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अंकिता भंडारी मामला: दिल्ली की अदालत के बाहर प्रदर्शनकारी हिरासत में, उत्तराखंड भाजपा ने कांग्रेस के घेराव पर साधा निशाना

कांग्रेस, आप और वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग की, जबकि देहरादून में भाजपा ने विधानसभा घेरने की कांग्रेस की योजना को 'नकारात्मक राजनीति' बताया।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
नई दिल्ली का पटियाला हाउस कोर्ट (फ़ाइल फ़ोटो)
नई दिल्ली का पटियाला हाउस कोर्ट (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Ramesh lalwani / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर उन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जो सीबीआई जांच सीजेआई की निगरानी में चाहते थे।
  2. प्रदर्शनकारियों ने दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द करने की मांग की।
  3. कांग्रेस 27 अक्टूबर को सत्र के पहले दिन उत्तराखंड विधानसभा का घेराव करेगी।

दिल्ली पुलिस ने रविवार को पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। वे उत्तराखंड में 2022 में हुई 19 साल की अंकिता भंडारी की हत्या की पारदर्शी और अदालत की निगरानी में जांच की मांग कर रहे थे।

दिल्ली कांग्रेस के सदस्य लक्ष्मण रावत ने बताया कि करीब 50 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से कई को जाफरपुर थाने ले जाया गया। बताया गया कि प्रदर्शन में 100 से 150 लोग शामिल थे, जिनमें उत्तराखंड के कांग्रेस पदाधिकारी और आम आदमी पार्टी व वाम दलों के सदस्य भी थे।

रावत ने कहा, “अंकिता भंडारी को न्याय चाहिए और उनके परिवार को जवाब चाहिए।” उन्होंने कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं होना चाहिए। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हमारी मांग है कि दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द की जाए।”

प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि चल रही सीबीआई जांच सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में हो और मामले के कथित “वीआईपी” पहलू की निष्पक्ष जांच हो। भाजपा नेता गौतम पर आरोप है कि वही वह “वीआईपी” थे जिन्होंने भंडारी से गलत मांग की थी, हालांकि उनके खिलाफ अब तक कुछ भी आपत्तिजनक साबित नहीं हुआ है। राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद राजधानी में नए सिरे से प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें पिछले हफ्ते इंडिया गेट पर भंडारी के माता-पिता का धरना भी शामिल है।

देहरादून में ‘काला अध्याय’

देहरादून में उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने गैरसैंण में 27 और 28 अक्टूबर को होने वाले दो दिन के सत्र के पहले दिन विधानसभा का घेराव करने की कांग्रेस की योजना पर हमला बोला, जिसकी घोषणा शनिवार को हुई थी। उन्होंने इसे “नकारात्मक राजनीति के इतिहास का एक और काला अध्याय” बताया।

भट्ट ने कहा कि कांग्रेस ने पांच साल सदन के बाहर प्रदर्शन और भीतर हंगामे में बिताए, और विपक्षी विधायकों से अगले साल के चुनाव से पहले के इस आखिरी सत्र को सार्थक बनाने की अपील की।

कांग्रेस का कहना है कि वह अंकिता भंडारी मामले और उसमें कथित वीआईपी की भूमिका के साथ भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पहाड़ों से पलायन के मुद्दे उठाएगी, और राज्य के विधानसभा क्षेत्रों में जनसंवाद के साथ ‘न्याय यात्रा’ निकालेगी।