से नियमों की संख्या 1,436 से घटकर 351 और रिटर्न 31 से घटकर एक रह गए हैं।

अहम तारीखें

  1. 21 नवंबर 2025चारों संहिताएं लागू
  2. फरवरी 2026संसद ने औद्योगिक संबंध संहिता में संशोधन किया
  3. 8 मई 2026केंद्र के नियम अधिसूचित
  4. 24 सितंबर 2026श्रम सचिव ने कहा, दस राज्यों के अंतिम नियम तैयार
  5. 31 अक्टूबर 2026सभी राज्यों के नियमों के लिए केंद्र का लक्ष्य

अहम आंकड़े

  • 29केंद्रीय कानूनों की जगह ली
  • 10अंतिम नियमों वाले राज्य, 24 सितंबर 2026
  • 1 सालकी सेवा के बाद संहिताओं के तहत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी ग्रेच्युटी के हकदार
  • 1% से 2%एग्रीगेटर्स के टर्नओवर का हिस्सा गिग कामगारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए, भुगतान के 5% तक सीमित

मुख्य सवाल

क्या श्रम संहिताएं लागू हो गई हैं? हां, 21 नवंबर 2025 से। लेकिन कई प्रावधान राज्यों के नियमों के ज़रिए काम करते हैं, और सितंबर 2026 के आखिर तक ज़्यादातर राज्यों के पास सिर्फ मसौदे थे।

श्रम संहिताओं से कामगारों को क्या मिलेगा? केपीएमजी के सारांश में दी गई सरकार की सूची के मुताबिक: नियुक्ति पत्र, वैधानिक न्यूनतम वेतन, समय पर भुगतान, एक साल बाद फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, 40 साल से ज़्यादा उम्र के कामगारों की मुफ्त सालाना स्वास्थ्य जांच, और गिग व प्लेटफॉर्म कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा।

क्या हर राज्य में श्रम संहिता के नियम एक जैसे हैं? नहीं। शार्दुल अमरचंद मंगलदास के मुताबिक, गुजरात के नियमों में फिक्स्ड-टर्म ग्रेच्युटी के लिए पांच साल की सेवा ज़रूरी है, जबकि कई राज्यों में एक साल। रात की पाली में महिलाओं के काम की शर्तें भी अलग-अलग हैं।

लेबर स्टैक क्या है? श्रम मंत्रालय का बनाया जा रहा एक प्लेटफॉर्म, जो कामगारों के डेटाबेस और कल्याण योजनाओं को जोड़ेगा और जिसका निशाना असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म कामगार हैं। कुमार ने 24 सितंबर को कहा था कि 15 दिनों में इसका पायलट शुरू होने की उम्मीद है; लोकवॉक्स इसकी पुष्टि नहीं कर पाया है कि यह शुरू हुआ या नहीं।

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