नीतिरक्षा
पाकिस्तान के इशाक डार की मौजूदगी में राजनाथ ने एससीओ से कहा, आतंकवाद पर दोहरा मापदंड नहीं
दुशांबे में एससीओ शासनाध्यक्षों की बैठक में रक्षा मंत्री ने कहा कि कनेक्टिविटी परियोजनाओं को संप्रभुता का सम्मान करना होगा, और घोषणा की कि भारत इस साल संगठन का पहला सभ्यतागत संवाद मंच आयोजित करेगा।

मुख्य बातें
- राजनाथ सिंह ने एससीओ से कहा कि आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता और इससे निपटने में दोहरा मापदंड नहीं चलेगा।
- उन्होंने चाबहार और आईएनएसटीसी का ज़िक्र करते हुए कहा कि कनेक्टिविटी परियोजनाओं को संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए।
- भारत साल के अंत तक पहला एससीओ सभ्यतागत संवाद मंच आयोजित करेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) से कहा कि “आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता, और इससे निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं हो सकता।” उन्होंने यह बात दुशांबे में उस बैठक में कही जिसमें पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार भी मौजूद थे।
सिंह ताजिकिस्तान की राजधानी में एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने आतंकवाद को शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया और सदस्य देशों से इसके पूरे तंत्र को खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि “आतंकवादियों को पैसा देने, समर्थन देने या पनाह देने वालों के लिए कोई जगह नहीं” होनी चाहिए।
उन्होंने इस बात को शासनाध्यक्षों की बैठक के आर्थिक एजेंडे से जोड़ा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद बेगुनाहों की जान लेता है, निवेश और व्यापार में बाधा डालता है, समाज को कट्टर बनाता है और युवाओं से अवसर छीनता है। उन्होंने बैठक में कहा, “हमारी सफलता इस बात से मापी जानी चाहिए कि हम युवाओं के लिए कितने अवसर पैदा करते हैं।” डार की किसी टिप्पणी की खबर नहीं आई।
कनेक्टिविटी, शर्तों के साथ
सिंह ने क्षेत्र के बाज़ारों को जोड़ने वाली परियोजनाओं का समर्थन किया और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) व ईरान के चाबहार बंदरगाह को मध्य एशिया को बड़े बाज़ारों से जोड़ने वाले रास्तों के रूप में गिनाया। लेकिन उन्होंने एक शर्त भी रखी: ऐसी परियोजनाओं के लिए परामर्श और संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “जो परियोजनाएं इन सिद्धांतों पर आधारित नहीं होंगी, वे टिकाऊ नहीं होंगी।”
उन्होंने कहा कि केवल सड़कें और बंदरगाह काफी नहीं हैं। उन्होंने कारोबार की लागत घटाने के लिए आसान सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, डिजिटल दस्तावेज़ों और बेहतर लॉजिस्टिक्स की वकालत की, और भारत के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे व स्टार्टअप तंत्र को मिसाल के तौर पर पेश किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, मिशन लाइफ और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन का भी ज़िक्र किया।
उन्होंने कहा कि संगठन को कुशल बने रहना चाहिए और संप्रभु समानता, सर्वसम्मति और आपसी सम्मान के आधार पर काम करना चाहिए, ताकि भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट और ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा की चिंताओं के दौर में सहमति को कार्रवाई में बदला जा सके।
भारत में एक मंच
सिंह ने घोषणा की कि भारत संगठन का पहला सभ्यतागत संवाद मंच आयोजित करेगा। यह विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में तियानजिन एससीओ शिखर सम्मेलन में रखा था। उन्होंने कहा, “भारत इस साल के अंत में पहले एससीओ सभ्यतागत संवाद मंच की मेज़बानी करेगा। हम सभी एससीओ सदस्य देशों को इसमें हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित करते हैं।”
बिश्केक शिखर सम्मेलन को याद करते हुए उन्होंने कहा, “वह मौका केवल हमारी साझा यात्रा की समीक्षा का नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा पर विचार का भी था।”
बैठक में क्या पारित हुआ
प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों ने संयुक्त विज्ञप्ति, 2027 के लिए एससीओ बजट, वित्तीय और प्रशासनिक फैसले, और 2026 से 2030 तक बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना को मंज़ूरी दी। सिंह ने बिश्केक में ताशकंद के यूनिवर्सल सेंटर और दुशांबे के मादक पदार्थ विरोधी केंद्र को एससीओ के स्थायी निकाय बनाने के फैसले का भी स्वागत किया।
बैठक से इतर सिंह ने ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रसूलज़ोदा और ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि रसूलज़ोदा के साथ बैठक ने दोनों देशों के “पुराने सभ्यतागत संबंधों और गहरे जन-संपर्क” को रेखांकित किया।
भारत 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है।
मूल दस्तावेज़
- Defence Minister Rajnath Singh Meets Tajikistan PM Qohir Rosulzoda on Sidelines of SCO MeetingNews On AIR, 20 अक्टूबर 2026