नीतिबाज़ार
सेबी ने बदले सेटलमेंट नियम, ₹10 लाख तक के मामलों के लिए फ़ास्ट ट्रैक
नए नियम 2018 की व्यवस्था की जगह लेंगे। गलत तरीके से कमाया मुनाफ़ा सेटलमेंट राशि से अलग वसूला जाएगा, और कारण बताओ नोटिस के बाद आवेदन के लिए 60 की जगह 90 दिन मिलेंगे।

मुख्य बातें
- सेबी ने सेटलमेंट ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेटिव एंड सिविल प्रोसीडिंग्स रेगुलेशंस, 2026 अधिसूचित किए हैं, जिन्हें उसके बोर्ड ने 24 सितंबर को मंज़ूरी दी थी।
- जिन मामलों में सेटलमेंट राशि ₹10 लाख या उससे कम है, वे सेबी की आंतरिक समिति से सीधे पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास जाएंगे।
- गलत तरीके से कमाया मुनाफ़ा और निवेशकों का नुकसान अलग से वसूला जाएगा, जिससे पुराने फ़ॉर्मूले की दोहरी गिनती खत्म होगी।
- कारण बताओ नोटिस के बाद आवेदन की मियाद 60 से बढ़कर 90 दिन हो गई है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने प्रवर्तन मामलों के सेटलमेंट (निपटारे) के नए नियम अधिसूचित किए हैं। इनसे यह बदलेगा कि नियम तोड़ने वाले कितना भुगतान करेंगे और छोटे मामले कितनी जल्दी बंद होंगे। सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (सेटलमेंट ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेटिव एंड सिविल प्रोसीडिंग्स) रेगुलेशंस, 2026 को 8 अक्टूबर को सेबी की वेबसाइट पर जारी किया गया।
ये 2018 के सेटलमेंट नियमों की जगह लेंगे। सेबी बोर्ड ने 24 सितंबर की बैठक में इस बदलाव को मंज़ूरी दी थी। नए नियम राजपत्र में प्रकाशन से 30 दिन पूरे होने के अगले दिन से लागू होंगे।
सेटलमेंट के ज़रिए सेबी की कार्यवाही का सामना कर रहा कोई व्यक्ति या कंपनी एक राशि चुकाकर और कुछ शर्तें मानकर मामला बंद करा सकती है। नए फ़ॉर्मूले और फ़ास्ट ट्रैक का मकसद व्यवस्था को आसान और ज़्यादा अनुमान लगाने योग्य बनाना है।
राशि तय करने का नया तरीका
अब सेटलमेंट की शर्तों के तीन हिस्से होंगे: सेटलमेंट राशि, जहां लागू हो वहां गलत तरीके से कमाए मुनाफ़े की वसूली (डिसगॉर्जमेंट), और सुधारात्मक व नियामक शर्तें। इन आखिरी शर्तों को पहले गैर-मौद्रिक शर्तें कहा जाता था।
सेटलमेंट राशि एक आधार राशि से शुरू होगी, जो उस उल्लंघन के लिए कानून में तय न्यूनतम जुर्माने से जुड़ी है। अलग-अलग तरह के आवेदकों के लिए इस पर अलग गुणक लगेंगे। फिर इसे कार्यवाही के चरण, संबंधित नियामक कार्रवाई, उल्लंघन की गंभीरता, बढ़ाने और घटाने वाले कारकों और कानूनी खर्च के हिसाब से समायोजित किया जाएगा।
गलत तरीके से कमाया मुनाफ़ा, टाला गया नुकसान और निवेशकों को हुआ नुकसान इस आधार राशि से बाहर रखे गए हैं। इनका हिसाब अलग से लगाकर वसूली होगी, 9% सालाना ब्याज के साथ, और कुछ मामलों में अंतिम आदेश के बाद 12% ब्याज के साथ। सेबी के मुताबिक इससे सेटलमेंट की शर्तों में ऐसी रकम की मौजूदा दोहरी गिनती खत्म होगी।
नए सेटलमेंट नियम, आंकड़ों में
- ₹10 लाख फ़ास्ट ट्रैक की सीमाइतनी या इससे कम सेटलमेंट राशि वाले मामले एक चरण छोड़कर सीधे पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास जाएंगे।
- 90 दिन कारण बताओ नोटिस के बाद आवेदन के लिए2018 के नियमों में यह 60 दिन थी।
- 60 दिन नए सेटलमेंट नोटिस के बादसेबी अब कारण बताओ नोटिस से पहले ही सेटलमेंट का न्योता दे सकता है।
- 20% दूसरे मौके की अतिरिक्त कीमतलंबित मामलों के लिए एक बार की 90 दिन की खिड़की इस्तेमाल करने वालों को देना होगा।
फ़ास्ट ट्रैक के दो रास्ते
जिन मामलों में सेटलमेंट राशि ₹10 लाख या उससे कम है, वे सेबी की आंतरिक समिति से सीधे पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास जाएंगे।
दूसरा रास्ता उल्लंघन के प्रकार पर आधारित है, जिसमें खुलासे (डिस्क्लोज़र) से जुड़ी कुछ चूक शामिल हैं। सेबी एक नोटिस भेजकर देय राशि बताएगा; भुगतान होने पर पैनल सेटलमेंट आदेश जारी करेगा।
ज़्यादा समय, और दूसरा मौका
नियमों में एक सेटलमेंट नोटिस जोड़ा गया है, जिसे सेबी कारण बताओ नोटिस से पहले भेज सकता है। इसके बाद आवेदन के लिए 60 दिन मिलेंगे। जहां अभियोजन या अंतरिम आदेश पर विचार हो रहा हो, वहां ऐसा नोटिस नहीं भेजा जाएगा। कारण बताओ नोटिस के बाद आवेदन का समय 60 से बढ़ाकर 90 दिन कर दिया गया है।
कुछ लंबित कार्यवाहियों के लिए एक बार की 90 दिन की खिड़की भी है। यह उन पर लागू है जिन्होंने पहले आवेदन नहीं किया, और उन पर भी जिनके 2018 के नियमों के तहत आवेदन खारिज, वापस या लौटा दिए गए थे। इस खिड़की से आवेदन करने वालों को सेटलमेंट राशि का 20% अतिरिक्त देना होगा।
गंभीर मामलों का भी निपटारा, शर्तों के साथ
वित्तीय विवरणों में गलत जानकारी या फ़ंड की हेराफेरी (डायवर्ज़न) वाले मामलों का भी सेटलमेंट हो सकेगा। ऐसे मामलों में सेबी सुधारात्मक शर्तें लगाएगा, जैसे सार्वजनिक खुलासे और हेराफेरी की गई रकम की वापसी।